शहजाद भट्टी नेटवर्क यूएपीए के तहत आतंकी संगठन घोषित, हापुड़ से भी सामने आया था कनेक्शन
केंद्र सरकार ने शहजाद भट्टी नेटवर्क को यूएपीए के तहत आतंकवादी संगठन घोषित किया है। इस नेटवर्क का हापुड़ से ...और पढ़ें
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HighLights
शहजाद भट्टी नेटवर्क यूएपीए के तहत आतंकवादी संगठन घोषित।
हापुड़ के अजीम राणा ने महत्वपूर्ण स्थानों की जानकारी साझा की।
नेटवर्क के अन्य संपर्कों की जांच अब और तेज।
केशव त्यागी, हापुड़। पाकिस्तान में सक्रिय शहजाद भट्टी नेटवर्क को केंद्र सरकार ने गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी यूएपीए के तहत आतंकवादी संगठन घोषित कर दिया।
संगठन का नेटवर्क सीमा पार से हथियार, विस्फोटक और मादक पदार्थों की तस्करी के साथ युवाओं और छोटे अपराधियों को आतंकवादी गतिविधियों के लिए उकसाने में शामिल रहा है।
नेटवर्क पर डिजिटल माध्यम से नफरत फैलाने और देश की आंतरिक सुरक्षा तथा सांप्रदायिक सौहार्द को नुकसान पहुंचाने के प्रयासों के भी आरोप हैं।
शहजाद भट्टी नेटवर्क के खिलाफ देशभर में कार्रवाई के बीच हापुड़ का कनेक्शन भी खासा अहम हो गया है।
मार्च 2026 में धौलाना क्षेत्र के पिपलैहड़ा के अजीम राणा और मेरठ के जई गांव निवासी आजाद राजपूत की गिरफ्तारी के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने शहजाद भट्टी से उनके संपर्क की जांच शुरू की थी। जिसमें पता चला कि दोनों इंटरनेट मीडिया के जरिये भट्टी के संपर्क में थे।
उन्होंने दिल्ली-एनसीआर के धार्मिक और अन्य महत्वपूर्ण स्थानों की फोटो, वीडियो और लोकेशन साझा की थीं। जांच में सामने आया था कि अजीम राणा की दिसंबर 2025 से इंटरनेट मीडिया के माध्यम से शहजाद भट्टी से बातचीत हो रही थी। जिसके बा उसे रुपये के लालच में संवेदनशील स्थानों की जानकारी भेजने के लिए तैयार किया गया। जांच एजेंसियों ने उसके मोबाइल से फोटो और वीडियो मिलने का दावा किया था।
दिल्ली के रमेश नगर मेट्रो स्टेशन के पास स्थित मंदिर और आसपास के क्षेत्र तथा गौतमबुद्धनगर के बिसरख स्थित रावण मंदिर की लोकेशन साझा किए जाने की बात भी सामने आई थी।
हैदराबाद कनेक्शन ने बढ़ाई थी चिंता
अप्रैल में सामने आई जांच में अजीम राणा के हैदराबाद कनेक्शन की भी चर्चा हुई थी। रिपोर्ट के अनुसार शहजाद भट्टी के एक रिश्तेदार के हैदराबाद में रहने की जानकारी सामने आई थी और अजीम के वहां जाने की बात जांच में आई।
इसके बाद सुरक्षा एजेंसियों ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सक्रिय पाकिस्तानी हैंडलरों और उनके स्थानीय संपर्कों की कड़ियां जोड़नी शुरू की थीं। मार्च में पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सामने आए मामलों में मंदिरों और महत्वपूर्ण स्थानों की निगरानी, इंटरनेट मीडिया संपर्क और युवाओं को नेटवर्क से जोड़ने के आरोपों की जांच हुई थी।
अब भट्टी नेटवर्क पर कानूनी शिकंजा और कड़ा
केंद्र सरकार के फैसले के बाद शहजाद भट्टी नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई का कानूनी दायरा और कड़ा हो गया है। हापुड़ के मामले में भी अब जांच का महत्व बढ़ गया है। एजेंसियों के सामने यह पता लगाने की चुनौती है कि मार्च में पकड़े गए आरोपितों के संपर्क केवल उन्हीं तक सीमित थे या जिले अथवा पश्चिमी उत्तर प्रदेश में नेटवर्क की अन्य कड़ियां भी मौजूद हैं।
इसके लिए पुराने डिजिटल संपर्क, आर्थिक लेन-देन और संदिग्ध लोगों के बीच संपर्कों की जांच अहम मानी जा रही है।
