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गुरुग्राम-गुजरात तक फैला नकली BP की दवाओं का नेटवर्क, गुरुग्राम FDA का एक्शन; कंपनी निदेशक समेत 5 अरेस्ट

Published: Fri, 02 Oct 2026 10:15 AM (IST)

गुरुग्राम और गुजरात में अलग-अलग ब्रांड की नकली बीपी दवाएं पकड़ी गई हैं, लेकिन जांच में असली कंपनी के नाम ...और पढ़ें

एफडीए गुरुग्राम की कार्रवाई में बरामद बीपी की नकली दवा टेल्मा-एएम। सौ. विभाग

एफडीए गुरुग्राम की कार्रवाई में बरामद बीपी की नकली दवा टेल्मा-एएम। सौ. विभाग

वरुण त्रिवेदी, गुरुग्राम। बीपी की नकली दवा के खिलाफ गुरुग्राम में शुरू हुई कार्रवाई अब सिर्फ एक दवा, एक शहर या एक सप्लाई चैन की कहानी नहीं रह गई है।

गुरुग्राम में टेल्मा-एएम और गुजरात में निकार्डिया रिटार्ड-10 की संदिग्ध नकली खेप पकड़े जाने से सवाल खड़ा हुआ है कि क्या देश के अलग-अलग हिस्सों में नकली बीपी की दवाओं के लिए अलग-अलग नेटवर्क सक्रिय हैं या इनके पीछे कहीं कोई साझा कड़ी मौजूद है?

क्योंकि दोनों मामलों में असली कंपनी के नाम, बैच व पैकेजिंग के सहारे बाजार तक पहुंचाई जा रही थी। अभी दोनों मामलों के बीच सीधा संबंध जांच एजेंसियों को नहीं मिला है, लेकिन दोनों मामलों में सामने आए पैटर्न ने जांच का दायरा जरूर बढ़ा दिया है।

गुरुग्राम में जुलाई में सुभाष नगर के मेडिकल स्टोर से संदिग्ध टेल्मा-एएम मिलने के बाद एफडीए ने जांच शुरू की। 19 जुलाई को सुब्रत द्विवेदी की गिरफ्तारी और अगले दिन मुरादाबाद निवासी जुबैर की गिरफ्तारी के बाद जांच दिल्ली तक पहुंची।

सितंबर में रुड़की निवासी विपिन कुमार और काशीपुर निवासी प्रदीप कुमार गिरफ्तार हुए और 90 हजार गोलियां बनाने की जानकारी मिली। इसके बाद कंपनी निदेशक मनीष सिंह राठौर को गिरफ्तार किया गया। अब एफडीए निर्माण, पैकिंग, कच्चे माल और सप्लाई की पूरी कड़ी खंगाल रहा है।

गुजरात में शिकायत से खुला दूसरा नेटवर्क

गुजरात में भी कहानी की शुरुआत बाजार में बीपी की नकली दवा मिलने से हुई। कंपनी की शिकायत के बाद स्थानीय एजेंसी एफडीसीए ने जांच शुरू की और अहमदाबाद से तीन आरोपितों की गिरफ्तारी की। जांच की कड़ी उत्तराखंड, राजस्थान और उत्तर प्रदेश तक पहुंचने की बात सामने आई है।

अब आगे की जांच को लेकर बड़ा सवाल

अब जांच एजेंसियों के सामने सिर्फ यह पता लगाना पर्याप्त नहीं है कि नकली दवा किसने बनाई। असली सवाल यह है कि कच्चा माल, पैकेजिंग सामग्री, नकली लेबल और बाजार तक पहुंचाने वाला नेटवर्क कहां-कहां एक-दूसरे से जुड़ता है।

यदि किसी साझा सप्लायर या पैकेजिंग स्रोत की कड़ी मिलती है तो दोनों मामलों की जांच का दायरा कई राज्यों तक बढ़ सकता है। फिलहाल यह संभावना जांच का विषय है।

बीपी की नकली दवा के मामले में कंपनी निदेशक समेत पांच आरोपियों को जेल भेजा जा चुका है। अब पैकेजिंग सामग्री, नकली लेबल और सप्लाई नेटवर्क की जांच जारी है। आगे की जांच में अगर दूसरे प्रदेश के किसी मामले से कोई जुड़ाव सामने आता है तो वहां की एजेंसी से संपर्क किया जाएगा।

- डाॅ. सुरेश कुमार, औषधि नियंत्रण अधिकारी-2 गुरुग्राम।

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