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फरीदाबाद: गलत बिजली बिल पर DHBVN को मुआवजा देने का आदेश, उपभोक्ता आयोग ने सुनाया फैसला

Published: Mon, 03 Aug 2026 01:55 AM (IST)

जिला उपभोक्ता आयोग ने बिजली बिलों में गड़बड़ी और शिकायतें न सुलझाने पर डीएचबीवीएन को उपभोक्ता को मुआवजा देने का ...और पढ़ें

एआई जेनेरेटेड इमेज।

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HighLights

  1. डीएचबीवीएन को उपभोक्ता को मुआवजा देने का आदेश।

  2. मानसिक प्रताड़ना के लिए 3,300 रुपये का भुगतान।

  3. गलत बिलिंग और शिकायतें न सुलझाने पर कार्रवाई।

जागरण संवाददाता, फरीदाबाद। बिजली बिलों में गड़बड़ी और लंबे समय तक शिकायतों का समाधान नहीं करने के मामले में जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (डीएचबीवीएन) के खिलाफ फैसला सुनाया है।

आयोग ने निगम को उपभोक्ता को मानसिक प्रताड़ना के लिए 3,300 रुपये तथा वाद खर्च के रूप में 2,200 रुपये का मुआवजा देने के आदेश दिए हैं।

अजय नगर निवासी आशुतोष कुमार ने आयोग में दायर शिकायत में कहा था कि उन्हें वर्षों से वास्तविक बिजली खपत के अनुरूप बिल नहीं मिल रहे थे। कई बार बिल नियत तिथि के बाद पहुंचते थे, जबकि कई बार गलत अवधि का बिल जारी किया जाता था।

कई लिखित शिकायतें दी, नहीं हुआ समाधान

उन्होंने वर्ष 2015 से लेकर 2022 तक डीएचबीवीएन के अधिकारियों को कई लिखित शिकायतें दीं, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ। शिकायतकर्ता का आरोप था कि गलत बिलिंग के कारण उन पर अतिरिक्त राशि, सरचार्ज और ब्याज का बोझ डाला गया।

शिकायत में यह भी कहा गया कि उन्होंने अपने स्तर पर नियमित रूप से बिजली मीटर की रीडिंग दर्ज कर अधिकारियों को उपलब्ध कराई, फिर भी सही बिल जारी नहीं किए गए।

बाद में उन्होंने उपभोक्ता आयोग में याचिका दायर कर वास्तविक खपत के आधार पर बिल संशोधित करने, सरचार्ज व ब्याज माफ करने तथा मानसिक प्रताड़ना और वाद खर्च दिलाने की मांग की।

समाधान के बावजूद देना होगा मुआवजा

सुनवाई के दौरान डीएचबीवीएन की ओर से आयोग को बताया गया कि शिकायतकर्ता का बिजली खाता दोबारा जांचकर संशोधित कर दिया गया है और पूरा हिसाब ठीक कर दिया गया है। निगम ने यह भी स्वीकार किया कि अब शिकायतकर्ता के खाते में कोई बकाया नहीं है तथा भुगतान का समायोजन कर दिया गया है।

दोनों पक्षों की दलीलें और रिकार्ड का अवलोकन करने के बाद आयोग ने माना कि बिजली खाते का संशोधन हो चुका है और विवाद का मूल कारण दूर कर दिया गया है।

इसके बावजूद शिकायतकर्ता को हुई मानसिक प्रताड़ना और मुकदमेबाजी को देखते हुए आयोग ने डीएचबीवीएन को 3,300 रुपये मुआवजा और 2,200 रुपये वाद खर्च देने का आदेश पारित किया।

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