मुकेश खुराना, फतेहाबाद

नशा है कि सिर चढ़कर बोल रहा है। हर तरह का नशा। ज्यादा से ज्यादा दौलत कमाने का तो खुशियों व गमों के बहाने नशे में झूमने का नशा। पंजाब की सीमा होने के कारण जिले में नशा नंगा नाच रहा है। शासन-तंत्र ने नशे से मुक्ति के लिए केंद्र बनवाए। अब आलम यह है कि भगवान का दर्जा प्राप्त डाक्टर्स भी इन नशा केंद्रों में पीड़ितों को नशे से मुक्ति दिलाने से मुंह फेर रहे हैं।

यहां 30 बेड का नशा मुक्ति केंद्र बनने के बाद बहुप्रतीक्षित मांग पूरी हुई थी। अब नई चुनौती स्वास्थ्य विभाग के सामने खड़ी हो गई। नागरिक अस्पताल में सेवाएं दे रहीं मनोचिकित्सक डा. रीपू ने इस्तीफा दे दिया है। डा. रीपू ने पिछले माह स्वास्थ्य विभाग को नोटिस दिया था। इसके बाद अब नौकरी छोड़ दी। अब एक ही मनोचिकित्सक डा. गिरीश के सहारे नशा मुक्ति केंद्र रह गया है। जबकि 30 बेड होने के बाद नशा छोड़ने वाले मरीजों की संख्या बढ़ रही है। अब एक ही डाक्टर के सहारे आउटडोर और इनडोर ओपीडी रहेगी। ऐसे में अब नशा छोड़ने के लिए आने वाले मरीजों का उपचार प्रभावित होना लाजिमी है। डाक्टरों की कमी का टोटा नशा मुक्ति केंद्र पहले ही झेल रहा था। यहां पर मनोचिकित्सक के साथ-साथ 24 घंटे यानि की तीन शिफ्टों में मेडिकल आफिसर का होना जरूरी है। लेकिन इसके बावजूद पिछले डेढ़ साल से दो ही मनोचिकित्सक संभालते आ रहे थे।

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30 बेड होने के साथ बढ़ने चाहिए थे डाक्टर हुए कम :

जिले की बहुप्रतीक्षित मांग पिछले साल मई माह में पूरी हुई थी। शुरुआत में नशा मुक्ति केंद्र 10 बेड का था। जिसे अब बढ़ाकर 30 बेड कर दिया गया। इसके तहत अब डाक्टरों की संख्या बढ़नी चाहिए थी। डाक्टरों के करीब 6 पद स्वीकृत हैं लेकिन अब एक ही डाक्टर के सहारे नशा मुक्ति केंद्र रहेगा। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की माने तो अप्रैल माह से लेकर नवंबर माह तक करीब 14500 ओपीडी आई हैं। इसके अलावा 550 नशा छोड़ने के लिए मरीज दाखिल हो चुके हैं। नशा छोड़ने वालों में सबसे ज्यादा मरीज हेरोइन, चूरापोस्त व अफीम के आ रहे हैं।

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बढ़ रहा नशा, उपचार में पिछड़े

पुलिस विभाग के आंकड़ों के मुताबिक पिछले तीन महीनों में 7 किलो 560 ग्राम अफीम, 750 किलो 230 ग्राम चूरापोस्त, 1 किलो 900 ग्राम हेरोइन, 16 किलो 215 ग्राम गांजा, 2 ग्राम 150 मिलीग्राम स्मैक, 1 लाख 25 हजार 515 नशीली गोलियां, 50 बोतल नशीली सीरप पकड़ी है। इन मामलों में 550 तस्कर पकड़े गए हैं।

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डाक्टरों का सभी स्वास्थ्य केंद्रों में टोटा है। नशा मुक्ति केंद्र को चलाने के लिए व्यवस्था की जाएगी। किसी भी कीमत पर व्यवस्था नहीं बिगड़ने दी जाएगी।

- डा. मनीष बंसल

सिविल सर्जन, फतेहाबाद

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