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ग्रेटर फरीदाबाद में सेक्टर बढ़े, लेकिन आबादी के अनुपात में पुलिस रह गई पीछे; कानून-व्यवस्था पर उठ रहे सवाल

Published: Sun, 13 Sep 2026 04:45 PM (IST)

ग्रेटर फरीदाबाद में तेजी से बढ़े सेक्टरों और आबादी के अनुपात में पुलिसिंग का ढांचा पीछे रह गया है, जिससे ...और पढ़ें

ग्रेटर फरीदाबाद में पुलिसिया ढांचे पर उठ रहे सवाल।

ग्रेटर फरीदाबाद में पुलिसिया ढांचे पर उठ रहे सवाल।

HighLights

  1. ग्रेटर फरीदाबाद में शहरी विकास के साथ पुलिसिंग का ढांचा नहीं बढ़ा।

  2. आबादी और अपराध बढ़ने से पुलिस व्यवस्था पर दबाव बढ़ा।

  3. नए थाने, चौकियां और गश्त बढ़ाने की तत्काल आवश्यकता।

हरेंद्र नागर, फरीदाबाद। ग्रेटर फरीदाबाद में जिस तेजी से सेक्टर और बहुमंजिला सोसायटियां बढ़ीं, उस अनुपात में पुलिसिंग का ढांचा नहीं बढ़ा। कभी खेत और गांवों के बीच बसा यह इलाका अब लाखों की आबादी वाला रिहायशी क्षेत्र बन चुका है, लेकिन पुलिस व्यवस्था अब भी पुराने थाना क्षेत्रों और सीमित चौकियों के सहारे चल रही है।

पूरे ग्रेटर फरीदाबाद में बीपीटीपी थाना नया बना, जबकि बड़े हिस्से की कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी खेड़ी पुल और भूपानी थाना क्षेत्र पर है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आबादी और अपराध का दायरा बढ़ने के साथ पुलिस चौकियों, गश्त और पुलिस बल का आकलन कब होगा?

ग्रेटर फरीदाबाद भविष्य नहीं वर्तमान

ग्रेटर फरीदाबाद अब फरीदाबाद का भविष्य नहीं, वर्तमान बन चुका है। सेक्टर-75 से 89 तक ऊंची-ऊंची सोसायटियां खड़ी हो चुकी हैं। बाजार चल रहे हैं। स्कूल और अस्पताल खुल चुके हैं। हजारों परिवार यहां रह रहे हैं और रोजाना बड़ी संख्या में लोग इन सेक्टरों से होकर गुजरते हैं। लेकिन पुलिसिंग का नक्शा देखें तो तस्वीर उतनी तेजी से नहीं बदली।

ग्रेटर फरीदाबाद के बड़े हिस्से की सुरक्षा व्यवस्था आज भी खेड़ी पुल और भूपानी थाना क्षेत्र पर निर्भर है। बीपीटीपी थाना जरूर बनाया गया, लेकिन जिस गति से रिहायशी इलाका फैल रहा है, उसके मुकाबले नए थाना क्षेत्रों और पुलिस चौकियों की जरूरत पर कोई व्यापक पुनर्मूल्यांकन दिखाई नहीं देता।

पहले गांव थे, अब हजारों फ्लैट

जिस इलाके में पुलिस चौकी या थाना क्षेत्र तय किया गया था, उस समय यहां गांव और खाली जमीन ज्यादा थी। अब उसी भूगोल में दर्जनों बड़ी सोसायटियां हैं। एक ही सोसायटी में सैकड़ों से लेकर हजारों परिवार रहते हैं। सड़क पर वाहनों की संख्या कई गुना बढ़ चुकी है। ऐसे में सिर्फ थाना क्षेत्र की सीमा बढ़ा देना पुलिसिंग का समाधान नहीं हो सकता।

थाना क्षेत्र बढ़ता गया, आबादी भी

खेड़ी पुल को थाना बनाए जाने के समय भी नए विकसित हो रहे सेक्टरों को लेकर पुलिस सीमा में बदलाव किया गया था। सेक्टर-85, 86 और भतौला-बुढैना जैसे इलाकों को भूपानी से हटाकर खेड़ी पुल थाना क्षेत्र में शामिल किया गया। उसके बाद ग्रेटर फरीदाबाद का विस्तार लगातार जारी रहा। नए सेक्टर आबाद होते गए और पुरानी सीमाओं में शामिल पुलिस को ही नए रिहायशी क्षेत्रों का जिम्मा मिलता गया।

अपराध ने भी बदली इलाके की तस्वीर

ग्रेटर फरीदाबाद में सामने आने वाली घटनाएं भी बताती हैं कि अब यहां सिर्फ छोटी-मोटी वारदात का सवाल नहीं है। चोरी, छीनाझपटी, लूट, मारपीट, हत्या, महिलाओं से छेड़छाड़ और सोसायटियों में सुरक्षा से जुड़े मामले लगातार सामने आते रहे हैं। स्थानीय निवासियों की शिकायतों में एक बात बार-बार सामने आती रही है-लगश्त और पुलिस की दृश्य मौजूदगी बढ़ाई जाए। वर्ष 2023 में ग्रेटर फरीदाबाद की सोसायटियों के निवासियों ने चोरी, छीनाझपटी और छेड़छाड़ जैसी घटनाओं के बीच पुलिस गश्त को लेकर सवाल उठाए थे। उस समय क्षेत्र की आबादी करीब दो लाख बताई गई थी।

यातायात का दबाव भी एक बड़ा मुद्दा

ग्रेटर फरीदाबाद की बड़ी सोसायटियां मुख्य सड़कों के किनारे हैं। पीक आवर में यातायात का दबाव रहता है। रात में कई हिस्सों में आवाजाही कम हो जाती है। ऐसे में गश्ती वाहनों की संख्या और उनकी तैनाती सीधे पुलिस रिस्पांस टाइम को प्रभावित करती है। इसलिए अब यह आकलन जरूरी है कि किस सेक्टर से थाना कितनी दूरी पर है, वहां पुलिस वाहन कितनी देर में पहुंचता है और कितनी पुलिसकर्मियों की बीट जिम्मेदारी है।

लेकिन ग्रेटर फरीदाबाद जैसी तेजी से बढ़ती आबादी वाले इलाके में तकनीक के साथ सड़क पर पुलिस की मौजूदगी भी जरूरी है। सीसीटीवी घटना के बाद आरोपित तक पहुंचने में मदद कर सकता है, लेकिन सड़क पर मौजूद पुलिस कई बार घटना होने से पहले ही अपराध रोक सकती है।

अब आबादी के साथ पुलिस का भी मास्टर प्लान बने

ग्रेटर फरीदाबाद का विकास प्लान सिर्फ सड़क, सीवर, पानी और बिजली तक सीमित नहीं रह सकता। जिस इलाके में लाखों लोगों के रहने की योजना है, वहां पुलिसिंग का ढांचा भी उसी योजना का हिस्सा होना चाहिए।

हर सेक्टर के लिए आबादी, सोसायटियों की संख्या, मुख्य बाजार, संवेदनशील स्थान, अपराध का पैटर्न, थाना दूरी और गश्त की जरूरत का अलग आकलन हो। इसी आधार पर पुलिस चौकी, बीट, वाहन और बल की जरूरत तय की जाए।

सोसायटियां बढ़ती गईं, आबादी बढ़ती गई, लेकिन पुलिसिंग का विस्तार उस अनुपात में नहीं हुआ। किसी घटना के बाद पुलिस पहुंचती है, लेकिन हमारा जोर घटना से पहले पुलिस की मौजूदगी बढ़ाने पर होना चाहिए। - राकेश कुमार

ग्रेटर फरीदाबाद अब गांवों वाला इलाका नहीं रहा, यहां दिन-रात हजारों लोगों की आवाजाही रहती है। इतनी बड़ी आबादी के लिए सिर्फ थाना पर्याप्त नहीं, सेक्टरों के बीच चौकियां भी जरूरी हैं। - सतबीर सिंह कादियान

बाजार और व्यावसायिक गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं, जिसके साथ चोरी और छीनाझपटी का खतरा भी रहता है। मुख्य बाजारों और संवेदनशील स्थानों पर पुलिस की नियमित गश्त दिखाई देनी चाहिए। - वीके शर्मा

पुलिस व्यवस्था का आकलन केवल थानों की संख्या से नहीं, आबादी और क्षेत्रफल के हिसाब से होना चाहिए। नए सेक्टरों के विस्तार को देखते हुए पुलिस विभाग को अगले दस साल की जरूरत अभी से तय करनी चाहिए। - डिम्पी जैन

बढ़ती आबादी वाले क्षेत्र में बीट का क्षेत्रफल बढ़ने से पुलिसकर्मियों पर काम का दबाव भी बढ़ता है। बेहतर कानून-व्यवस्था के लिए थाना, चौकी, वाहन और पुलिस बल का वैज्ञानिक तरीके से पुनर्मूल्यांकन जरूरी है। - आकाश सक्सेना

रात के समय कई इलाकों में पुलिस की मौजूदगी बहुत कम दिखाई देती है, जबकि सोसायटियों में हजारों परिवार रहते हैं। पुलिस गश्त का रूट और बीट व्यवस्था इस तरह होनी चाहिए कि हर सेक्टर में नियमित पुलिस नजर आए। - अभिजीत सिंह

ग्रेटर फरीदाबाद का विकास जिस गति से हुआ है, उसी अनुपात में सुरक्षा व्यवस्था की योजना नहीं बनी। अब नए थाना क्षेत्र और चौकियां बनाने के साथ पर्याप्त पुलिस बल और संसाधन देना भी जरूरी है। - दीपक पाठक

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