ये कैसी आयुष्मान योजना? कार्ड जेब में, फिर भी इलाज के लिए करना पड़ रहा मरीजों को भुगतान
फरीदाबाद में आयुष्मान योजना कार्डधारकों को इलाज के लिए जेब से भुगतान करना पड़ रहा है, जबकि निजी अस्पताल भुगतान न मिलने के कारण हड़ताल पर हैं।

फरीदाबाद में आयुष्मान कार्ड होने के बाद भी मरोजों को करना पड़ा रहा है भुगतान। (एआई जेनरेटेड इमेज)
जागरण संवाददाता, फरीदाबाद। जिले में केंद्र की आयुष्मान योजना को कभी वरदान कहा जाता था। आर्थिक रूप से कमजोर आय वर्ग के लोगइलाज कराने के बाद योजना की खूब सराहना करते थे। वही योजना कार्डधारकों के लिए अब सिरदर्द बन रही है। कार्ड होने पर भी उनकी जेब पर इलाज का मोटा खर्चा भारी पड़ रहा है।
मंगलवार को पैनल के निजी अस्पतालों की एक दिन की सांकेतिक हड़ताल थी। हड़ताल की जब पड़ताल की तो ऐसी ही स्थिति सामने आई। कार्ड होने पर उन्हें खर्चा करके इलाज कराना पड़ा। वहीं आइएम की टीम ने निजी अस्पतालों के भुगतान न किए जाने पर नाराजगी जताई।
केस स्टडी
- इंदिरा नगर निवासी प्रेमपाल घर में गिर थे। ऐसे में उनके पैर में फ्रैक्चर हो गया था। उनके पास आयुष्मान कार्ड भी है, मगर सरकारी अस्पताल में जाने पर उन्हें तारीख मिलती। इसलिए वह निजी अस्पताल में इलाज को आए। पत्नी ललिता ने प्रेमपाल का कार्ड दिखाते हुए बताया कि उन्हें लगभग 60 हजार रुपये खर्च करना पड़ा। उन्हें योजना का लाभ नहीं मिला।
- दिलीप कॉलोनी, समयपुर रोड निवासी लक्ष्मी देवी ने बताया कि उनके पति मदन गोपाल के पास आयुष्मान कार्ड है, मगर योजना के तहत इलाज नहीं मिला। हड्डी टूटने पर उन्हें इलाज कराने पर 57 हजार रुपये खर्च करने पड़े।
कार्डधारकों की संख्या बढ़ते ही बिगड़ने लगा सिस्टम
आयुष्मान योजना प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की एक महत्वाकांक्षी योजना है, गरीबों के लिए एक वरदान है। इससे अनगिनत लोगों ने इसका फायदा उठाया है और सरकार की इससे वाहवाही हुई है। पहले प्रदेश में सभी अस्पतालों का समय पर भुगतान हो जाता था। बड़ी संख्या में निजी अस्पताल आगे आए थे।
लेकिन 2023 में जब से चिरायु योजना आई, तब से आयुष्मान कार्डधारकों की संख्या अचानक से ज्यादा हो गई, लेकिन सरकार ने इसका बजट नहीं बढ़ाया। ऐसे में मरीजों का इलाज़ तो होता रहा, लेकिन बजट न बढ़ाए जाने की वजह से अस्पतालों के भुगतान में रुकावट आने लगी। समय के साथ साथ सरकार की देनदारी बढ़ती गई। भुगतान रुका ता निजी अस्पतालों ने नाराजगी जतानी शुरू की।
सरकार की ओर से जनवरी के बाद के केसों का भुगतान नहीं
इस बीच आईएमए ने सरकार से कई बार मुलाकात की। कुछ समाधान निकालने के लिए प्रयास करते रहे, लेकिन कोई हल नहीं निकला। आइएम के पूर्व जिलाध्यक्ष डॉ. सुरेश अरोड़ा ने बताया कि सरकार की ओर से जनवरी के बाद के केसों का भुगतान नहीं हुआ और अब तक प्रदेश के निजी अस्पतालों का लगभग 1200 करोड़ रुपये का बकाया है।
इसलिए एक सितंबर को एक दिन की सांकेतिक हड़ताल प्रदेश में की गई, जिसमें आयुष्मान कार्डधारकों का योजना के तहत इलाज नहीं किया गया। आइएमए ने तय कर लिया है कि अगर समस्याओं का तुरंत कोई समाधान नहीं होता तो 16 सितंबर से अनिश्चित हड़ताल की जाएगी।
यह है केंद्र की आयुष्मान योजना
केंद्र के 2011 के सर्वे के अनुसार पहले जिले में लगभग 95 हजार आयुष्मान कार्डधारक थे। बीपीएल कार्डधारकों की कमजोर आर्थिक स्थिति को देखते हुए कार्ड बनाए गए थे। बाद में बड़ी संख्या में नागरिकाें की ओर से आवाज उठने लगी कि उनकी वार्षिक आय कम है, मगर वह किसी भी स्वास्थ्य संबंधी योजना कर लाभ नहीं ले पा रहे हैं।
इसके बाद प्रदेश सरकार ने 2023 में चिरायु योजना की शुरुआत की। इस योजना के तहत उन लोगों के कार्ड बनाए गए थे, जिनके परिवार की वार्षिक आय 1.80 लाख रुपये थी। चिरायु के कार्डधारकों को भी आयुष्मान योजना करा लाभ मिलने लगे।
पैनल पर निजी अस्पतालों की संख्या
- 19 निजी अस्पताल, पहले थे
- 16, अब हैं
- 95 हजार, पहले थे कार्डधारक
- 8.25 लाख, वर्तमान में कार्डधारकों की संख्या
वर्तमान में जिले में 16 निजी अस्पताल पैनल पर हैं। दो बड़े अस्पतालों में आपात स्थिति में आने पर मरीजों को सेवाएं दी गई हैं। बड़ी संख्या में नागरिक अस्पताल में आकर भी मरीजों ने इलाज कराया है। निजी अस्पतालों की सांकेतिक हड़ताल से स्वास्थ्य सेवाएं पर कोई खास असर नहीं पड़ा। - डॉ. विशाल सक्सेना, नोडल अधिकारी, आयुष्मान भारत योजना
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