जागरण संवाददाता, गुरुग्राम: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक व भारत-तिब्बत सहयोग मंच के संरक्षक इंद्रेश कुमार ने कहा कि भारत और नेपाल की संस्कृति मिली जुली है। वर्ष 1950 की भारत-नेपाल शांति और मित्रता संधि दोनों देशों के बीच मौजूद विशेष संबंधों का आधार है। भारत-नेपाल की खुली सीमा दोनों देशों के संबंधों की विशिष्टता है। ये विचार इंद्रेश कुमार ने सोमवार को नेपाली संस्कृति अंतरराष्ट्रीय परिषद की ओर से झाड़सा रोड स्थित एक होटल में आयोजित चतुर्थ भानु सम्मान पुरस्कार समारोह को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच 1850 किलोमीटर से अधिक लंबी सांझा सीमा है जिससे भारत के पांच राज्य सिक्किम, बंगाल, बिहार, उत्तर प्रदेश व उत्तराखंड जुड़े हैं। दोनों देशों के बीच सीमा को लेकर कोई बड़ा विवाद नहीं है। उन्होंने कहा कि देश की एकता व अखंडता को बनाए रखना जरूरी है। इसके लिए हर भारतीय को काम करना चाहिए। सबसे पहले हमारे लिए हमारा राष्ट्र होना चाहिए। राष्ट्र के सम्मान में हम सबको अपना अहम योगदान देना चाहिए। हम अपनी भावी पीढि़यों को जीवन में कामयाबी के साथ राष्ट्र भक्ति भी सिखाएं। ओलिपिक में गए खिलाड़ियों के विजयी होने की कामना करते हुए उन्होंने कहा कि कोई भी खिलाड़ी दूसरे को हराने के लिए नहीं, बल्कि खुद जीतने के लिए खेलता है। यह खिलाड़ी का गुण होता है। उन्होंने मेडल जीतने वाली खिलाड़ी चानू को बधाई देते हुए कहा कि उन्होंने देश का सम्मान बढ़ाया है। गुड़गांव से विधायक सुधीर सिगला ने कहा कि गुरुग्राम शहर में भी पूरा भारत बसता है। हर राज्य के लोग यहां पर किसी न किसी संस्थान, कंपनी में काम करते हैं। यहां पर कई संस्कृतियों का मिश्रण है। सभी में इतनी एकता, भाईचारा है कि यहां शांति के साथ उद्योग-धंधे चल रहे हैं। कार्यक्रम में राज्यसभा सदस्य रामचंद्र जांगड़ा, झारखंड यूनिवर्सिटी के कुलपति डा. एमके वाजपेयी, नेपाल संस्कृति परिषद के अंतरराष्ट्रीय कार्य अध्यक्ष अशोक चौरसिया, भाजपा नेता डा. विजय जौली, कार्यक्रम के संयोजक महेंद्र सिंह एवं पीताम्बर सुवेदी आदि शामिल हुए। समारोह के बाद इंद्रेश कुमार विधायक सुधीर सिगला के आवास पर भी पहुंचे। इस दौरान उनका परिवारजनों, कार्यकर्ताओं ने स्वागत किया। इस मौके पर मंच के राष्ट्रीय मंत्री प्रमोद गोयल व मंच के प्रांत अध्यक्ष अमित गोयल भी मौजूद रहे।

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