दादी की सीख से मक्के के छिलकों से बनाया लाखों का कारोबार, ग्रामीण महिलाओं को मिला रोजगार
दादी की प्रेरणा से परिधि नरवर ने मक्के के छिलकों और डंठलों से उत्पाद बनाने का व्यवसाय शुरू किया है। ...और पढ़ें

दादी की सीख से मक्के के छिलकों से बनाया लाखों का कारोबार ( एआई जेनरेटेड इमेज )
HighLights
दादी की प्रेरणा से मक्के के छिलकों का उपयोग।
सौ से अधिक ग्रामीण महिलाओं को मिला रोजगार।
पर्यावरण संरक्षण और महिला सशक्तीकरण का मॉडल।
निभा रजक, फरिदाबाद। बचपन में दादी को बेकार वस्तुओं से उपयोगी चीजें बनाते देखा था। उनके साथ स्वयं भी परिधि स्कूल से आने के बाद कुछ नया बनाने की कोशिश करती थी।
दादी कहती थी कि प्रकृति द्वारा दी गई कोई भी चीज व्यर्थ नहीं होती, जरूरत है तो बस उसे सही नजरिए और हुनर से उपयोगी बनाने की। दादी फूलमती से मिली प्रेरणा ने परिधि नरवर को ऐसा व्यवसाय शुरू करने के लिए प्रेरित किया, जिसमें मक्के के छिलकों व डंठल से खूबसूरत उत्पाद तैयार किए जाते हैं।
ग्रामीण महिलाओं को मिल रहा रोजगार
वर्ष 2024 में शुरू हुई इस पहल से आज उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर की सौ से अधिक ग्रामीण महिलाओं को रोजगार मिल रहा है। दादी की सीख से शुरू हुआ यह सफर अब पर्यावरण संरक्षण और महिला सशक्तीकरण की मिसाल बन रहा है। इसमें गांव के पुरुषों को भी जोड़ा गया है।
सूरजकुंड दिवाली मेला में फूलजा फाउंडेशन के प्रोग्राम आफिसर प्रदीप चंद्र ने स्टाल लगाई है। प्रदीप चंद्र ने बताया कि चटाई, पर्स, फूल, ट्रे और कई तरह की सजावटी वस्तुएं लेकर पहुंचे हैं। इनमें महिलाओं की मेहनती और कारीगरी साफ झलक रही है।
प्राकृतिक सामग्री से बने इन उत्पादों की खासियत इनका अनूठा डिजाइन और अपशिष्ट का रचनात्मक इस्तेमाल है। लोग इन वस्तुओं को देखकर हैरान हो रहे हैं कि आमतौर पर बेकार समझे जाने वाले मक्केे के छिलकों से भी इतनी सुंदर चीजें बनाई जा सकती हैं।
यूट्यूब और एआइ की मदद से मिला कारोबार को आकार
प्रदीप चंद्र के अनुसार यूट्यूब और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की मदद से नई तकनीकों, उत्पादों के डिजाइन और संभावनाओं को समझा जाता है। इसके बाद मक्के के छिलकों और डंठल से उपयोगी वस्तुएं बनाने का काम शुरू किया जाता है।
इन उत्पादों को आनलाइन वेबसाइट के माध्यम से भी उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे लोग घर बैठे इन्हें खरीद सकते हैं।
इस पहल का उद्देश्य केवल कारोबार करना नहीं, बल्कि गांवों में उपलब्ध संसाधनों का इस्तेमाल कर रोजगार के अवसर पैदा करना भी है। जिससे महिलाओं को काम के अवसर मिल रहे हैं और वह आर्थिक रूप से सशक्त बनने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।
कृषि अपशिष्ट का सही इस्तेमाल सिखा रहे
प्रदीप चंद्र ने कहा कि खेती से निकलने वाले अवशेषों का अक्सर उचित इस्तेमाल नहीं हो पाता। कई किसान इसे जला देते हैं। जबकि कुछ पशुओं के चारा के रूप में इस्तेमाल करते हैं।
मक्के के छिलकों और डंठल को उपयोगी उत्पादों में बदलकर न केवल अपशिष्ट का बेहतर प्रबंधन किया जा रहा है, बल्कि इससे कमाई के नए रास्ते भी खुलते हैं। सूरजकुंड दिवाली मेले में इन उत्पादों को दर्शक खूब पसंद कर रहे हैं।
