फरीदाबाद और गुरुग्राम समेत 4 जिलों के खेल कोच पर होगा एक्शन, NIS कोर्स न करने वालों पर लटकी तलवार
खेल निदेशालय ने 2018 खेल नीति के तहत नियुक्त अंतरराष्ट्रीय पदक विजेता प्रशिक्षकों से एनआईएस और ग्रेजुएशन के दस्तावेज मांगे ...और पढ़ें

एनआईएस कोर्स न करने वाले खेल कोच पर गिरेगी गाज। फोटो: आर्काइव
HighLights
2018 खेल नीति के तहत नियुक्त प्रशिक्षकों से मांगे दस्तावेज
एनआईएस और ग्रेजुएशन पूरी न करने पर खेल निदेशालय सख्त
पांच साल की समय सीमा के बाद भी प्रक्रिया अधूरी
दीपक पांडेय, फरीदाबाद। 2018 खेल नीति के तहत प्रशिक्षक नियुक्त हुए अंतरराष्ट्रीय पदक विजेता खिलाड़ियों से खेल निदेशालय ने एनआईएस और ग्रेजुएशन के दस्तावेज मांगे हैं।
नियुक्ति के समय इन खिलाड़ियों को अपनी शैक्षणिक योग्यता पूरी करने के साथ-साथ नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ स्पोर्ट्स (NI) का कोर्स करने के निर्देश दिए गए थे।
इसके लिए प्रशिक्षकों को पांच वर्ष का समय दिया गया था। अब समय सीमा बीतने के बाद भी कई प्रशिक्षकों द्वारा निर्धारित प्रक्रिया पूरी नहीं किए जाने पर खेल निदेशालय ने सख्ती शुरू कर दी है।
प्रशिक्षकों से मांगा गया जवाब
खेल निदेशालय की ओर से रेवाड़ी, सोनीपत, गुरुग्राम और फरीदाबाद के खेल अधिकारियों को पत्र जारी कर ऐसे प्रशिक्षकों की जानकारी साझा की गई है। साथ ही संबंधित प्रशिक्षकों से जवाब लेने के निर्देश दिए गए हैं।
निदेशालय ने स्पष्ट किया है कि नियुक्ति के दौरान जिन शर्तों के आधार पर खिलाड़ियों को प्रशिक्षक की जिम्मेदारी दी गई थी, उन्हें पूरा करना जरूरी था।
समय के बावजूद प्रक्रिया नहीं की पूरी
2018 में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को खेल विभाग में प्रशिक्षक के रूप में नियुक्त किया गया था। इनमें कई खिलाड़ी खेलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने के बावजूद नियुक्ति के समय ग्रेजुएशन या एनआइएस की निर्धारित प्रक्रिया पूरी नहीं की थी।
पांच वर्ष की अवधि मिलने के बाद भी जिन प्रशिक्षकों ने दोनों में से एक या दोनों प्रक्रिया पूरी नहीं की है, अब उनसे स्पष्टीकरण मांगा जा रहा है।
फरीदाबाद के दो प्रशिक्षक सूची में
खेल निदेशालय की ओर से साझा की गई सूची में फरीदाबाद के भी दो प्रशिक्षकों के नाम शामिल हैं। हालांकि खेल अधिकारियों का कहना है कि अगर प्रशिक्षक सरकार से एनआइएस और ग्रेजुएशन पूरी करने के लिए समय मांगते हैं, तो सरकार की ओर से समय दिया जा सकता है। लेकिन इस दौरान उनका प्रमोशन नहीं हो पाएगा।
प्रशिक्षकों को जब नियुक्ति पत्र दिया गया था तो उसमें भी साफ तौर पर लिखा था कि पांच साल के भीतर दोनों प्रक्रियाओं को पूरा करना जरूरी है। फिर भी अगर प्रक्रिया का पालन नहीं हुआ तो प्रशिक्षकों को इसका कारण बताना होगा।
- गिर्राज, खेल उपनिदेशक, प्रदेश खेल निदेशालय
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