फतेहाबाद की मीना कुमारी 10 साल से महिलाओं को दे रहीं शिक्षा की रोशनी, बीमारों को भी उपलब्ध कराती हैं भोजन
फतेहाबाद के आजाद नगर में मीना कुमारी पिछले 10 वर्षों से जरूरतमंद महिलाओं को अक्षर ज्ञान देकर आत्मनिर्भर बना रही ...और पढ़ें
-1791972273125_m.webp)
मीना कुमारी बच्चों को पढ़ाती हुई (जागरण फोटो)
HighLights
मीना कुमारी 10 साल से महिलाओं को शिक्षित कर रही हैं
जरूरतमंद महिलाओं को अक्षर ज्ञान देकर आत्मनिर्भर बना रहीं
पति संग गरीब परिवारों, बीमारों की भी करती हैं मदद
जागरण संवाददाता, फतेहाबाद। समाज में बदलाव लाने के लिए बड़े पद या आर्थिक संपन्नता नहीं, बल्कि दूसरों के लिए कुछ करने का जज्बा जरूरी है। इसी सोच के साथ फतेहाबाद के आजाद नगर निवासी मीना कुमारी पिछले 10 वर्षों से जरूरतमंद महिलाओं को अक्षर ज्ञान देकर उनके जीवन में शिक्षा की रोशनी जगा रही हैं।
बीए तक शिक्षा हासिल कर चुकीं मीना कुमारी गृहिणी होने के साथ समाजसेवा के प्रति भी समर्पित हैं। वह अपने पति पंजाब सिंह के सहयोग से जरूरतमंद परिवारों की मदद कर रही हैं। उनका प्रयास है कि अभावों में जीवन गुजारने वाली महिलाएं भी पढ़ना-लिखना सीखकर आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ सकें।
आजाद नगर में बड़ी संख्या में ऐसे परिवार रहते हैं, जिनकी आजीविका दिहाड़ी मजदूरी पर निर्भर है। आर्थिक तंगी और पारिवारिक जिम्मेदारियों के चलते कई महिलाओं को बचपन में स्कूल जाने का अवसर नहीं मिल पाया। समय के साथ पढ़ना-लिखना न आने की कमी उनके लिए रोजमर्रा के कामों में भी परेशानी पैदा करती है।
मीना कुमारी ने इस जरूरत को समझते हुए महिलाओं को अक्षर ज्ञान देने का बीड़ा उठाया। पिछले 10 वर्षों से वह इस काम में जुटी हैं।
उनका मानना है कि शिक्षा केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति को आत्मविश्वास और आत्मसम्मान के साथ जीवन जीने की ताकत देती है। पढ़ना-लिखना सीखने से महिलाएं अपने जरूरी कामों को बेहतर ढंग से कर सकती हैं और दूसरों पर निर्भरता भी कम कर सकती हैं।
बीए तक पढ़ाई, घर की जिम्मेदारियों के साथ समाजसेवा का संकल्प
मीना कुमारी स्वयं बीए पास हैं। शिक्षा के महत्व को समझने के कारण ही उन्होंने जरूरतमंद महिलाओं को पढ़ने-लिखने के लिए प्रेरित करने का संकल्प लिया। गृहिणी होने के नाते घर-परिवार की जिम्मेदारियां निभाने के साथ वह समाजसेवा के लिए भी समय निकालती हैं। उनके लिए यह कार्य किसी औपचारिक जिम्मेदारी से बढ़कर है।
वह मानती हैं कि यदि समाज का हर व्यक्ति अपनी क्षमता के अनुसार जरूरतमंदों की मदद करने लगे, तो अनेक लोगों की जिंदगी में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है।
महिलाओं को अक्षर ज्ञान देने का उनका प्रयास इसी सोच का उदाहरण है। वह चाहती हैं कि जिन महिलाओं को परिस्थितियों के कारण शिक्षा से दूर रहना पड़ा, उन्हें सीखने का अवसर मिले और वे अपने जीवन में आगे बढ़ सकें।
पति के साथ जरूरतमंद परिवारों की मदद में भी जुटीं
मीना कुमारी की सेवा भावना केवल महिलाओं को शिक्षित करने तक सीमित नहीं है। वह अपने पति पंजाब सिंह के साथ मिलकर जरूरतमंद परिवारों की सहायता भी करती हैं।
जरूरत पड़ने पर बीमार मरीजों को भोजन उपलब्ध कराने सहित अन्य आवश्यक मदद पहुंचाने का प्रयास किया जाता है। उनका मानना है कि जरूरतमंद व्यक्ति की परेशानी को समझना और कठिन समय में उसका साथ देना ही सच्ची समाजसेवा है।
