फरीदाबाद: 18 साल में 900 करोड़ का प्रोजेक्ट अधूरा, 580 निवेशकों ने खटखटाया मंत्रालय का दरवाजा
फरीदाबाद के क्राउन आईटी पार्क के 900 करोड़ के प्रोजेक्ट में 18 साल बाद भी निवेशकों को कब्जा नहीं मिला है, जिससे उनकी पूंजी फंसी हुई है।

क्राउन आइटी पार्क प्रोजेक्ट में अभी तक निवेशकों को कब्जा नहीं मिल पाया है। (एआई जेनरेटेड इमेज)
HighLights
18 साल से क्राउन आईटी पार्क प्रोजेक्ट अधूरा, 900 करोड़ फंसे।
580 निवेशकों ने बिल्डर के खिलाफ प्रदर्शन किया, मंत्रालय से गुहार।
एनसीएलटी के फैसले के बावजूद काम अधूरा, एनबीसीसी से पूरा कराने की मांग।
जागरण संवाददाता, फरीदाबाद। सराय ख्वाजा स्थित सेक्टर-36 में 18 साल पहले शुरू किए क्राउन आइटी पार्क प्रोजेक्ट में अभी तक निवेशकों को कब्जा नहीं मिल पाया है। 900 करोड़ के इस प्रोजेक्ट में निवेशक इतने साल बाद भी इंतजार में हैं। बिल्डर की मनमानी के कारण निवेशको की पूंजी फंस गई है। जिस पूंजी को उन्होंने बैंक से लोन लेकर लगाया था।
रविवार को निवेशक क्राउन आइटी पार्क के सामने एकत्र हुए। जहां पर सभी ने पहले तो बिल्डर के खिलाफ प्रदर्शन किया। इसके बाद हस्ताक्षर अभियान चलाकर आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय को पत्र लिखकर पूरे मामले में दखल देने की मांग की। उन्होंने कहा कि मंत्रालय को पूरे मामले की जांच कराते हुए इसका अधूरा काम एनबीसीसी एजेंसी कराना चाहिए। उनकी पूंजी फंसने की वजह से बैंक का ऋण चुकाना भी मुश्किल हो गया है।
2008 में शुरू किया गया था आईटी पार्क का प्रोजेक्ट
निवेशक संजीव अग्रवाल ने बताया कि 2008 में आइटी पार्क का प्रोजेक्ट शुरू किया गया था। बिल्डर को प्रोजेक्ट 2011 तक पूरा करके निवेशकों को हैंडओवर करना था। आइटी पार्क में 580 लोगों ने अलग-अलग साइज के आफिस खरीदे। निवेशकों से चेक के रूप में भुगतान लिया गया। पार्क में बकायदा निवेशकों को लुभाने के लिए बड़ा पार्किंग एरिया बनाया गया। लेकिन बिल्डर की ओर से प्रोजेक्ट को पूरा नहीं किया गया।
2021 में निवेशकों ने क्राउन अबेकस आइटी पार्क एसोसिएशन बनाकर पूरे मामले को नेशनल कंपनी ला ट्रिब्यूनल में ले गए। जहां पर एनसीएलटी की ओर से निवेशकों के पक्ष में फैसला सुनाया गया। इसके साथ ही बिल्डर को आदेश दिए गए कि वह अधूरे काम को पूरा करवाए।
इसके लिए निगरानी कमेटी गठित को लेकर भी आदेश दिया। लेकिन संबंधित कंपनी की ओर से काम को अभी तक पूरा नहीं करवाया गया। इस बारे में क्राउन ग्रुप के निदेशक आरएस गांधी को तीन बार काल की। इसके अलावा उन्हें मैसेज भी किया गया लेकिन जवाब नहीं आया।
पूरे प्रोजेक्ट में केवल 68 करोड़ रुपये का काम बाकी है। मंत्रालय को पत्र लिखकर पूरे मामले में दखल देने के लिए कहा गया है। क्योंकि कई लोगों ने बैंक से लोन लेकर इसमें रुपये निवेश किए है। सभी निवेशक परियोजना को पूरा करवाने में हर तरह का सहयोग देने को तैयार है। - कमल सचदेवा, निवेशक
परियोजना की प्रगति की नियमित रिपोर्टिंग और स्वतंत्र निगरानी भी पर्याप्त रूप से नहीं हो रही है। इसके साथ पंजीकरण, डीटीसीपी लाइसेंस, एमसीए और अन्य वैधानिक फाइलिंग और वित्तीय विवरणों की स्थिति की सक्षम एजेंसियों से जांच और नियमितीकरण की मांग की गई है। इसके साथ ही मांग की गई है कि एनबीसीसी से अधूरे प्रोजेक्ट को पूरा कराया जाए। - प्रेम मल्होत्रा, निवेशक
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