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कर्ज के जाल में फंसाकर चल रहा था वसूली का धंधा

बिना लाइसेंस के चलाई जा रही एक फर्जी कंपनी का साइबर क्राइम की टीम ने भंडाफोड़ किया है। कंपनी गैरकानूनी तरीके से अधिक प्रोसेसिग फीस लेकर एप के माध्यम से कर्ज देने का काम कर रही थी।

By JagranEdited By: Published: Fri, 22 Oct 2021 02:53 PM (IST)Updated: Fri, 22 Oct 2021 03:19 PM (IST)
कर्ज के जाल में फंसाकर चल रहा था वसूली का धंधा

जागरण संवाददाता, गुरुग्राम: बिना लाइसेंस के चलाई जा रही एक फर्जी कंपनी का साइबर क्राइम की टीम ने भंडाफोड़ किया है। कंपनी गैरकानूनी तरीके से अधिक प्रोसेसिग फीस लेकर एप के माध्यम से कर्ज देने का काम कर रही थी। समय पर कर्ज की राशि नहीं लौटाने वालों को डराकर अधिक पैसे वसूलती थी। मौके से ही कंपनी संचालक संजय कुमार एवं भारत को दबोच लिया गया। दोनों के खिलाफ मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी गई है। मौके से एक लैपटाप एवं दो मोबाइल कब्जे में लिए गए हैं।

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बृहस्पतिवार शाम साइबर क्राइम थाने को सूचना मिली कि सेक्टर-58 स्थित मैगनम टावर-एक की आठवीं मंजिल पर पीएसपीआर एंटरप्राइजेज नाम से संचालित कंपनी बिना आरबीआइ की मंजूरी एवं नान-बैंकिग फाइनेंशियल कंपनी (एनबीएफसी) का लाइसेंस लिए बिना ही लोगों को आनलाइन गैरकानूनी तरीके से कर्ज देती है। सूचना के आधार पर टीम बनाकर मौके पर भेजा गया। वहां पर छह युवतियों के साथ ही 16 युवक कंप्यूटर पर काम कर रहे थे। सभी एक वेबसाइट खोलकर काम कर रहे थे। मौके पर ही संचालक फरीदाबाद जिले के गांव फतेहपुर निवासी संजय कुमार एवं चरखी दादरी जिले के गांव बिजना भारत कुमार मिल गए। दोनों से कंपनी संचालन को लेकर संबंधित कागजात मांगे गए लेकिन नहीं दिए। इसके बाद दोनों को काबू कर लिया गया। सात दिन के भीतर कर्ज लौटाना होता था

संचालकों से पूछताछ में पता चलाकी कंपनी का वेब पोर्टल मायाकैश एप्लीकेशन है जो आनलाइन काम करता है। कंपनी लोगों को दो हजार, तीन हजार एवं पांच हजार रुपये के शार्ट टर्म लोन देती थी। जिन लोगों को कर्ज की जरूरत होती थी, उन्हें गूगल प्ले स्टोर से मायाकैश एप इंस्टाल करना होता था। उसमें अपना नाम, मोबाइल नंबर फीड करते थे। कर्ज लेने के लिए अपना पैन कार्ड एवं आधार कार्ड भी अपलोड करना होता था।

लेते थे मोटी प्रोसेसिंग फीस

इसके बाद कंपनी के कर्मचारी फोन करके वेरिफाई करते थे। दो हजार रुपये के कर्ज के लिए 600 रुपये प्रोसेसिग फीस एवं ब्याज, तीन हजार रुपये के कर्ज के लिए 750 रुपये प्रोसेसिग फीस एवं ब्याज तथा पांच हजार रुपये के कर्ज के लिए 1200 रुपये प्रोसेसिग फीस एवं ब्याज लेती थी। जो व्यक्ति अप्लाई करता था उसे प्रोसेसिग फीस काटकर कर्ज दिया जाता था। कर्ज लौटाने का समय सात दिन का होता था। समय सीमा के भीतर कर्ज नहीं लौटाने वालों को उनके पर्सनल फोटो, मोबाइल नंबर एवं कुछ अन्य व्यक्ति जानकारी वायरल करने का डर दिखाकर पैसे ऐंठते थे। बता दें कि इससे पहले जिले में पिछले कुछ वर्षो के दौरान 40 से अधिक फर्जी काल सेंटर पकड़े जा चुके हैं। यह कंपनी भी काल सेंटर की तरह ही काम कर रही थी।


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