फरीदाबाद बोरवेल हादसा: 2 घंटे तक सुनाई देती रही नेहा की आवाज, पिता पुकारते रहे नाम; फिर छा गया सन्नाटा
फरीदाबाद के सिही गांव में एक तीन वर्षीय बच्ची नेहा बोरवेल में गिर गई, जिसने करीब दो घंटे तक जिंदगी ...और पढ़ें

नेहा की फाइल फोटो व बोरवेल में गिरने के बाद टार्च से बच्ची को देखती हुई पुलिस, तब तक बच्ची के रोने की आवाज आ रही थी। जागरण
HighLights
सिही गांव में तीन वर्षीय नेहा बोरवेल में गिरकर फंसी।
दो घंटे तक संघर्ष के बाद बच्ची की आवाज आनी बंद हुई।
स्थानीय निवासी देवेंद्र ने बचाव उपकरण ठीक कर मदद की।
प्रवीन कौशिक, फरीदाबाद। सिही गांव में रविवार शाम बोरवेल में गिरी तीन वर्षीय बच्ची नेहा करीब दो घंटे तक जिंदगी और मौत के बीच जूझती रही। बोरवेल के अंदर से उसकी आवाज बाहर तक सुनाई दे रही थी। बाहर खड़े स्वजन हर आवाज के साथ उम्मीद लगाए बैठे थे कि उनकी बेटी सुरक्षित बाहर आ जाएगी।
पिता बार-बार नेहा को उसके नाम से पुकार रहे थे। वह बेटी को आवाज देकर उसका हौसला बनाए रखने की कोशिश कर रहे थे। लेकिन करीब दो घंटे बाद अचानक नेहा की आवाज आनी बंद हो गई। इसके साथ ही वहां मौजूद लोगों की उम्मीद भी टूटने लगी।
सिर के बल गिरी, इसलिए उम्मीद हुई कम
बच्ची के बोरवेल में गिरने की सूचना मिलते ही मौके पर बचाव दल पहुंचा और उसे बाहर निकालने के लिए रेस्क्यू अभियान शुरू किया गया। बोरवेल के अंदर पानी होने के कारण बचाव अभियान में कई तरह की मुश्किलें सामने आईं।

बच्ची सिर के बल बोरवेल में गिरी थी, इसलिए समस्या अधिक थी। समय बीतने के साथ स्वजन की बेचैनी बढ़ती गई और ग्रामीण भी घटनास्थल पर डटे रहे।
देवेंद्र की जुगत से काम आया अम्ब्रेला उपकरण
रेस्क्यू अभियान के दौरान स्थानीय निवासी देवेंद्र तेवतिया की भूमिका भी अहम रही। वह पहले बेल्डर के रूप में काम कर चुके हैं। बताया गया कि एनडीआरएफ के पास बच्ची को बाहर निकालने के लिए अम्ब्रेला उपकरण मौजूद था, लेकिन बोरवेल के नीचे पानी होने के कारण उपकरण वहां जाकर खुल नहीं पा रहा था।
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ऐसे में देवेंद्र ने वेल्डिंग मशीन की मदद से उपकरण को दुरुस्त किया। इसके बाद उसे दोबारा बोरवेल में उतारा गया और नीचे जाकर उपकरण खुल सका। देवेंद्र की इस तकनीकी मदद से रेस्क्यू टीम को बच्ची को बाहर निकालने में मदद मिली। लंबे प्रयास के बाद बच्ची को बोरवेल से बाहर निकाला गया।

हालांकि तब तक उसकी हालत बेहद गंभीर हो चुकी थी। एनडीआरएफ का सीसीटीवी कैमरा पानी के अंदर काम नहीं कर सकता था, इसलिए नगर निगम की मदद से एक और कैमरा मंगाया गया लेकिन बोरवेल में गंदा पानी होने की वजह से बच्ची की स्थिति का पता नहीं चल सका।
पूरी रात नहीं सोए ग्रामीण
नेहा के बोरवेल में फंसे होने की खबर के बाद सिही गांव में मातम और बेचैनी का माहौल रहा। आसपास के लोग पूरी रात घटनास्थल के आसपास जुटे रहे। हर किसी को उम्मीद थी कि बच्ची को सुरक्षित बाहर निकाल लिया जाएगा तो कोई हर गुजरते पल के साथ अनहोनी की आशंका से परेशान था।
ग्रामीणों की नजरें लगातार रेस्क्यू अभियान पर टिकी रहीं। घटनास्थल पर मौजूद लोगों के मुताबिक, जब तक नेहा अंदर थी, तब तक हर कोई उसकी आवाज सुनने का इंतजार करता रहा। पिता की पुकार और बचाव दल की कोशिशों के बीच करीब दो घंटे तक जिंदगी की उम्मीद बनी रही। लेकिन जब उसकी आवाज बंद हुई तो माहौल और भी गमगीन हो गया।
नेहा को बाहर निकालने के लिए स्थानीय लोगों ने भी अपनी ओर से हरसंभव सहयोग किया। देवेंद्र तेवतिया की तकनीकी मदद से अम्ब्रेला उपकरण को काम करने लायक बनाया जा सका। इसके बाद रेस्क्यू टीम ने अभियान आगे बढ़ाया। बच्ची के बाहर आने तक ग्रामीण घटनास्थल पर डटे रहे।
