करोड़ों की रकम कई हाथों से होकर गुजरी, भिवानी CBLU में एडवांस पेमेंट का बड़ा खेल, ऑडिट में खुला राज
भिवानी की चौधरी बंसीलाल यूनिवर्सिटी में करोड़ों रुपये के एडवांस भुगतान में बड़ी धांधली सामने आई है। लेखापरीक्षा रिपोर्ट के अनुसार, विभिन्न विभागों और बाहरी एजेंसियों को दी गई।
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ऑडिट जांच में खुला वित्तीय गड़बड़ी का राज।
HighLights
भिवानी विश्वविद्यालय में करोड़ों के एडवांस भुगतान में धांधली
लेखापरीक्षा रिपोर्ट में अनियमितताओं का खुलासा हुआ
अग्रिम राशि के उपयोग और समायोजन का रिकॉर्ड नहीं
नवनीत शर्मा, जागरण भिवानी। चौधरी बंसीलाल विश्वविद्यालय में करोड़ों रुपये के एडवांस भुगतान का मामला अब सिर्फ निर्माण एजेंसी वैपकोस लिमिटेड तक सीमित नहीं हैं।
वित्त वर्ष 2024-25 की आडिट जांच में सामने आया है कि विश्वविद्यालय ने अलग-अलग कार्यों के लिए अपनी शाखाओं, अधिकारियों, शिक्षकों और बाहरी एजेंसियों को भी बड़ी रकम एडवांस के रूप में जारी की। अब इन रकमों के उपयोग, समायोजन और शेष राशि की स्थिति का रिकार्ड खंगाला जा रहा हैं।
इससे विश्वविद्यालय की एडवांस राशि जारी करने और उसके बाद निगरानी की प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं। खास बात यह है कि जिन कार्यों के लिए राशि जारी की गई, उनमें से कुछ के दस्तावेज और समायोजन रिकार्ड आडिट के सामने स्पष्ट रूप से प्रस्तुत नहीं हो सके।
बाहरी एजेंसियों को भी करोड़ों की राशि
आडिट में विश्वविद्यालय की ओर से अन्य विभागों और एजेंसियों को किए गए भुगतान पर भी सवाल उठाए गए हैं। एनएचएआइ को वाटर पाइपलाइन और टायलेट निर्माण के लिए 3.04 करोड़ रुपये का एडवांस दिया गया।
बिजली निगम भिवानी को स्ट्रीट लाइन के लिए चार लाख रुपये, एचयूडी हिसार को 125 मीटर हाई-वोल्टेज लाइटिंग के लिए 36.76 लाख रुपये और सर्विंटेक इंडिया प्राइवेट लिमिटेड को लिफ्ट की छह माह की एएमसी के लिए 1.56 लाख रुपये का भुगतान किया गया।
कहां और कैसे खर्च हुए 4.58 करोड़
आडिट में करीब 4.58 करोड़ रुपये के ऐसे एडवांस का उल्लेख है, जो विश्वविद्यालय के विभिन्न अध्यापकों, अधिकारियों और शाखाओं को दिए गए। इंजीनियरिंग शाखा को बिजली लाइन बिछाने, हाई-वोल्टेज लाइटिंग, ग्रिल मरम्मत और लिफ्ट की एएमसी सहित विभिन्न कार्यों के लिए राशि दी गई।
परीक्षा शाखा को गोपनीय कार्यों के लिए 70 लाख रुपये से अधिक का एडवांस दिया गया। इसके अलावा राष्ट्रीय सम्मेलन, कार्यशालाओं, फर्नीचर खरीद, वाहन किराये और दैनिक गतिविधियों के लिए प्रोफेसरों और संयोजकों को अग्रिम राशि जारी की गई।
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