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दादा के सपने को संवारने में जुटे अंकित,फरीदाबाद में तालाब बचाने की अनोखी पहल

Published: Sun, 04 Oct 2026 01:28 PM (IST)

अंकित चंदीला फरीदाबाद के बड़ौली गांव में अपने दादा नत्थी सिंह चंदीला की अधूरी मुहिम को आगे बढ़ाते हुए एक ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक तस्वीर, एआई जेनरेटेड

प्रतीकात्मक तस्वीर, एआई जेनरेटेड

HighLights

  1. पोता अंकित चंदीला दादा की अधूरी मुहिम को आगे बढ़ा रहा है।

  2. बड़ौली गांव के तालाब की 17 दिनों से सफाई जारी है।

  3. गंदे पानी की निकासी रोकने और तालाब बचाने की मांग।

हरेंद्र नागर, फरीदाबाद। कुछ विरासतें जमीन-जायदाद की नहीं होतीं, बल्कि जिम्मेदारियों की होती हैं। बड़ौली के अंकित चंदीला भी अपने दादा स्वर्गीय नत्थी सिंह चंदीला से ऐसी ही एक विरासत लेकर आगे बढ़ रहे हैं।

जिस तालाब की बदहाली को लेकर उनके दादा लंबे समय तक आवाज उठाते रहे, उसे साफ करने का संकल्प अब पोते ने उठा लिया है।

17 दिनों से चल रही तालाब की सफाई

अंकित अपने साथी हल्लू चंदीला के साथ पिछले 17 दिनों से सुबह-शाम तालाब की सफाई में जुटे हैं।ग्रामीणों के बीच मान्यता रही है कि तालाब में स्नान करने से चर्म रोग समेत कई बीमारियों में राहत मिलती है। लेकिन समय के साथ कब्जे और जल निकासी की समस्या ने इस तालाब की तस्वीर बदल दी। 

मंदिर की देखरेख से जुड़े रहे दादा

अंकित के दादा नत्थी सिंह चंदीला मंदिर की देखरेख से जुड़े रहे और तालाब की बदहाली को लेकर लगातार आवाज उठाते रहे। परिवार की ओर से प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से सफाई की मांग भी की गई, लेकिन स्थिति नहीं बदली। आखिरकार अंकित ने तय किया कि अब शिकायत करने के बजाय खुद तालाब को संवारने की शुरुआत करेंगे।

जलकुंभी को निकालना मुश्किल

तालाब के चारों ओर का काफी हिस्सा साफ हो चुका है। अब पानी के अंदर फैली जलकुंभी को निकालने की चुनौती है। बिना किसी बड़ी मशीन या सरकारी संसाधन के दोनों हाथों से मेहनत कर रहे हैं। वहीं अंकित का कहना है कि तालाब साफ करने के बाद यदि नालियों का गंदा पानी इसमें आता रहा तो कुछ समय बाद फिर वही स्थिति हो जाएगी।

उनका कहना है कि पार्षद और प्रशासन से कई बार गुहार लगाने के बावजूद गंदे पानी की निकासी रोकने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। अंकित चाहते हैं कि ता लाब को साफ कराने के साथ इसमें गिर रहे गंदे पानी को भी रोका जाए।

क्या है अंकित की मांग?

अंकित चाहते हैं कि ता लाब को साफ कराने के साथ इसमें गिर रहे गंदे पानी को भी रोका जाए। उनका कहना है कि दादा जिस तालाब को बचाने का सपना देखते थे, उसे उसकी पुरानी पहचान दिलाना अब उनका संकल्प है। एक पोता अपने दादा की अधूरी मुहिम को आगे बढ़ा रहा है और दो हाथों से गांव की एक पुरानी धरोहर को बचाने की कोशिश कर रहे हैं।

अब जरूरत सिर्फ इतनी है कि प्रशासन भी इस मुहिम में हाथ बढ़ाए, ताकि बड़ौली का यह तालाब फिर से गांव की आस्था और पहचान बन सके।

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