सूरजकुंड मेले में बांग्लादेशी शिल्पकार ने कहा, 'भारत में कभी डर नहीं लगा, यहां सब अपने लगते हैं'
अंतर्राष्ट्रीय सूरजकुंड मेले में बांग्लादेशी शिल्पकार अजीजुल ने भारत में अपनी सुरक्षा को लेकर चल रही धारणाओं को खारिज किया। ...और पढ़ें

अंतरराष्ट्रीय सूरजकुंड मेले में अपने स्टाॅल पर जारदानी साड़ी दिखाते हुए अजीजुल हक। जागरण

समय कम है?
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दीपक पांडेय, फरीदाबाद। तनाव के चलते अंतरराष्ट्रीय सूरजकुंड मेले में बांग्लादेश के कलाकारों का शिरकत करना मुश्किल लग रहा था। मगर अंतिम समय में सरकार से मंजूरी मिलने के बाद बांग्लादेश के कलाकारों ने भी मेले में अपनी शिल्पकला को प्रदर्शित किया। अपने बेटे के साथ मेले में आए अजीजुल ने कुछ ऐसा कहा जो वहां की सरकार को आइना दिखाने जैसा है। उन्होंने कहा, 'मुझको कभी भी भारत में डर नहीं लगा। यहां पर सभी लोग अपने लगते हैं।'
अपने बेटे के साथ मेले में आए अजीजुल से जब पूछा गया कि सुरक्षित माहौल नहीं होने के चलते उनके देश की टीम ने भारत में खेलने से इंकार कर दिया। आपको भारत में आने पर डर नहीं लगा? इसका जवाब देते हुए अजीजुल हंस पड़ते हैं।
उन्होंने कहा, 'पिछले कुछ दिनों में जो पूरा वाक्या हो रहा है वह केवल राजनीति से प्रेरित है। शिल्पकार किसी भी राजनीतिक साजिश या षड्यंत्र के खांचे में फिट नहीं होता। मैं पिछले कई बरसों से मेले में अपने बेटे के साथ आ रहा हूं। मुझको कभी भी भारत में डर नहीं लगा। यहां पर सभी लोग अपने लगते हैं।'

वहीं, बेटे सापरान ने कहा, 'बांग्लादेश टीम के कई क्रिकेट राजनीतिक पार्टी से भी जुड़े हुए है। इसलिए विवाद और अधिक गहरा गया है।'
3000 से लेकर 40 हजार तक की साड़ियां
अजीजुल के स्टाल पर तीन हजार से लेकर 40 हजार तक की साड़ी उपलब्ध है। वह कोटन की साड़ी पर जामदानी डिजाइनिंग करते हैं। शिल्पकार के अनुसार एक साड़ी को तैयार करने में दो लोगों से 20 से 25 दिन का समय लगता है। हर साल शुरुआती सात दिन तो मेले में सुस्ती रहती है। लेकिन उसके बाद उनको अपने काम के अच्छे कद्रदान मिल जाते हैं।
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