'साहब... अब तो जिंदा मान लो, तीसरी बार खुद जीवित होने का लाया हूं सबूत', फरीदाबाद में बुजुर्ग की दर्दभरी गुहार
फरीदाबाद में 80 वर्षीय सुरजन सिंह को पेंशन रिकॉर्ड में मृत घोषित कर दिया गया है, जिससे वे पिछले डेढ़ ...और पढ़ें

फरीदाबाद में 80 वर्षीय बुजुर्ग अपने जीवित होने का सबूत लेकर पहुंचा सरकारी दफ्तर। (एआई जेनरेटेड इमेज)
HighLights
80 वर्षीय सुरजन सिंह को पेंशन आईडी में मृत घोषित किया गया।
डेढ़ साल से जीवित होने का सबूत देने को मजबूर हैं।
समाधान शिविर में भी अधिकारियों ने समस्या नहीं सुनी।
निभा रजक, फरीदाबाद। साहब... अब तो जिंदा मान लो, तीसरी बार स्वयं के जीवित होने का सबूत लेकर आया हूं, इन पैरों में इतनी ताकत नहीं कि बार-बार दफ्तरों के चक्कर काट सकूं। बिना सहारे चलने-फिरने में भी समर्थ नहीं हूं, पिछले डेढ़ साल से पेंशन आईडी में मृत घोषित कर पेंशन काट गई है।
एनआईटी पांच निवासी 80 वर्षीय सुरजन सिंह ने जब जिला प्रशासन द्वारा सेक्टर-12 स्थित लघु सचिवालय में आयोजित समाधान शिविर में समस्या को रखा तो मौजूद अधिकारियों से लेकर फरियादी हैरान हो गए।
सबसे बड़ी दुविधा तो यह है कि आज भी शिविर में बुजुर्ग को अधिकारियों ने जीवित नहीं माना। निराश होकर घर लौट गए। बृहस्पतिवार को समाधान शिविर की अध्यक्षता एसडीएम डा. हन्नी बंसल कर रहे थे। जागरण पड़ताल में अधिकारियों की अनदेखी और समाधान शिविर की हकीकत सामने आई है।
बिस्तर पर बीमार हालत में हैं पत्नी, इनकम दिखा दी तीन लाख
सुरजन सिंह ने बताया कि पत्नी प्रीतम कौर की उम्र भी 80 वर्ष है, वह बीमार होने के कारण रेस्ट पर हैं। बुजुर्ग महिला की इनकम परिवार पहचान पत्र में 1.80 लाख से तीन लाख दिखा दी गई है। सुरजन सिंह की भी आय तीन लाख तक दिखाई गई है, साथ ही पीपीपी में आक्यूपेेशन के कालम में पेंशनर दिखाया गया है। सवाल यह है कि जब दोनों पेंशनर हैं तो इनकम कहां से बढ़ गई।
पेंशन आईडी को पीपीपी से जोड़ा जा रहा
विभाग की ओर से पीपीपी और पेंशन आईडी को आपस में लिंक किया जा रहा है। पीपीपी के आधार पर ही बुजुर्ग और दिव्यांगों की आटोमेटिक पेंशन बनाने का दावा भी किया जा रहा है। ऐसे में बड़ा प्रश्न यह है कि परिवार पहचान पत्र में जिंदा सुरजन सिंह को पेंशन आईडी में कैसे मृत दिखा दिया गया। सबसे आश्चर्य की बात तो यह है कि बार-बार सबूत देने और शिकायत करने के बाद भी अधिकारी बुजुर्ग को जिंदा नहीं कर रहे हैं।
लकवाग्रस्त महिला पेंशन के लिए लगा रही चक्कर
एक तरफ सरकार और प्रशासनिक अधिकारी बुजुर्गों की घर बैठे तथा आटोमैटिक पेंशन बनने का दावा करते नहीं थक रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सेक्टर-12 से लघु सचिवालय से आने वाली तस्वीरें दावों की पोल खोल रही हैं। नंगला एनक्लेव पार्ट दो निवासी लकवाग्रस्त सुमन देवी बिना सहारे के चलने फिरने में असमर्थ हैं, बोल भी नहीं सकती हैं।
पति प्रह्लाद सिंह ने बताया कि अधिकारी पिछले छह महीने से सेक्टर-12 लघु सचिवालय और कभी समाज कल्याण अधिकारी के कार्यालय में भेज देते हैं। 2002 का पहचान पत्र और 2003 का राशन कार्ड भी है। फिर भी पेंशन नहीं बन पा रही है। पत्नी की हालत इतनी खराब है कि शौच के लिए भी पाइप लगी है। जैसे-तैसे विभागों में लेकर जाते हैं। यह कहकर बुजुर्ग की आंखे नम हो गई। बुजुर्ग के आंसू बयां बेबसी औ अधिकारियों की उदासीनता को बयां कर रहे थे।
सौ एकड़ में फैली धान की फसल हो रही खराब
समाधान शिविर में तीसरी बार शिकायत लेकर पहुंचे किसान जयपाल सिंह ने बताया कि खेत में दो महीने से वर्षा का पानी भरा है। सौ एकड़ में फैली धान की फसल पकने वाली थी, लेकिन जलभराव के कारण खराब हो रही है। पहले भी शिकायत की गई, लेकिन समस्या दूर नहीं हुई।
किसान का कहना है कि फसल का समय निकलता जा रहा है और यदि जल्द पानी नहीं निकाला गया तो नुकसान बढ़ जाएगा। समाधान शिविर में सिंचाई विभाग के अधिकारी मौजूद नहीं होने के कारण बुजुर्ग को अगली तारीख देकर वापस भेज दिया गया है।
कलावती की बढ़ाई आय, राशन कार्ड हुआ बंद
चंदावली निवासी कलावती की शिकायत है कि पीपीपी में परिवार की आय बढ़ा दी गई है। इससे पहले अधिकारियों ने बिजली का मीटर जोड़ दिया था। जब उसे ठीक कराया तो पता चला कि जमीन बढ़ा दी गई है।
अलग-अलग कमियां बताकर राशन की सुविधा रोक दी गई है। इसे ठीक कराने के लिए पिछले एक साल से विभागों चक्कर काट रही हैं। उनकी मांग है कि वास्तविक आय के अनुरूप रिकॉर्ड दुरुस्त कर राशन कार्ड दोबारा बहाल किया जाए।
समाधान शिविर में आने वाली शिकायतों का त्वरित समाधान किया जा रहा है। बुजुर्ग सुरजन सिंह की शिकायत को संबंधित विभाग को भेज दिया गया है। प्राथमिकता से समाधान कराया जाएगा। - डॉ. हन्नी बंसल, एसडीएम
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