सचिन गुप्ता, चरखी दादरी :

भारत के लिए कारगिल विजय दिवस एक महत्वपूर्ण दिवस है। सन 1999 में करीब 18 हजार फीट की ऊंचाई पर कारगिल क्षेत्र में भारत व पाकिस्तान के बीच लगभग 60 दिनों तक युद्ध चला था। तत्कालीन भारत सरकार ने कारगिल युद्ध को आप्रेशन विजय नाम देते हुए दो लाख सैनिकों को कारगिल में भेजा था। इस युद्ध में भारत को विजय प्राप्त हुई थी। आधिकारिक तौर पर युद्ध का समापन 26 जुलाई 1999 को हुआ था। तभी से आज तक इस दिन को कारगिल विजय दिवस के रूप में मनाया जाता है। हालांकि इस युद्ध के दौरान 527 भारतीय सैनिकों ने अपने जीवन का बलिदान दिया। आप्रेशन विजय में 527 भारतीय सैनिकों ने अपने प्राणों की आहुति दी थी। इन 527 सैनिकों में आधा दर्जन जवान दादरी जिले के निवासी थे।

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ये हुए थे कारगिल में शहीद

शहीद राजबीर सिंह, गांव मोड़ी

दादरी जिले के गांव मोड़ी निवासी शहीद राजबीर सिंह 17 मई 1999 को आप्रेशन विजय के दौरान दुश्मनों का मुकाबला करते हुए शहीद हो गए थे। शहीद राजबीर सिंह की पत्नी फिलहाल भिवानी में रह रही है। सरकार द्वारा परिजनों को सहायता स्वरूप गांव बामला के पास एक पेट्रोल पंप तथा दिल्ली में एक फ्लैट भी दिया गया है। गांव मोड़ी के सरकारी स्कूल का नामकरण भी शहीद राजबीर सिंह के नाम पर सरकार द्वारा किया गया था।

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शहीद कुलदीप सिंह, गांव महराणा

दादरी जिले के गांव महराणा के कुलदीप सिंह एक मार्च 1993 को भारतीय सेना में भर्ती हुए थे। भारतीय सेना की 17 जाट रेजीमेंट में सिपाही के पद पर तैनात कुलदीप सिंह 18 जून 1999 को दुश्मनों से लोहा लेते हुए शहीद हो गए। परिजनों ने अपने घर के बाहर ही शहीद कुलदीप सिंह की प्रतिमा लगा रखी है, जिससे वो हर समय उन्हें याद रहे। पांच भाई बहनों में शहीद कुलदीप दूसरे नम्बर पर थे। सरकार की तरफ से उनकी पत्नी को महम में गैस एजेंसी दी गई थी।

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शहीद लाल सिंह, गांव गोकल

गांव गोकल के रहने वाले लाल सिंह भारतीय सेना की 212 राकेट रेजीमेंट में हवलदार के पद पर तैनात थे। हवलदार लाल सिंह सन 1980 में भारतीय सेना में भर्ती हुए थे। कारगिल युद्ध में सरहद की रक्षा करते हुए 6 जुलाई 1999 को हवलदार लाल सिंह वीरगति को प्राप्त हो गए। स्व. जयराम नंबरदार व स्व. गिदोडी देवी के पुत्र शहीद हवलदार लाल सिंह अपने पीछे अपना भरा-पूरा परिवार छोड़ गये थे। उनके परिवार में उनकी पत्नी बिमला देवी, पुत्र विजयपाल, पुत्री मुकेश व सुकेश है।

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शहीद राज कुमार, गांव रावलधी

भारतीय सेना की 18 ग्रनेडियर टुकड़ी में लांस नायक के पद पर तैनात राज कुमार ने गांव रावलधी निवासी शेर सिंह के घर जन्म लिया था। शहीद राज कुमार 28 अगस्त 1993 को भारतीय सेना में भर्ती हुए थे। कारगिल युद्ध में 13 जून 1999 को दुश्मनों से लोहा लेते हुए राज कुमार वीरगति को प्राप्त हो गए। शहीद राजकुमार का बड़ा भाई सुखवीर सिंह हरियाणा सरकार में कार्यरत है, जबकि छोटा भाई कंवर सिंह खुद भारतीय सेना से सेवानिवृत है। शहीद राज कुमार के छोटे भाई कंवर सिंह वह दिन नहीं भूला पाए हैं, जिस दिन वे खुद अपने भाई राज कुमार को कारगिल युद्ध के लिए बुलावा आने पर दादरी रेलवे स्टेशन पर छोड़ कर आया था।

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शहीद रणधीर सिंह, गांव बलकरा

भारतीय सेना की 18 ग्रेनेडियर टुकड़ी के वीर चक्र विजेता शहीद सूबेदार रणधीर सिंह दादरी जिले के गांव बलकरा के निवासी थे। शहादत के बाद सरकार ने इनके परिवार को रोहतक क्षेत्र में पेट्रोल पंप व फ्लैट मुहैया करवाया था।

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शहीद सुरेश कुमार, गांव चरखी

दादरी जिले के गांव चरखी में वेद प्रकाश डूडी के घर 8 अगस्त 1973 को जन्मे सुरेश कुमार डूडी ने 28 दिसंबर 1991 को सेना में भर्ती होकर अपने बचपन का सपना साकार किया था। भारतीय सेना की 4 जाट रेजीमेंट में सिपाही के रूप में भर्ती हुए सुरेश कुमार ने 17 मई 1999 को कारगिल के युद्ध में देश के लिए अपनी शहादत दे दी। चार भाइयों में शहीद सुरेश कुमार दूसरे नंबर पर थे। सरकार ने शहीद सुरेश के परिवार को गांव में ही पेट्रोल पंप उपलब्ध करवाया है।

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दादरी जिले के शहीदों की सूची

क्रम पद नाम पिता का नाम गांव रेजीमेंट कब हुए शहीद

1 सूबेदार रणधीर सिंह श्रीचंद बलकरा 18 ग्रेनेडियर 3 जून 1999

2. सिपाही सुरेश कुमार वेद प्रकाश चरखी 4 जाट 17 मई 1999

3. लांस नायक राजकुमार शेर सिंह रावलधी 18 ग्रेनेडियर 13 जून 1999

4. हवलदार लाल सिंह जय राम गोकल 212 राकेट 6 जुलाई 1999

5. सिपाही कुलदीप सिंह श्योनारायण सिंह महराणा 17 जाट 5 आरआर 18 जून 1999

6. हवलदार राजबीर सिंह श्योचंद मोड़ी 4 जाट 17 मई 1999

Posted By: Jagran

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