फरीदाबाद में मुक्केबाजी से कबड्डी तक...800 बेटियों का खेलना बंद, मैदान में कंटीली झाड़ियां और जहरीले जीव बने बाधा
फरीदाबाद के राजकीय कन्या महाविद्यालय नचौली में 800 से अधिक छात्राओं के खेल के मैदान में कटीली झाड़ियां व जहरीले ...और पढ़ें

तीन साल से राजकीय कन्या महाविद्यालय नचौली की छात्राओं और काॅलेज प्रबंधन की ओर से खेल परिसर की स्थिति में सुधार की मांग की जा रही है।
HighLights
नचौली कॉलेज का खेल मैदान झाड़ियों और जहरीले जीवों से भरा।
800 से अधिक छात्राओं के खेल अभ्यास और प्रतियोगिताओं में बाधा।
तीन साल से मरम्मत की मांग, उच्च अधिकारी अनसुना कर रहे।
निभा रजक, फरीदाबाद। किसी के हाथ में मुक्केबाजी के दस्ताने हैं तो कोई दौड़ में नाम कमाना चाहती है। खेल प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर जिले का नाम रोशन करने का ख्वाब देख रही 800 से अधिक छात्राओं के लिए बने खेल के मैदान में उगी कटीली झाड़ियां और घूम रहे जहरीले जीव बाधा बन रहे हैं।
तीन साल से राजकीय कन्या महाविद्यालय नचौली की छात्राओं और काॅलेज प्रबंधन की ओर से खेल परिसर की स्थिति में सुधार की मांग की जा रही है। लेकिन, जिला उच्चतर विभाग और लोक निर्माण विभाग के अधिकारी सुनवाई नहीं कर रहे हैं।
20 गावों की बेटियां आती हैं पढ़ने
महाविद्यालय नचौली की शुरुआत अगस्त 2018 में हुई थी। शुरुआती दिनों में कक्षाएं सेक्टर-16 स्थित राजकीय महिला महाविद्यालय में आयोजित होती थी। 2019 में लोक निर्माण विभाग की ओर से करीब 10.81 करोड़ की लागत से काॅलेज के भवन का निर्माण कार्य शुरू किया गया।
वर्ष 2023 में आधुनिक सुविधाओं से युक्त भवन तैयार हुआ और सितंबर में काॅलेज शिफ्ट हो गया। काॅलेज में नचौली के अलावा महावतपुर, बदरपुर सैद, टीकावली, लालपुर, ददसिया, बादशाहपुर और सिडौला सहित 20 गावों की बेटियां पढ़ने के लिए पहुंचती हैं।

तीन साल से मैदान की मरम्मत की मांग कर रहे...
काॅलेज प्रबंधन का कहना है कि नए भवन के निर्माण के दौरान खेल परिसर से मिट्टी काटकर निर्माण कार्य में इस्तेमाल की गई थी। निर्माण कार्य पूरा हो गया, लेकिन मैदान आज भी उसी इंतजार में है कि कोई उसकी सुध ले सके।
लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों और ठेकेदार द्वारा मिट्टी के पैसे बचाने के लिए मैदान से मिट्टी काट ली गई है। मैदान को समतल करने की जरूरत नहीं समझी गई, जिसका खामियाजा छात्राओं को भुगतना पड़ रहा है। तीन साल से मैदान की मरम्मत की मांग की जा रही है।

पार्क में आयोजित की जाती है खेल प्रतियोगिताएं
प्रबंधन के अनुसार एमडीयू की ओर से काॅलेज में वार्षिक खेल प्रतियोगिताओं के आयोजन के आदेश दिए गए हैं। प्रतियोगिताओं का आयोजन सितंबर में होना था। लेकिन खेल का मैदान नहीं होने के कारण आयोजन नहीं हो पा रहा है।
अब पिछले वर्षों की भांति इस वर्ष भी खेल प्रतियोगिता का आयोजन पार्क में करना पड़ेगा। पार्क में बनी स्टेज की टाइलें भी उखड़ने लगी हैं। अव्यवस्था के कारण सात एकड़ में फैला मैदान व्यर्थ हो रहा है।
बिना अभ्यास आगे कैसे बढ़ेंगी छात्राएं?
खेलों में रुचि होने के बावजूद मैदान की खराब स्थिति नियमित अभ्यास में बाधा बन रही है। मैदान को साफ करके खेल के उपकरण लगा दिए जाएं तो राहत मिलेगी। साथ ही हमें बेहतर अवसर मिल सकेंगे।
-गुंजन, छात्रा।
बाॅक्सिंग, जूडो, वालीबाल योग और कबड्डी जैसी खेल गतिविधियों के लिए नियमित अभ्यास जरूरी है। प्रतिभा तभी निखरती है जब खिलाड़ी को रोज अभ्यास करने का मौका मिले लेकिन काॅलेज में मैदान ही साथ नहीं है। बिना अभ्यास के बेटियां खेलों में कैसे आगे बढ़ेंगी।
-रितिका, छात्रा।
काॅलेज में ही बनाया जाए खेल उपकरणों का मैदान
काॅलेज की छात्राओं की खेलों में रुचि है। बीए की छात्रा स्नेहा ने रेस्लिंग में थाइलैंड में स्वर्ण पदक जीता है। वह प्राइवेट कोच के दिशा-निर्देशन में अभ्यास करती हैं। हम चाहते हैं कि काॅलेज में ही खेल उपकरणों का मैदान तैयार किया जाए, जहां ग्रामीण हिस्सों से आने वाली छात्राएं अभ्यास कर सकें। इस संबंध में कई बार उच्च अधिकारियों को लिखा गया है, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है।
-सुशील कुमार वर्मा, प्रचार्य, राजकीय कन्या महाविद्यालय नचौली।
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