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फतेहाबाद में डिलीवरी के दौरान दो सालों में 50 महिलाओं और 23 शिशुओं की मौत

Published: Fri, 06 Nov 2026 06:02 PM (IST)

फतेहाबाद जिले में प्रसव के दौरान महिलाओं और शिशुओं की बढ़ती मौतों को रोकने के लिए स्वास्थ्य विभाग 16 नवंबर से एक महीने का विशेष अभियान चलाएगा।

डिलीवरी के दौरान दो सालों में 50 महिलाओं की मौत। फोटो जागरण

डिलीवरी के दौरान दो सालों में 50 महिलाओं की मौत। फोटो जागरण

HighLights

  1. फतेहाबाद में प्रसव के दौरान 50 महिलाओं, 23 शिशुओं की मौत।

  2. स्वास्थ्य विभाग एक महीने का विशेष अभियान चलाएगा 16 नवंबर से।

  3. गर्भवती महिलाओं को समय पर अस्पताल पहुंचाने, स्टाफ को प्रशिक्षण मिलेगा।

जागरण संवाददाता, फतेहाबाद। जिले में प्रसव के दौरान महिलाओं और नवजात शिशुओं की मौत के मामलों को रोकने के लिए स्वास्थ्य विभाग एक महीने तक विशेष अभियान चलाएगा। एक साल के दौरान जिले में दो साल में डिलीवरी के दौरान 50 महिलाओं और 23 शिशुओं की मौत हो चुकी है। इन मामलों को गंभीरता से लेते हुए विभाग ने गर्भवती महिलाओं को समय पर अस्पताल पहुंचाने और सुरक्षित प्रसव सुनिश्चित करने की योजना बनाई है।

यह अभियान 16 नवंबर से शुरू होगा। अभियान के दौरान स्वास्थ्य विभाग की टीमें गर्भवती महिलाओं और उनके स्वजन को जागरूक करेंगी। वहीं, आशा वर्करों की जिम्मेदारी तय की जाएगी कि वे प्रसव की संभावित तिथि से पहले ही गर्भवती महिलाओं को अस्पताल पहुंचाने में सक्रिय भूमिका निभाएं।
स्वास्थ्य विभाग के सामने बड़ी चुनौती यह है कि कई बार गर्भवती महिलाओं को प्रसव पीड़ा शुरू होने या स्थिति गंभीर होने के बाद अस्पताल लाया जाता है। ऐसे में समय पर उपचार और डाक्टरी सहायता मिलने में देरी हो सकती है।

प्रसव की संभावित तिथि से पहले अस्पताल पहुंचाने पर रहेगा जोर

अभियान के तहत आशा वर्करों को अपने क्षेत्र की गर्भवती महिलाओं की सूची के अनुसार संपर्क करना होगा। जिन महिलाओं की डिलीवरी की संभावित तिथि नजदीक है, उनके घर जाकर स्वजन को समय पर अस्पताल पहुंचने के लिए समझाया जाएगा।

आशा वर्करों की ड्यूटी इस तरह लगाई जाएगी कि प्रसव की स्थिति बनने से पहले ही महिला को अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था हो सके। खासकर ऐसी महिलाओं पर अधिक ध्यान दिया जाएगा, जिन्हें पहले से स्वास्थ्य संबंधी परेशानी है या जिनका प्रसव जोखिम वाला हो सकता है। स्वास्थ्य विभाग की टीमें गर्भवती महिलाओं को नियमित जांच कराने, चिकित्सकों की सलाह मानने और प्रसव के लिए सरकारी अस्पतालों की सेवाएं लेने के प्रति जागरूक करेंगी।

डिलीवरी करवाने वाले स्टाफ को फिर मिलेगा प्रशिक्षण

अभियान में केवल गर्भवती महिलाओं को जागरूक करने तक ही सीमित नहीं रहा जाएगा, बल्कि प्रसव करवाने वाले स्वास्थ्यकर्मियों की कार्यक्षमता बढ़ाने पर भी जोर रहेगा। अस्पतालों में डिलीवरी करवाने वाले स्टाफ को दोबारा प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसमें प्रसव के दौरान आने वाली जटिल परिस्थितियों को पहचानने, समय पर चिकित्सकीय सहायता लेने और जरूरत पड़ने पर महिला को उच्च स्वास्थ्य केंद्र में भेजने की प्रक्रिया पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

प्रशिक्षण का उद्देश्य यह रहेगा कि प्रसव के दौरान किसी महिला की स्थिति बिगड़ने पर स्टाफ समय गंवाए बिना डाक्टरों की सहायता ले सके। जटिल प्रसव के मामलों में तत्काल निर्णय और उचित उपचार मिलने से मां और बच्चे दोनों की जान बचाने में मदद मिल सकती है।

एक महीने क अभियान चलेगा। इसके लिए सबसे पहले प्रशिक्षण दिया जाएगा ताकि सही से लाभ मिल सके। कैंप में पूरी जानकारी रखने के भी आदेश दिए है। - डॉ. बुधराम, सिविल सर्जन।

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