16 की उम्र में गंवाई चलने की ताकत, अब Asian Games में जीते 2-2 गोल्ड; रुला देगी फरीदाबाद के प्रणव सूरमा की कहानी
पैरा एशियाई खेलों में प्रणव सूरमा ने डिस्कस और क्लब थ्रो में दोहरा स्वर्ण पदक जीता। उन्होंने अपने दादा के ...और पढ़ें

प्रणव सूरमा ने जीते दो-दो गोल्ड। फोटो: आर्काइव
दीपक पांडेय, फरीदाबाद। पैरा एशियाई खेलों में प्रणव सूरमा ने डिस्कस के बाद क्लब थ्रो में भी स्वर्ण पदक जीतकर परिवार को खुशी से भर दिया। शुक्रवार को क्लब थ्रो के मुकाबले में प्रणव ने 32.87 अंक हासिल करके गोल्ड मेडल हासिल किया।
लेकिन पैरा एशियाई खेलों में दोहरे स्वर्ण का सफर प्रवण के लिए बिल्कुल भी आसान नहीं रहा। तैयारियों के दौरान प्रणव के दादा का निधन हो गया था।
वह दादा को अपना जिगरी दोस्त मानते थे और हर पदक जीतने के बाद उन्हीं के हाथों से पदक पहनते थे। उनके जाने का गम सहते हुए प्रणव ने खुद को संभाला और खेल में शानदार वापसी की।
29 सितंबर को प्रणव के दादा केवल कृष्ण सूरमा इस दुनिया को अलविदा कह गए। जो प्रणव के सबसे करीबी थे। प्रणव अपनी हर बात उनसे सांझा करते थे । प्रतियोगिता में पदक जीतने के बाद सीधा उनके पास आते और उनके हाथ से उस पदक को पहनते।
पिता संजीव सूरमा ने दैनिक जागरण से बातचीत में बताया कि बेटे का प्रतियोगिता में किसी भी तरह से ध्यान नहीं भटके। इसलिए वह प्रतियोगिता में हर पल उनके साथ रहे। उसको हौसला देते रहे।
उनको भरोसा था कि बेटा क्लब और डिस्कस दोनों में ही स्वर्ण पदक हासिल करेगा।
16 साल में हुआ था हादसे का शिकार
प्रणव 16 साल की उम्र में हादसे का शिकार हुए थे। सीमेंट की शीट गिरने से उनकी रीढ़ की हड्डी क्षतिग्रस्त हो गई और वह व्हीलचेयर पर निर्भर हो गए। प्रवण वर्ष 2011 से पूर्व पूरी स्वस्थ थे और एक सामान्य व्यक्ति की तरह जीवन व्यतीत कर रहे थे।
उस समय उनकी आयु सिर्फ 16 वर्ष की थी। उनके ऊपर सीमेंट की शीट आकर गिर गई थी। इस दर्दनाक हादसे में उनकी रीढ़ की हड्डी गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गई।
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