फरीदाबाद में नगर निगम का 'डबल गेम'... जनता को 900 TDS का पानी, कर्मचारी पी रहे 99 TDS का 'मिनरल वाटर'
फरीदाबाद में आम नागरिकों को आपूर्ति किया जा रहा पानी गुणवत्ता मानकों पर खरा नहीं उतर रहा है, जिसमें टीडीएस की मात्रा 902 तक पाई गई है।

फरीदाबाद में आम नागरिकों को आपूर्ति किया जा रहा पानी गुणवत्ता मानकों पर खरा नहीं उतर रहा है। इमेज एआई
HighLights
नागरिकों को 902 टीडीएस वाला पानी मिल रहा।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ इसे सेहत के लिए हानिकारक मानते हैं।
निगम कर्मचारी 99 टीडीएस वाला पानी पीते हैं।
अनिल बेताब, फरीदाबाद। औद्योगिक नगरी में आम नागरिकों के घर द्वार तक पहुंच रहा पानी गुणवत्ता के मानकों की कसौटी पर खरा नहीं उतर रहा है। कई जगह बूस्टर के पानी में टीडीएस की मात्रा 399 से 400 है तो कहीं 900 से भी अधिक है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ इस तरह के पानी के सेवन को सेहत के लिहाज से नुकसानदायक मानते हैं।
वहीं, कई बूस्टर पर ड्यूटी दे रहे कर्मचारी जो पानी पी रहे हैं। उस पानी में टीडीएस 99 तक है। इस तरह के पानी को मानकों के हिसाब से सही माना जाता है।
पानी में टीडीएस की मात्रा अधिक होने पर लोग नगर निगम की कार्यप्रणाली के प्रति रोष प्रकट करते हैं। दैनिक जागरण की ओर से जब कई क्षेत्रों में टीडीएस की जांच की गई तो सेक्टर एरिया में भी पानी की स्थिति खराब ही नजर आई। वीआपी कहे जाने वाले सेक्टरों का भी हाल खराब ही दिखा।
सेक्टर-29 में सीनियर सिटीजन फोरम के वरिष्ठ सदस्य रविंद्र मनचंंदा के घर में नगर निगम की ओर से आपूर्ति किए गए पानी की जांच की गई तो यहां टीडीएस 902 था। इसी तरह बौद्ध विहार बूस्टर से तीन नंबर एच ब्लॉक, सैनिक कॉलोनी, सेक्टर-49 और एसजीएम नगर के विभिन्न क्षेत्रों में आपूर्ति किए जाने वाले पानी में टीडीएस की मात्रा 432 थी। इसी बूस्टर परिसर में जब कर्मचारियों के लिए उपलब्ध बोतल बंद पानी की जांच की गई तो वहां टीडीएस 99 था।
विशेषज्ञ कहते हैं कि शुद्ध पेयजल में स्टैंडर्ड मानकों के अनुसार टीडीएस, (टोटल डिसाल्वड सालिडस)की मात्रा 150 से कम होनी चाहिए़। आदर्श स्थिति के अनुसार जल में टीडीएस 75 से 150 तक होना चाहिए़। इससे अधिक टीडीएस होने पर स्वास्थ्य के8 लिए हानिकारक है।
नगर निगम के कई कर्मचारियों ने बताया कि बूस्टर के पानी में स्वाद नहीं है। इसलिए वह खरीद कर ही 100 से कम टीडीएस वाला पानी पीते हैं।
किडनी रोगियों की बढ़ सकती है समस्या
एकार्ड सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के यूरोलाजी एंड किडनी ट्रांसप्लांट विभाग के सीनियर कंसल्टेंट एवं एचओडी डा. अंकुर भटनागर कहते हैं कि हार्ड पानी के सेवन से स्वास्थ्य को नुकसान पहुंच सकता है। पानी में मुख्य रूप से भारी धातु, फ्लोराइड, हों या फिर कैल्शियम, मैग्नीशियम की मात्रा भी ज्यादा हों तो इससे किडनी के मरीजों को अधिक नुकसान पहुंच सकता है। जिन लोगों की किडनी में बार-बार स्टोन बनता है तो उन्हें हार्ड पानी के सेवन से बचना चाहिए।
नगर निगम की ओर से क्लोरीनेशन करके ही पानी की आपूर्ति की जाती है। हमारा पानी गुणवत्ता के हिसाब से बेहतर है। हम समय-समय पर पानी की जांच भी करवाते हैं। प्रयास करते हैं कि सभी क्षेत्रों में शुद्ध पानी की आपूर्ति की जाए।
-ओमबीर सिंंह, अधीक्षण अभियंता, नगर निगम।
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