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फरीदाबाद में 30 साल पुरानी इमारतों का होगा सेफ्टी ऑडिट, देना होगा स्ट्रक्चरल स्टेबिलिटी सर्टिफिकेट

Published: Thu, 08 Oct 2026 04:09 PM (IST)

फरीदाबाद में 30 साल से पुराने भवनों का सेफ्टी ऑडिट होगा, जिसके तहत निजी भवन मालिकों को एक माह के भीतर स्ट्रक्चरल स्टेबिलिटी सर्टिफिकेट जमा करना होगा।

फरीदाबाद में पुरानी इमारतों का सुरक्षा ऑडिट, स्ट्रक्चरल स्टेबिलिटी सर्टिफिकेट अनिवार्य।

फरीदाबाद में पुरानी इमारतों का सुरक्षा ऑडिट, स्ट्रक्चरल स्टेबिलिटी सर्टिफिकेट अनिवार्य।

HighLights

  1. 30 साल पुराने भवनों का फरीदाबाद में होगा सेफ्टी ऑडिट।

  2. निजी भवन मालिकों को एक माह में देना होगा सर्टिफिकेट।

  3. नियम न मानने पर जुर्माना और कानूनी कार्रवाई होगी।

जागरण संवाददाता, फरीदाबाद। औद्योगिक नगरी में 30 साल पुराने भवनों का सेफ्टी ऑडिट करने की तैयारी है। सरकारी भवनों का सेफ्टी ऑडिट निगम की ओर से किया जाएगा। जबकि निजी भवन के मालिक खुद ही अपनी सुरक्षा के मानकों को जाचेंगे। इसके साथ ही एक माह के भीतर स्ट्रक्चरल स्टेबिलिट सर्टिफिकेट निगम आफिस में जमा कराना होगा।

30 साल से पुराने भवन के मालिक द्वारा अगर तय समय में सर्टिफिकेट जमा नहीं कराया जाता है तो उससे जुर्माना वसूलने के साथ मामला भी दर्ज करवाया जाएगा। वहीं अगर भविष्य में उस बिल्डिंग को तोड़ने की जरूरत पड़ती है तो उसका हर्जाना भी भवन मालिक से ही वसूला जाएगा।

दिल्ली में शातिं निकेतन में हुए हादसे के बाद से ही पुरानी बिल्डिंगों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े हो गए है। क्योंकि निगम की ओर से कभी भी शहर में इन भवनों का सुरक्षा ऑडिट नहीं कराया गया है। निगम के पास रिकार्ड ही नहीं है कि कौन सा भवन कितना पुराना और जर्जर है।

आयुक्त की ओर से जारी आदेश के अनुसार शहर के भवनों को तीन भागों में बांटा जाएगा। पहली श्रेणी में वह इमारते होंगी जो तुरंत ढहने की स्थिति में होगी, उनको खाली कराया जाएगा। दूसरी श्रेणी में बड़े स्ट्रक्चरल रिपेयर की जरूरत है, उन्हें मरम्मत होने तक खाली रखा जाएगा। तीसरे में वह भवन होंगे। जिनको मामूली मरम्मत की आवश्यकता है। वह काम के दौरान प्रयोग में लाई जा सकेगी।

हादसे में अब भवन मालिक, ठेकेदार और अफसर भी होंगे जिम्मेदार

आदेश के अनुसार सर्वे पूरा होने के बाद भी अगर कोई हादसा होता है तो इसमे भवन मालिक, ठेकेदार और संबंधित अधिकारी की भी जिम्मेदारी होगी। इन तीनों पर ही मामला दर्ज करवाया जाएगा। अभी तक केवल सारा मामला बिल्डर और ठेकेदार पर डाल दिया जाता था। संयुक्त आयुक्त को आदेश दिया गया है कि वह अपने जोन में जर्जर भवनों की रिपोर्ट को लेकर हर सप्ताह ही समीक्षा करेंगे।

शहर में 30 साल से पुरानी इमारतों को लेकर सर्वे करवाया जा रहा है। जिसमें सरकारी भवनों का निगम और निजी भवनों की सुरक्षा का आकलन खुद उसके मालिक को करना होगा। इसके साथ ही एक माह के भीतर स्ट्रक्चरल स्टेबिलिटी सर्टिफिकेट भी जमा कराना होगा। - यशेंद्र सिंह, आयुक्त नगर निगम

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