संवाद सहयोगी, तोशाम : निगाना-सिवानी लिक माईनर में पाइप लाइन डालने के कुछ समय बाद ही लीक हो गई। ग्रामीणों का आरोप है कि पाइप लाइन डालने के निर्माण कार्य में प्रयुक्त सामग्री घटिया किस्म की इस्तेमाल की गई है। इसके कारण ट्रायल के तौर पर छोड़ा गया पानी जगह-जगह पाइपों में लीक हो रहा है। ऐसे मे सरकार को नुकसान तो हो ही रहा है साथ ही सिचाई का पानी भी किसानों के खेतों तक नहीं पहुंच पा रहा है। पाइप लाइन का कार्य पूरा होने से पहले नाकामयाब साबित होता नजर आ रहा है।

ग्रामीणों का आरोप है कि ठेकेदार पाइपों में सीमेंट लगाकर खानापूर्ति कर रहा है। गौरतलब होगा की निगाना-सिवानी लिक चैनल में पाइपलाइन डालने के विरोध स्वरूप ग्रामीणों ने करीबन एक वर्ष पहले काफी विरोध किया था तथा कई दिनों तक धरना-प्रदर्शन भी जारी रखा था। आखिरकार प्रशासन व सरकार ने ग्रामीणों की नहीं सुनी और पाइपलाइन डालने के फैसले पर अड़े रहे। पाइपलाइन डालने का कार्य प्रारंभ हो गया और माईनर को तोड़कर अधिकतर पाइपलाइन डाली भी जा चुकी है, लेकिन डाली गई पाइपलाइन जगह-जगह से लीक हो रही है। इससे काफी मात्रा में पानी बर्बाद होता नजर आ रहा है। ग्रामीणों को फसलें भी नष्ट होने का अंदेशा है।

ग्रामीणों ने बताया कि पाइपलाइन के निर्माण कार्य में संबंधित ठेकेदार द्वारा ईंटों सहित अन्य सामग्री घटिया किस्म की सामग्री का प्रयोग किया गया है। गांव आलमपुर, संडवा, पटौदी, थिलोड़, खारियावास आदि के ग्रामीणों के खेत लगते है। ग्रामीण शत्रुघ्न पायल, जगदीश बुढ़ानिया, जयपाल सांगवान, आजाद रायल, सुमित बलोदा, दर्शन, जयवीर, सुरेश शर्मा, पवन श्योराण, अजीत श्योराण, वजीर बलौदा आदि ने कहा कि निगाना-सिवानी लिक चैनल में पहले डेढ़ सौ क्यूसेक पानी आता था। लेकिन इसकी जगह पर पाइपलाइन डालकर सरकार ने किसानों के साथ अन्याय किया है। इसके बावजूद भी सरकार द्वारा जबरदस्ती डाली गई इस पाइपलाइन की पोल शुरूआत में ही खुल गई है। यह पाइप लाइन जगह-जगह से लीक है तथा पाइप लाइन के बीच में बनाई गई होदी भी लीक हो गई है। पाइपलाइन तथा होदी से जगह जगह से काफी मात्रा में पानी निकल रहा है। ग्रामीणों ने सरकार व प्रशासन से मांग की गई या तो इस लिक चैनल को पहले की तरह ही नहर रूपी चलाया जाएं या फिर इस पाइपलाइन को दोबारा से उखाड़कर अच्छे निर्माण सामग्री का प्रयोग करके अच्छी तरह से बनाया जाए। जिससे यह पाइपलाइन लीकेज ना हो और पानी की बर्बादी होने से रुक सके तथा किसानों की फसल बर्बाद होने से बच सके। ग्रामीणों का कहना था कि यदि सरकार व प्रशासन ने उनकी मांग नहीं मानी तो उन्हें धरना-प्रदर्शन सहित बड़ा आंदोलन करने पर विवश होना पड़ेगा। इस बारे मे संबंधित अधिकारी से बात की तो उन्होंने मामले पर टालमटोल का प्रयास किया और कहा कि इस बारे में उच्चाधिकारियों से बात करेंगे।

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