जागरण संवाददाता, भिवानी : हरियाणा सरकार ने हाल ही में हुए विधानसभा सत्र में संपत्ति क्षति वसूली विधेयक पेश करके उसे कानून का दर्जा महज किसान आंदोलन को दबाने के उद्देश्य से दिया है, लेकिन सरकार अपने मकसद में कामयाब नहीं होगी। यह बात वक्ताओं ने कितलाना टोल पर आंदोलनकारियों द्वारा संपत्ति क्षति वसूली कानून की प्रतियां जलाने के बाद अपने संबोधन में कही।

उन्होंने कहा कि कोरोना काल में भी देश की गिरती अर्थव्यवस्था को किसानों ने ही संभाला था। ऐसे में जब आंदोलन अपनी चरम सीमा है उस समय ये कानून बनाने से मनोहर सरकार की किसानों के प्रति उनकी सोच उजागर हो गई है। कानून की प्रतियां जलाते हुए किसानों ने गठबंधन सरकार के खिलाफ नारेबाजी भी की।

उन्होंने कहा कि जनता के सामने महंगाई, बेरोजगारी जैसी भीषण समस्याएं हैं। सरकार की शोषणकारी व्यवस्था आम जनजीवन को नारकीय बना दिया है। यही वजह है कि देश की जनता सड़कों पर है और सभी वर्ग पूरी मुस्तैदी से जनांदोलन में जुटे हैं।

धरने के 105वें दिन खाप सांगवान 40 के सचिव नरसिंह डीपीई, बिजेंद्र बेरला, मास्टर शेर सिंह, गंगाराम श्योराण, रत्तन जिदल, राजसिंह जताई, राजेश कुमारी, बीरमति डोहकी, बिमला, अनोखी मंदोली ने संयुक्त रूप से अध्यक्षता की। धरने का मंच संचालन कामरेड ओमप्रकाश ने किया। इस अवसर पर बलबीर बजाड़, सूरजभान सांगवान, राजू मान, धर्मेन्द्र छपार, दिलबाग ग्रेवाल, रणधीर घिकाड़ा, कमलेश भैरवी, कृष्ण फौगाट, अजीत सिंह सांगवान, प्रोफेसर राजेन्द्र डोहकी, मंगल सुई, राजकुमार हड़ौदी, जगदीश हुई, कंवर झोझू, नत्थूराम शर्मा, रामफल देशवाल, जागेराम डीपीई, परमजीत फतेहगढ़, महीपाल आर्य, कप्तान चंदन सिंह, भूपेंद्र पूर्व सरपंच चरखी, ईश्वर, महेंद्र प्रजापति, सूबेदार सत्यवीर इत्यादि मौजूद थे।

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