यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 08, 2021 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
पंजीकरण के बावजूद किसानों को नहीं मिल रहा भावांतर योजना का लाभ, मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल भी बंद
पवन शर्मा बाढड़ा कृषि विभाग की ओर से शुरू भावांतर योजना बाजरा उत्पादक किसानों के गले क

पवन शर्मा, बाढड़ा
कृषि विभाग की ओर से शुरू भावांतर योजना बाजरा उत्पादक किसानों के गले की फांस बन गई है। इस योजना में पंजीकरण करवाने वाले किसानों के खातों में छह सौ रुपये प्रति क्विटल सीधे भेजने वाला विभाग मात्र साठ फीसद लाभार्थियों को ही मुहैया करवा पाया है। बकाया किसानों के खातों में खामियां बताकर राशि वितरण को रोक दिया गया है। विभाग द्वारा मेरी फसल मेरा ब्यौरा पोर्टल पर आवेदन के बाद रातों रात उन रकबों में दूसरी फसल दर्शाई गई है। विभाग ने पंजीकृत किसानों को उन खातों में सुधार करने के लिए कोई अवसर देने के बजाय पोर्टल को ही बंद कर दिया है। जिससे किसानों में रोष बना हुआ है। कृषि विभाग ने बाजरा उत्पादक किसानों के खातों में रातों रात मैसेज भेजकर बाजरे की जगह कपास, मूंग, ग्वार इत्यादि दूसरी फसल बिजाई का संदेश भेज दिया। अभी किसान इस मामले में सुधार को लेकर विभाग के चक्कर लगा रहे थे तो कृषि विभाग के अधिकारियों ने कुछ भी बताने में असमर्थता जताई। उसके बाद विभाग ने मात्र साठ फीसद किसानों को ही उनके खातों में प्रोत्साहन राशि भेजी और बाद में रोक लगा दी। जब किसानों को इस बात की जानकारी मिली तो उन्होंने सीएससी केंद्रों पर कृषि विभाग का पोर्टल देखा तो वह भी बंद होने से बकाया पंजीकृत किसानों को प्रोत्साहन राशि कब मिलेगी इस पर भ्रम के हालात पैदा हो गए हैं। किसान सत्यनारायण शर्मा, रमेश कुमार, पूर्व सरपंच गिरधारी मोद, विकास डांडमा इत्यादि ने बताया कि एक तरफ तो भावांतर के नाम पर किसानों का बाजरा नहीं खरीदा गया है अब प्रोत्साहन राशि के नाम पर तरह तरह की शर्तें थोंपकर किसानों को परेशान किया जा रहा है। किसानों ने प्रदेश सरकार से योजना का लाभ लेने से वंचित रहे किसानों को तुरंत भावांतर प्रोत्साहन राशि जारी करवाने की मांग की है। भावांतर के नाम पर छलावा किया
भाकियू अध्यक्ष धर्मपाल बाढड़ा, महासचिव हरपाल भांडवा, गिरधारी मोद, जितेंद्र डांडमा ने कहा कि भावांतर योजना या डीएपी उपलब्ध कराना दोनों ही मामलों में सरकार विफल साबित हो रही है। भावांतर के नाम पर पंजीकरण करने वाले किसानों का रातोंरात फसल का रकबा बदल दिया और बाद में नाममात्र राशि देकर सरकार खुद की पीठ थपथपा रही है। किसानों की खरीफ सीजन की फसलें तबाह हो गई वहीं उनको स्पेशल गिरदावरी में शामिल नहीं किया गया। अब रबी सीजन की बिजाई के समय डीएपी संकट ने आमजन का जीना मुहाल कर दिया है। किसान की हर क्षेत्र में उपेक्षा
कांग्रेस नेता सुरेश धनासरी व छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष विजय मोटू ने कहा कि भाजपा सरकार पूंजीपतियों के दबाव में किसान व कृषि को बर्बाद कर रही है। भावांतर योजना में किसानों के खातों में जानबूझ कर पैसे नहीं डाला जा रहा है। मौजूदा रबी सीजन की पहले सरसों व अब गेहूं की फसलों की बिजाई में डीएपी संकट बाधा बना हुआ है। एसडीएम शंभु राठी ने सोमवार को भाकियू प्रतिनिधिमंडल की समस्या सुनते हुए कहा कि समाधान के लिए उच्चाधिकारियों को अवगत करवाया जा रहा है। जल्द ही डीएपी पर्याप्त मात्रा में आएगी।
