संवाद सूत्र, भूना :

शुगर मिल के निजीकरण के बाद भूना क्षेत्र विकास के मामले में हमेशा से ही पिछड़ा है और किसानों के लिए खेती भी घाटे का सौदा बनकर रह गई है। भाजपा सरकार चाहे तो किसानों के जख्मों पर मरहम लगाने का कार्य कर सकती है, इसके लिए शुगर मिल को चलाया जाना अत्यंत जरूरी है। यह बात अखिल भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष जोगिद्र घासी राम नैन ने शुगर मिल गेट के समक्ष आयोजित महापंचायत में उपस्थित किसानों को संबोधित करते हुए कही। 11 वर्षों से बंद पड़ी शुगर मिल भूना को पुन: चालू किए जाने की मांग को लेकर क्षेत्र के करीब 400 किसानों ने कुलां रोड पर मिल गेट के समक्ष महापंचायत में सरकार के विरूद्ध जमकर नारेबाजी की। महापंचायत का नेतृत्व अखिल भारतीय किसान यूनियन के प्रधान जोगिद्र घासी नैन ने किया, जबकि अध्यक्षता पूर्व सरपंच ज्ञान चंद परूथी व सचिव हंसराज सिवाच ने की। महापंचायत का संचालन शुगर मिल बचाओ किसान संघर्ष समिति के संयोजक चांदीराम कड़वासरा व कृष्ण धारनियां ने किया, जबकि मंच संचालक सचिव राजबीर सोनी ने किया। कड़वासरा व धारनियां ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि चौधरी देवी लाल ने किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए उक्त शुगर मिल की स्थापना करवाई थी। उन्होंने कहा कि शुगर मिल को चालू किए जाने की मांग को लेकर कई बार किसान भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सुभाष बराला से मिल चुके हैं, लेकिन हर बार आश्वासन के अलावा किसानों को कुछ भी हासिल नहीं हुआ है। कांग्रेस सरकार ने इस शर्त पर मिल का निजीकरण किया था कि निजी मिल प्रबधक शुगर मिल को नियमित तौर पर चलाएगा। महापंचायत में किसान यूनियन फतेहाबाद के प्रधान मच्छंद्र सिंह, पूर्व सरपंच बंसत लाल बोस्ती, रामफल हसनगढ़, कक्कड़ कन्हड़ी, दलबीर भैरों,संतोख सिंह सहित क्षेत्र के सैकड़ों किसान भी उपस्थित थे।

महापंचायत में फैसला लिया गया कि शीघ्र ही क्षेत्र के किसान प्रदेश के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर से मिलेंगे और शुगर मिल के संदर्भ में अवगत करवाकर चालू करने की मांग करेंगे। लेकिन फिर भी यदि सरकार ने कोई सकारात्मक प्रयास नहीं किए तो मिल गेट पर अनिश्चितकालीन धरना देकर रोष जताया जाएगा।

Posted By: Jagran

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