जागरण संवाददाता, फरीदाबाद : वायु प्रदूषण के मामले में बृहस्पतिवार को औद्योगिक नगरी फिर देश में पहले नंबर पर रही। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की तरफ से शाम 4 बजे के जारी आंकड़ों के मुताबिक बृहस्पतिवार को जिले में अति सूक्ष्म कणों का स्तर 406 मिलीग्राम प्रति क्यूबिक मीटर रहा। यह सामान्य से आठ गुणा अधिक है। जब हवा में सूक्ष्म कणों की संख्या 400 से ऊपर होती है तो यह गंभीर की श्रेणी में रखी जाती है। सूक्ष्म कणों का 50 तक स्तर सामान्य श्रेणी मानी जाती है। प्रदूषण का स्तर खतरनाक श्रेणी में में होने से स्पष्ट है कि जिला प्रशासन की ओर से इसको नियंत्रण करने के लिए जो दावे किए जा रहे हैं, उनमें कोई दम नहीं है और अगर प्रयास किए भी जा रहे हैं, तो वो नाकाफी हैं। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार प्रदूषण का यह स्तर बुजुर्गों व बच्चों के स्वास्थ्य के नजरिए से बेहद चिताजनक है, क्योंकि उनमें रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है, ऐसे में उनका विशेष ध्यान रखने की जरूरत है। इधर जिला नागरिक अस्पताल में सांस लेने में आ रही कठिनाईयों संबंधी मरीजों की संख्या बढ़ी है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा.विनय गुप्ता के अनुसार सामान्य दिनों में 20 से 25 लोग जांच के लिए आते थे, अब यह संख्या 60 को पार कर गई है।

दिल्ली दूसरे नंबर पर

प्रदूषण के मामले में बृहस्पतिवार को दिल्ली दूसरे नंबर पर रही। यहां सूक्ष्म कणों का स्तर 400 मिलीग्राम रहा। प्रदूषण के मामले में बल्लभगढ़ में बृहस्पतिवार को कुछ राहत दिखी। यहां हवा में सूक्ष्म कणों का स्तर 280 रहा। प्रदूषण के मामले में बिहार का दरभंगा बृहस्पतिवार को तीसरे नंबर पर रहा। यहां हवा में सूक्ष्म कणों का स्तर 366 दर्ज किया गया।

सड़क किनारे पड़ी मिट्टी का नहीं किया इलाज

शहर से लेकर गांव तक सड़कों व किनारे पर मिट्टी उड़ती दिखाई दे रही है। ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान 15 अक्टूबर से लागू है, इसके बावजूद अभी तक मिट्टी को साफ नहीं किया जा सका है। यहां तक कि शहर के बीचों-बीच से गुजर रहे राष्ट्रीय राजमार्ग किनारे जगह-जगह मिट्टी के ढेर लगे हुए हैं। बाईपास पर तो बहुत बुरा हाल है। यहां दिल्ली-वड़ोदरा-मुंबई एक्सप्रेस-वे निर्माण करने वाली कंस्ट्रक्शन कंपनी द्वारा नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है। बाईपास किनारे मिट्टी के ऊंचे-ऊंचे ढेर लगे हुए हैं। हवा चलने के साथ मिट्टी उड़ती है और वायु प्रदूषण का स्तर बढ़ा देती है।

प्रदूषण से बचने के उपाय

- जब भी घर से बाहर जाएं तो मुंह पर मास्क लगाकर जाएं।

- प्रदूषण त्वचा और आंखों को भी प्रभावित कर सकता है। जब भी घर से बाहर निकलें आंखों पर चश्मा जरूर लगाएं।

- यदि मुंह पर मास्क लगा कर बाहर निकल रहे हैं, तो उसे बार-बार छुएं नहीं।

- बाहर ही नहीं घर की हवा भी प्रदूषित होती है, तो घर में नियमित डस्टिग करते रहें।

- सभी मोहल्लों में प्रत्येक व्यक्ति अपने घर के बाहर की सड़क को गीला करें। ऐसा करने से धूल के दूषित कण हवा में नहीं उड़ेंगे।

- बाजार, मंडी व अन्य स्थानों पर जाते समय सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करें। आफिस जाने वाले कार पूल कर सकते हैं।

प्रदूषण हमारे फेफड़ों को सबसे अधिक नुकसान पहुंचाते हैं। इसके अलावा हृदय, रक्तचाप, सांस संबंधी बीमारियों को बढ़ाते हैं। प्रदूषण होने तक लोग सुबह की सैर नहीं करें। इसके अलावा योग अवश्य करें। यह रक्तचाप एवं हृदय को मजबूत बनाता है। वहीं पौष्टिक भोजन करें। इनमें हरी सब्जियां अवश्य शामिल करें।

- डा. सन्नी डहनवाल, चिकित्सा अधिकारी, स्वास्थ्य केंद्र खेड़ीकलां

प्रदूषण टीबी के मरीजों के लिए भी हानिकारक होता है। टीबी के मरीज बहुत आवश्यक होने पर घर से बाहर निकलें। यदि घर से बाहर निकल रहे हैं, तो मास्क अवश्य लगाएं। रात में सोने से पूर्व गर्म पानी की भाप अवश्य लें। इससे फेफडों को प्रदूषण से राहत मिलती है और प्रदूषण की वजह से बंद नाक खुल जाती है। इससे सांस लेने पर आसानी होती है।

- डा. योगेश गुप्ता, वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी, नागरिक अस्पताल

वायु प्रदूषण बढ़ाने वाली गतिविधियों पर अंकुश के लिए जिला उपायुक्त जितेंद्र यादव की ओर से 22 विभागों के अधिकारियों को कहा गया था। जहां जिस विभाग की लापरवाही नजर आती है, उन्हें नोटिस जारी कर दिया जाता है। इस बाबत और प्रभावी कदम उठाए जाने की जरूरत है।

- स्मिता कनोडिया, क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड

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