गोविन्द फलस्वाल, मानेसर (गुरुग्राम)

सड़क हादसे के जिम्मेदार वाहन चालक की पहचान कर शीघ्रता से पुलिस कार्रवाई कराने के लिए डीसीपी मानेसर ने एक्सिडेंट रिस्पांस टीम बनाई है। इस टीम ने कई अनसुलझे मामलों को सुलझाकर पीड़ित को दुर्घटना बीमा राशि दिलाने में मदद की है। टीम के बेहतर कार्य को देखते हुए डीसीपी जल्द ही सुझाव पुलिस मुख्यालय को भेजेंगे कि पूरे प्रदेश में इस तरह की टीम बनाई जा सकती है। राजस्थान के जिला सीकर के गांव मधेला निवासी विनोद आइएमटी मानेसर स्थित कंपनी कार्यरत हैं। 21 जून की देर शाम गुरुग्राम स्थित अपने घर जाने के लिए दिल्ली-जयपुर हाईवे स्थित गांव नरसिंहपुर के नजदीक पहुंचे तो उनकी मोटरसाइकिल को अज्ञात वाहन ने टक्कर मार दी। चालक वाहन लेकर भाग गया था। विनोद के भाई विजय ने सेक्टर 37 थाना पुलिस को शिकायत देकर मामला दर्ज करा दिया।

मामला दर्ज होने के दस दिन बाद ही विनोद को पता लगा कि गुरुग्राम पुलिस द्वारा उसे टक्कर मारने वाले व्यक्ति को गिरफ्तार कर लिया गया है और वाहन भी जब्त कर लिया गया। वाहन जब्त होने पर विनोद को बीमा कंपनी की इंश्योरेंस की रकम भी दे दी गई। आरोपित चालक की पहचान बिहार के गया जिला निवासी मुकेश के रूप में हुई। अब विनोद ने पूरी तरह ठीक होकर कंपनी में अपना कार्य शुरू कर दिया है। यह सब हुआ मानेसर पुलिस उपायुक्त द्वारा पायलट प्रोजेक्ट के रूप में बनाई गई एक्सिडेंट रिस्पांस टीम के सहयोग से।

दरअसल, मानेसर पुलिस उपायुक्त वरुण सिगला ने मानेसर पुलिस जिले के सभी आठ थानों के क्षेत्र में एक एक्सिडेंट रिस्पांस टीम बनाई है। इस टीम में सभी जिलों से सबसे बेहतर कार्य करने वाले जांच अधिकारियों को शामिल किया गया है। इस टीम में कुल छह सदस्य हैं। शुरू में संसाधनों की कमी के कारण काफी दिक्कत हुई लेकिन अब सीएसआर से एक गाड़ी भी टीम को उपलब्ध करा दी गई है। इसके पास प्राथमिक उपचार के लिए सभी सुविधाएं उपलब्ध हैं। इस टीम का मुख्य कार्य अनसुलझे सड़क हादसों को सुलझाना है। यह टीम थाना क्षेत्र के जांच अधिकारी की जांच को बाधित किए बिना कार्य करती है। टीम की तरफ से मानेसर पुलिस जिले में सभी हादसा होने वाली जगहों को बारीकी से जांचा जा चुका है। पंद्रह मामले सुलझा लिए गए हैं। इसकी देखरेख मानेसर पुलिस उपायुक्त खुद कर रहे हैं। टीम के सदस्य मौके पर जाकर हालातों की फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी करती है। टीम उस क्षेत्र में लगे सीसीटीवी कैमरों की जांच करती है और वाहन तक पहुंचने के लिए कार्य करती है।

घायलों और मृतकों के परिजनों को लाभ पहुंचाना है लक्ष्य

टीम के सदस्यों द्वारा सभी मामलों में आरोपितों की पहचान की जाती है और वाहन जब्त किया जाता है। वाहन जब्त होने पर 58 नंबर फार्म भरा जाता है और पीड़ित को मुआवजे का लाभ दिलाया जाता है। अनसुलझे मामले की रिपोर्ट जाने पर बीमा कंपनियों से पीड़ित को लाभ नहीं मिलता है। वहीं अगर 58 नंबर फार्म में अधिक जानकारी देने पर पीड़ित को अधिक लाभ मिलता है। अगर आरोपित और पीड़ित में बाहर समझौता होता है तो इसमें भी पीड़ित को आर्थिक लाभ मिलता है। टीम में जिले के बेहतर कार्य करने वाले जांच अधिकारियों को शामिल किया है। उन्हें विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। इनका कार्य सिर्फ अनसुलझे मामलों को सुलझाना है। जांच अधिकारी कुछ समय में ही मामले को सुलझाने लगे हैं। यह प्रयास बेहतरीन साबित हो रहा है।

वरुण सिगला, पुलिस उपायुक्त, मानेसर

Edited By: Jagran