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Exclusive: दुनिया के टॉप 2% वैज्ञानिकों की लिस्ट में गुरुग्राम की बेटी का नाम, सपना ने शोध के दम पर बनाई पहचान

Published: Sat, 17 Oct 2026 12:42 PM (IST)

गुरुग्राम के झुंडसराय गांव की डॉ. सपना लांग्यान को 2026 में विश्व के शीर्ष दो प्रतिशत वैज्ञानिकों की सूची में स्थान मिला है।

गांव झुंडसराय की बेटी डॉ. सपना लांग्यान। AI जनरेटेड

गांव झुंडसराय की बेटी डॉ. सपना लांग्यान। AI जनरेटेड

HighLights

  1. डॉ. सपना लांग्यान विश्व की शीर्ष 2% वैज्ञानिकों में शामिल।

  2. गुरुग्राम के झुंडसराय गांव की बेटी ने हासिल की उपलब्धि।

  3. कृषि अनुसंधान और जैव रसायन में उनके शोध को मिली पहचान।

आदित्य राज, गुरुग्राम। सपनों की उड़ान के लिए बड़े शहर में जन्म लेना जरूरी नहीं, बल्कि ज्ञान के प्रति लगन, निरंतर मेहनत और अपने लक्ष्य के प्रति समर्पण जरूरी है।

गुरुग्राम जिले के गांव झुंडसराय की बेटी डॉ. सपना लांग्यान ने अपनी वैज्ञानिक उपलब्धि से इस बात को चरितार्थ किया है। वर्ष 2026 में विश्व के शीर्ष दो प्रतिशत वैज्ञानिकों की सूची में स्थान हासिल कर उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है। उनकी यह उपलब्धि केवल परिवार या गांव तक सीमित नहीं, बल्कि विज्ञान और अनुसंधान के क्षेत्र में आगे बढ़ने की आकांक्षा रखने वाले युवाओं के लिए भी प्रेरणा है।

हिसार की बहू डॉ. सपना वर्तमान में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आइसीएआर) के अंतर्गत नई दिल्ली के पूसा परिसर स्थित राष्ट्रीय पादप आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो (एनबीपीजीआर) में जैव रसायन की वरिष्ठ वैज्ञानिक हैं।

कृषि अनुसंधान से जुड़े इस संस्थान में पौधों के आनुवंशिक संसाधनों के अध्ययन और संरक्षण की दिशा में काम किया जाता है। इसी वैज्ञानिक परिवेश में उनका कार्य पौधों से जुड़े शोध और जैव रसायन के क्षेत्र से संबंधित है।

शोध की दुनिया में बनाई अंतरराष्ट्रीय पहचान

डॉ. सपना को मिली पहचान स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी और एल्सेवियर से संबंधित विश्व के शीर्ष दो प्रतिशत वैज्ञानिकों की सूची से जुड़ी है। इस सूची में वैज्ञानिकों के शोध प्रकाशनों, उद्धरणों और अन्य शोध-संबंधी मानकों के आधार पर मूल्यांकन किया जाता है। इसमें स्थान मिलना किसी वैज्ञानिक के शोध योगदान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलने का महत्वपूर्ण संकेत है। यह उपलब्धि विज्ञान के क्षेत्र में निरंतर अध्ययन, विशेषज्ञता और शोध के महत्व को भी रेखांकित करती है। कृषि अनुसंधान का महत्व प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं है।

पौधों की जैविक प्रक्रियाओं को समझना, आनुवंशिक विविधता का अध्ययन करना और पादप संसाधनों के संरक्षण के उपाय तलाशना कृषि के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण है। जलवायु परिवर्तन, खाद्य सुरक्षा और फसलों की बदलती जरूरतों के दौर में वैज्ञानिकों का यह कार्य और भी प्रासंगिक हो जाता है।

वैज्ञानिक पहचान तक का सफर

डॉ. सपना लांग्यान हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय की पूर्व छात्रा रही हैं। विश्वविद्यालय से जुड़ा उनका शैक्षणिक सफर और आज वैज्ञानिक के रूप में मिली अंतरराष्ट्रीय पहचान शिक्षा और शोध के बीच के मजबूत संबंध को सामने लाती है।

कृषि विज्ञान में उच्च शिक्षा हासिल करने वाले विद्यार्थियों के लिए उनका सफर यह संदेश देता है कि शोध के क्षेत्र में करियर बनाकर भी वैश्विक मंच पर पहचान हासिल की जा सकती है। गुरुग्राम के गांव झुंडसराय से जुड़ी डॉ. सपना की उपलब्धि ग्रामीण पृष्ठभूमि से आने वाली बेटियों के लिए विशेष महत्व रखती है।

अक्सर करियर की संभावनाओं को लेकर विद्यार्थियों का ध्यान कुछ चुनिंदा क्षेत्रों तक सीमित रहता है, जबकि विज्ञान, जैव रसायन और कृषि अनुसंधान में भी व्यापक अवसर मौजूद हैं। डॉ. सपना की सफलता इन संभावनाओं को समझने और उनके लिए तैयारी करने की प्रेरणा देती है।