विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

गुरुग्राम में ओसियन सेवन बिल्डटेक पर ईडी का शिकंजा, 136.42 करोड़ की संपत्ति अटैच

Published: Wed, 14 Oct 2026 07:17 PM (IST)

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने ओसियन सेवन बिल्डटेक प्राइवेट लिमिटेड की 136.42 करोड़ रुपये की संपत्ति धन शोधन रोकथाम कानून के तहत अटैच की है।

ईडी ने करोड़ों की संपत्ति अटैच की। सोशल मीडिया

ईडी ने करोड़ों की संपत्ति अटैच की। सोशल मीडिया

HighLights

  1. ईडी ने ओसियन सेवन बिल्डटेक की 136.42 करोड़ की संपत्ति अटैच की।

  2. धन शोधन रोकथाम कानून के तहत हुई यह बड़ी कार्रवाई।

  3. कुल अटैच संपत्ति का मूल्य अब 188 करोड़ रुपये हुआ।

संवाद सहयोगी, नया गुरुग्राम। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने ओसियन सेवन बिल्डटेक प्राइवेट लिमिटेड के मामले में 136.42 करोड़ रुपये की संपत्ति अटैच की है। यह कार्रवाई धन शोधन रोकथाम कानून (पीएमएलए) के तहत की गई है।

अटैच की गई संपत्तियों में राजस्थान के जयपुर और कोटपूतली-बहरोड़ में जमीन, गुरुग्राम के सेक्टर-102 में एक रिहायशी प्लाट और पांच बैंक खातों में जमा राशि शामिल है। इस कार्रवाई के बाद मामले में अब तक अटैच की गई संपत्तियों का कुल मूल्य करीब 188 करोड़ रुपये हो गया है।

ईडी के अनुसार, कंपनी, उसके प्रमोटर स्वराज सिंह यादव, उनकी पत्नी सुनीता स्वराज और अन्य लोगों के विरुद्ध दिल्ली, हरियाणा और राजस्थान पुलिस में दर्ज मामलों के आधार पर जांच शुरू की गई थी। इन मामलों में धोखाधड़ी, विश्वास तोड़ने, जालसाजी और आपराधिक साजिश के आरोप हैं। ताजा कार्रवाई मुख्य रूप से राजस्थान में दर्ज दो एफआईआर से जुड़ी है।

118 करोड़ से अधिक लेने का आरोप

जांच में सामने आया कि कंपनी ने दिसंबर 2006 से मार्च 2015 के बीच राजस्थान में अपने चार प्रोजेक्ट के लिए प्लाट खरीदारों से 118 करोड़ रुपये से अधिक जुटाए। इनमें जयपुर के बिलोंची गांव में एम्बर गार्डन और कोटपूतली-बहरोड़ में कोट रेजिडेंसी, कोट फार्म्स और कोट इंडस्ट्रियल एस्टेट शामिल हैं।

खरीदारों को भरोसा दिया गया था कि प्रोजेक्ट विकसित करके तीन से चार साल में प्लाट का कब्जा दे दिया जाएगा। ईडी के मुताबिक, एम्बर गार्डन के लिए दिसंबर 2006 में ही खरीदारों से पैसा लेना शुरू कर दिया गया था, जबकि उस समय कंपनी ने जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) में प्रोजेक्ट का नक्शा भी जमा नहीं किया था।

जेडीए और राजस्व अधिकारियों की जांच में पता चला कि ये प्रोजेक्ट विकसित नहीं किए गए और मौके पर जमीन काफी हद तक खाली पड़ी है। कई खरीदारों ने पूरी रकम चुकाई और कुछ के पास रजिस्ट्री व कब्जे के पत्र भी थे, लेकिन उन्हें प्लाट का कब्जा नहीं मिला और जमीन की निशानदेही भी नहीं हुई।

दूसरे कामों में पैसा लगाने का आरोप

ईडी का आरोप है कि खरीदारों से जुटाई गई रकम का इस्तेमाल प्रोजेक्ट विकसित करने के बजाय अन्य कामों में किया गया। इसमें गुरुग्राम में कंपनी के कार्यालय के लिए जगह खरीदना और दूसरे प्रोजेक्ट में पैसा लगाना शामिल है।

वहीं, जांच में यह भी सामने आया कि जून से सितंबर 2025 के बीच कंपनी और उसके प्रमोटरों की करीब 39 एकड़ जमीन करीबी लोगों और अन्य संस्थाओं के नाम कर दी गई। ईडी ने इन संपत्तियों को भी अटैच किया है। इससे पहले जनवरी 2026 में करीब 51.57 करोड़ रुपये की संपत्ति अटैच की गई थी।

ईडी ने इस मामले में विशेष अदालत में शिकायत भी दाखिल की थी। फिलहाल मामले की जांच जारी है।

यह भी पढ़ें- अर्थ ग्रुप की 140 करोड़ रुपये की संपत्ति ईडी ने की कुर्क, धाखाधड़ी के मामले में एक्शन