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फरीदाबाद छात्रा आत्महत्या मामला: मानवाधिकार आयोग ने मांगा जवाब, स्कूल में शारीरिक दंड पर उठाए सवाल

Published: Mon, 14 Sep 2026 04:13 PM (IST)

हरियाणा मानवाधिकार आयोग ने फरीदाबाद में स्कूल की छत से कूदकर छात्रा की आत्महत्या के मामले का संज्ञान लिया है। ...और पढ़ें

नाबालिग छात्रा की मौत के मामले में मानवाधिकार आयोग ने लिया संज्ञान, मांगा जवाब।

नाबालिग छात्रा की मौत के मामले में मानवाधिकार आयोग ने लिया संज्ञान, मांगा जवाब।

HighLights

  1. मानवाधिकार आयोग ने फरीदाबाद छात्रा आत्महत्या मामले का संज्ञान लिया।

  2. पुलिस, शिक्षा विभाग और स्कूल प्राचार्य से जवाब तलब किया गया।

  3. स्कूलों में शारीरिक दंड और मानसिक उत्पीड़न पर चिंता व्यक्त की।

जागरण संवाददाता, फरीदाबाद। डबुआ गाजीपुर रोड स्थित स्कूल में छत से कूदकर छात्रा के आत्महत्या करने के मामला में हरियाणा मानवाधिकार आयोग ने संज्ञान लिया है। आयोग ने पुलिस प्रशासन, प्रधान सचिव, जिला शिक्षा अधिकारी और स्कूल के प्राचार्य से जवाब मांगा है। मामले में अगली सुनवाई तीन दिसंबर को होगी। सुनवाई से एक सप्ताह पहले अधिकारियों को अपनी रिपोर्ट पेश करनी होगी।

आयोग के सहायक रजिस्ट्रार डॉ. पुनीत अरोड़ा ने बताया कि समाचार रिपोर्टों के अनुसार छात्रा ने एक सितंबर को विद्यालय भवन की तीसरी मंजिल की छत से से छलांग लगा दी थी। आयोग की पूर्ण पीठ में अध्यक्ष न्यायमूर्ति ललित बत्रा तथा शामिल सदस्य कुलदीप जैन और दीप भाटिया ने संज्ञान लेते हुए संबंधित अधिकारियों से रिपोर्ट तलब की है।

छात्रा को अध्यापक ने कई घंटों तक धूप में खड़ा रखा

आयोग ने स्पष्ट किया है कि समाचार रिपोर्टों में लगाए गए आरोपों को फिलहाल बिल्कुल सही नहीं माना जा रहा है और किसी व्यक्ति को दोषी अथवा निर्दोष मानकर नहीं चला जाना चाहिए। मामले में यह बात भी सामने निकलकर सामने आई कि घटना से पहले छात्रा को एक अध्यापक ने कथित रूप से दंडित किया और कई घंटों तक धूप में खड़ा रखा।

हालांकि विद्यालय प्रबंधन ने आरोपों से इनकार किया है। छात्रा के पिता की शिकायत पर बीएनएस की धारा 108 के तहत एफआइआर दर्ज होने और पुलिस द्वारा सीसीटीवी फुटेज समेत अन्य तथ्यों की जांच किए जाने की जानकारी आयोग को दी गई है।

आयोग ने कहा- स्कूलों में शारीरिक दंड की कोई जगह नहीं

आयोग ने कहा कि स्कूलों में शारीरिक दंड और मानसिक उत्पीड़न की कोई जगह नहीं है। यदि धूप में घंटों खड़े करने का आरोप जांच में सही पाया जाता है तो यह अनुशासन नहीं बल्कि बच्चे की गरिमा और मानसिक स्थिति को लेकर गंभीर सवाल खड़े करेगा।

ऐसे में पुलिस आयुक्त से एफआइआर की स्थिति, जांच, बयानों और घटना से जुड़े तथ्यों की रिपोर्ट मांगी गई है। सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने के भी निर्देश दिए गए हैं। शिक्षा विभाग को स्कूल की छात्र-सुरक्षा, शिकायत तंत्र, मानसिक स्वास्थ्य सहायता और अनुशासन व्यवस्था की जांच करने को कहा गया है।

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