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विश्व हिंदू परिषद ने बताया अयोध्या राममंदिर के नए CEO कब संभालेंगे कार्यभार? सख्त करेंगे 'सिस्टम'

Published: Sat, 12 Sep 2026 04:54 PM (IST)

अयोध्या राम मंदिर में 20 सितंबर से व्यवस्थाओं को मजबूत करने के लिए नए मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) और न्यास के सदस्य कार्यभार संभालेंगे।

मंदिर के नवनियुक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) और न्यास के नए सदस्य 20 सितंबर को अपनी जिम्मेदारी संभालेंगे।

मंदिर के नवनियुक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) और न्यास के नए सदस्य 20 सितंबर को अपनी जिम्मेदारी संभालेंगे।

HighLights

  1. 20 सितंबर से नए सीईओ व न्यास सदस्य संभालेंगे जिम्मेदारी।

  2. राम मंदिर की प्रशासनिक व्यवस्था को मिलेगा पेशेवर स्वरूप।

  3. श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा और वित्तीय निगरानी होगी मजबूत।

जागरण संवाददाता, गुरुग्राम। अयोध्या में राम मंदिर की व्यवस्थाओं को और अधिक मजबूत एवं व्यवस्थित करने की दिशा में बड़ा बदलाव 20 सितंबर से होगा। मंदिर के नवनियुक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) और न्यास के नए सदस्य 20 सितंबर को अपनी जिम्मेदारी संभालेंगे। इसके साथ ही मंदिर की प्रशासनिक व्यवस्था को नई दिशा देने की प्रक्रिया शुरू होगी।

वीएचपी ने बताई तारीख

यह जानकारी शनिवार को विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय संयुक्त महामंत्री डाॅ. सुरेंद्र जैन ने सिविल लाइंस में पत्रकारों से बातचीत में दी। उन्होंने बताया कि राम मंदिर की व्यवस्थाएं लगातार विस्तार ले रही हैं। मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ रही है और आने वाले समय में इससे जुड़ी गतिविधियां और भी व्यापक होंगी। ऐसे में व्यवस्था को केवल परंपरागत तरीके से चलाने के बजाय उसे पेशेवर और संस्थागत स्वरूप देना जरूरी है।

'योग्य व्यक्ति का चयन किया गया'

इसी आवश्यकता को देखते हुए सीईओ की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू की गई। सीईओ के चयन में प्रशासनिक क्षमता, बड़े स्तर पर व्यवस्था संभालने का अनुभव, नेतृत्व क्षमता और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय स्थापित करने की योग्यता जैसे पहलुओं को प्रमुखता दी गई। आवेदन और चयन की प्रक्रिया के बाद योग्य व्यक्ति का चयन किया गया। अब 20 सितंबर से नए सीईओ और न्यास के नए सदस्य अपनी जिम्मेदारी संभालेंगे।

व्यवस्था को मजबूत सिस्टम के आधार पर चलाने की तैयारी

नए सीईओ के सामने सबसे महत्वपूर्ण चुनौती राम मंदिर की व्यवस्थाओं को और अधिक संस्थागत बनाने की होगी। श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा, मंदिर परिसर की व्यवस्थाओं, प्रशासनिक समन्वय, वित्तीय निगरानी और भविष्य की परियोजनाओं को गति देना उनकी प्राथमिकताओं में शामिल रहेगा।

उद्देश्य यह है कि राम मंदिर जैसी विशाल धार्मिक संस्था की व्यवस्था स्पष्ट जिम्मेदारियों और निर्धारित प्रक्रियाओं के आधार पर चले। डा. जैन ने कहा कि नई व्यवस्था में यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि जिन कार्यों की जिम्मेदारी जिस अधिकारी या संस्था को दी गई है, उसकी प्रभावी निगरानी हो और जवाबदेही भी तय हो।

एसबीआई की लापरवाही से हुई गड़बड़ी

मंदिर में दान राशि से जुड़ी गड़बड़ी के सवाल पर डा. जैन ने कहा कि इसमें भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआइ) की लापरवाही भी सामने आई है। बैंक को जिन विषयों पर विशेष ध्यान देने के लिए कहा गया था, उन पर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया गया। इसका कुछ लोगों ने लाभ उठाया और गड़बड़ी की स्थिति पैदा हुई।

उन्होंने स्पष्ट किया कि अब ऐसी स्थिति दोबारा न हो, इसके लिए व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है। वित्तीय लेन-देन और दान राशि की निगरानी में जवाबदेही बढ़ाई जाएगी। नए सीईओ के सामने भी यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होगी कि मंदिर की व्यवस्थाओं में किसी स्तर पर लापरवाही की गुंजाइश न रहे।

20 सितंबर से नई जिम्मेदारी, नई कार्यप्रणाली की शुरुआत

नवनियुक्त सीईओ और न्यास के नए सदस्यों के जिम्मेदारी संभालने के साथ राम मंदिर प्रबंधन में एक नए चरण की शुरुआत होगी। ट्रस्ट का जोर अब ऐसी व्यवस्था विकसित करने पर है, जिसमें श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या के अनुरूप सुविधाएं विकसित हों और प्रशासनिक व वित्तीय कार्यों में पारदर्शिता तथा जवाबदेही बनी रहे। 20 सितंबर को जिम्मेदारी संभालने के बाद नए सीईओ की भूमिका इसी व्यापक बदलाव को जमीन पर उतारने में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।