संवाद सूत्र, रतिया : एसडीएम सुरेन्द्र बेनीवाल ने रतिया क्षेत्र के किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि प्रदेश में धान व गेहूं फसल प्रणाली लगातार अपनाने से फसलों व मृदा की उत्पादन शक्ति में कमी व गिरते भू-जल स्तर के साथ-साथ जलवायु परिवर्तन जैसी समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं, जो कि किसानों को आर्थिक दृष्टि से नुकसान पहुंचा रही हैं। उप मंडलाधीश शुक्रवार को इंपीरियल गार्डन पैलेस में रतिया क्षेत्र के किसानों को धान की अपेक्षा अन्य फसलों की बिजाई करने के लिए विशेष आह्वान कर रहे थे।

बैठक में कृषि विभाग के अधिकारियों ने किसानों को विभिन्न नई फसलों मक्का, कपास आदि को अपनाने के लिए प्रेरित किया और इसके साथ-साथ नई फसल की बिजाई पर सरकार द्वारा दी जाने वाली 7 हजार रुपए एकड़ की राशि व अन्य सुविधाओं की भी विशेष जानकारी दी। इस दौरान अधिकारियों ने बताया कि कृषि विभाग का नया पोर्टल आगामी 30 मई तक कपास की बिजाई के लिए खुला है और इसकी योजना प्राप्त की जा सकती है।

इस दौरान उप मंडलाधीश ने निरंतर गिर रहे भू-जल स्तर को लेकर चिता व्यक्त करते हुए कहा कि अगर भविष्य में जल को न बचाया तो हमारे देश के सामने जल ही सबसे बड़ा संकट होगा। उन्होंने बताया कि जल के बचाव को लेकर सरकार पूरी तरह गंभीर है, इसलिए हमें सरकार की योजनाओं का सहयोग करना चाहिए। इस दौरान विभिन्न गांवों के किसानों ने रतिया क्षेत्र बाढ़ प्रभावित क्षेत्र होने की भी विशेष जानकारी दी, जिसको लेकर अधिकारियों ने आश्वस्त करते हुए कहा कि इस बात के लिए उच्चाधिकारियों के साथ-साथ सरकार को भी अवगत करवा दिया है।

इस अवसर पर उनके साथ उप पुलिस अधीक्षक सुभाष बिश्नोई, तहसीलदार विजय सियाल, कृषि विभाग के जिला अधिकारी डा. अजय सिहाग, उप मंडलाधिकारी डा. भीम सिंह दहिया, टोहाना के उप मंडलाधिकारी मुकेश मेहला, संदीप कुमार, सुभाष हुड्डा, एएसओ अर्जुन पूनिया, बीडीपीओ रमेश मिथलानी सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी व कर्मचारी भी उपस्थित थे।

Posted By: Jagran

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