फरीदाबाद में 250 फीट गहरे बोरवेल में गिरी ढाई साल की बच्ची, 10 साल से बंद था; SDRF का रेस्क्यू ऑपरेशन जारी
फरीदाबाद के सिही गांव में नगर निगम की लापरवाही के कारण एक ढाई साल की बच्ची 250 फीट गहरे बोरवेल ...और पढ़ें

बोरवेल में गिकी नेहा व रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटी एसडीआरएफ की टीम। सौ- स्वजन
HighLights
ढाई साल की बच्ची 250 फीट गहरे बोरवेल में गिरी।
नगर निगम की लापरवाही से खुला पड़ा था बोरवेल।
एसडीआरएफ टीम द्वारा बच्ची को बचाने का प्रयास जारी।
जागरण संवाददाता, फरीदाबाद। सेक्टर आठ से सटे सिही गांव में नगर निगम की लापरवाही के कारण ढाई साल की बच्ची की जिंदगी दांव पर लग गई है। करीब दस साल से पानी सूखने के कारण बंद पड़े बोरवेल में रविवार देर शाम बच्ची खेलते हुए गिर पड़ी। एसडीआरएफ टीम बच्ची को बोरवेल से निकाने की कोशिश में जुटी है। नेहा नाम की यह बच्ची पिता रामदीन व माता के साथ रहती है।
रामदीन मजदूरी करते हैं और हादसे के समय काम पर गए हुए थे। बच्ची अन्य बच्चों के साथ बोरवेल के आसपास खेल रही थी। इसी दौरान वह खुले बोरवेल में जा गिरी। साथ खेल रहे बच्चों ने शोर मचाकर आसपास के लोगों को घटना की जानकारी दी। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई।

रेस्क्यू अभियान के दौरान बोरवेल के अंदर से बच्ची के रोने की आवाज सुनाई दे रही है। यह आवाज परिवार और मौके पर मौजूद लोगों के लिए उम्मीद भी है और चिंता भी, क्योंकि मासूम करीब 250 फीट गहरे बोरवेल में फंसी है।
दस साल से बंद था, फिर भी सुरक्षा इंतजाम नहीं
स्थानीय स्तर पर मिली जानकारी के अनुसार यह बोरवेल करीब दस साल से पानी सूखने के कारण बंद पड़ा था। इसके मुंह पर ढक्कन लगा हुआ था, लेकिन कुछ दिन पहले यह ढक्कन हट गया। इसके बाद दोबारा ढक्कन नहीं लगाया गया। यही लापरवाही अब सबसे बड़ा सवाल बन गई है।
यह भी पढ़ें- अलवर: बोरवेल में गिरा 9 साल का बच्चा, 48 फीट की गहराई पर मिट्टी और पाइप के बीच फंसा; बचाव कार्य जारी
जिस बोरवेल का इस्तेमाल नहीं हो रहा था, उसे स्थायी रूप से बंद करना या उसके चारों तरफ मजबूत सुरक्षा घेरा बनाना जिम्मेदार विभाग की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए थी। इसके बावजूद खुला बोरवेल बच्चों के खेलने की जगह के पास पड़ा रहा और आखिरकार एक मासूम उसमें जा गिरी।
अधिकारी आंखें मूंदे रहे, अब मशीनें और टीमें दौड़ रही हैं
यह हादसा सिर्फ एक परिवार की त्रासदी नहीं है, बल्कि यह सवाल भी खड़ा करता है कि नगर निगम अपने बंद और अनुपयोगी बोरवेलों की सुरक्षा को लेकर कितना गंभीर है। जिस खुले गड्ढे को समय रहते ढककर एक बच्ची की जान खतरे में पड़ने से रोका जा सकता था, अब उसी को लेकर पुलिस, एसडीआरएफ और अन्य बचाव दलों को घंटों मशक्कत करनी पड़ रही है।

इस मामले का सबसे गंभीर पहलू यह भी है कि इस तरह के हादसे होने के बाद रेस्क्यू के लिए प्रशासन के पास कोई इंतजाम नहीं है। बच्ची के बोरवेले में गिरने के बाद गुरुग्राम से एसडीआरएफ टीम के आने का इंतजार किया गया। तब तक स्थानीय प्रशासन लाचार हाथ पर हाथ धरे बैठा रहा।
