हरियाणा: मिठाई की मिठास में मिलावट का जहर! 200 रुपये KG पनीर ने खोली बाजार की पोल; चांदी के वर्क पर भी उठे सवाल
भिवानी में दीपावली पर मिठाइयों और पनीर में मिलावट का खेल उजागर हुआ है, जहां लागत से कम दाम पर बिकने वाले उत्पादों की शुद्धता पर सवाल उठे हैं।

दीपावली से पहले धड़ल्ले से चल रहा नकली मिठाइयों का कारोबार (जागरण फाइल)
HighLights
पनीर की लागत 350 रुपये, बिक रहा 200 रुपये किलो।
मेवा बर्फी और चांदी के वर्क की गुणवत्ता पर भी सवाल।
खाद्य सुरक्षा विभाग ने 56 सैंपल जांच के लिए भेजे।
नवनीत शर्मा, जागरण, भिवानी। दीपावली पर मिठाई खरीदते समय ग्राहक उसकी चमक, स्वाद और कीमत देखते हैं, लेकिन उसकी शुद्धता की गारंटी को लेकर संशय बना हुआ है।
बाजार में सजी रंग-बिरंगी मिठाइयों के पीछे मिलावट का ऐसा गणित छिपा हो सकता है, जो सेहत पर भारी पड़े। पांच किलो दूध से एक किलो पनीर तैयार करने की लागत 325 से 350 रुपये तक पहुंच रही है, जबकि बाजार में पनीर 200 रुपये किलो तक बिक रहा है।
500 से 700 रुपये किलो बिकने वाली मेवा बर्फी और मिठाइयों पर लगे चांदी के वर्क की गुणवत्ता भी सवालों के घेरे में है। दूध, मावा, घी और खाद्य तेल की शुद्धता की परीक्षा के बीच खाद्य सुरक्षा विभाग ने एक महीने में 56 सैंपल लेने का दावा किया है। अब बाजार को जांच रिपोर्ट और मिलावटखोरों के खिलाफ ठोस कार्रवाई का इंतजार है।
पांच किलो दूध की लागत 350 रुपये, पनीर 200 में बिक्री
बाजार में पनीर 200 से 420 रुपये प्रति किलो तक बिक रहा है। दूध के भाव 65 से 70 रुपये किलो हैं। सामान्य गणना के अनुसार पांच किलो दूध से करीब एक किलो पनीर तैयार होता है।
यानी केवल दूध की लागत 325 से 350 रुपये तक पहुंच जाती है। इसके बाद मजदूरी, बिजली और परिवहन का खर्च अलग हैं। ऐसे में कम कीमत पर बिकने वाले पनीर की गुणवत्ता की जांच जरूरी है। कम कीमत अपने आप में मिलावट का प्रमाण नहीं है, लेकिन लागत और बिक्री के बीच का अंतर जांच का विषय जरूर है।
मेवा बर्फी में भी लागत और बिक्री का गणित
बाजार में मेवा बर्फी 500 से 700 रुपये किलो बिक रही है। इसे तैयार करने में पांच से छह किलो दूध तक इस्तेमाल होने की बात सामने आ रही है। मौजूदा भाव के हिसाब से दूध की लागत ही 325 से 420 रुपये तक बैठती है। इसके बाद मेवा, चीनी, घी, मजदूरी और पैकिंग का खर्च जुड़ता है। ऐसे में मिठाई में इस्तेमाल होने वाले मेवे और अन्य सामग्री की गुणवत्ता की जांच जरूरी है।
चांदी के वर्क की चमक में एल्युमिनियम की आशंका
मिठाइयों पर चमकदार चांदी का वर्क ग्राहकों को आकर्षित करता है, लेकिन इसकी गुणवत्ता पर भी सवाल हैं। करीब 1000 रुपये की एक सीट से 10 किलो मिठाई पर वर्क लगाने का दावा किया जा रहा है।
वहीं कुछ दुकानों पर चांदी के नाम पर एल्युमिनियम युक्त वर्क इस्तेमाल किए जाने की आशंका जताई जा रही है। खाद्य पदार्थों में इस्तेमाल होने वाले वर्क की गुणवत्ता और निर्धारित मानकों की जांच जरूरी है।
घी और तेल भी जांच के दायरे में
मिठाई निर्माण में दूध-मावे के साथ घी और खाद्य तेल का इस्तेमाल होता है। लड्डू, जलेबी और गुलाब जामुन जैसी मिठाइयों में इनकी गुणवत्ता महत्वपूर्ण है। त्योहार पर उत्पादन बढ़ने के साथ कच्चे माल की खपत भी बढ़ती है। ऐसे में केवल तैयार मिठाइयों के सैंपल लेने के बजाय निर्माण केंद्रों और इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल की जांच भी जरूरी है।
हालू बाजार से महम गेट तक मिठाई कारोबार पर नजर
भिवानी के हालू बाजार, पुरानी अनाज मंडी, नया बाजार, घंटाघर, हांसी गेट महम गेट, रोहतक गेट और सेक्टर-13 समेत प्रमुख बाजारों में त्योहार के चलते मिठाइयों की मांग बढ़ी है। खाद्य सुरक्षा विभाग का दावा है कि पिछले एक महीने से रोजाना निरीक्षण किए जा रहे हैं और 56 सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं। रिपोर्ट आने के बाद मिलावट मिलने पर संबंधित कारोबारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
एक्सपर्ट राय:
पंडित नेकीराम शर्मा राजकीय मेडिकल कॉलेज अस्पताल के सीनियर फिजिशियन डॉ. यतिन गुप्ता के अनुसार मिलावटी खाद्य पदार्थों के सेवन से पेट दर्द, उल्टी, दस्त और फूड प्वाइजनिंग हो सकती है। लंबे समय तक सेवन करने पर कुछ मिलावटी रसायन लीवर और किडनी को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसलिए खाद्य पदार्थों की शुद्धता बेहद जरूरी है।
दीपावली के मद्देनजर जिलेभर में विशेष जांच अभियान चलाया जा रहा है। पिछले एक महीने में निरीक्षण के दौरान 56 सैंपल लिए गए हैं। सभी जांच के लिए भेजे गए हैं। रिपोर्ट में मिलावट मिलने पर संबंधित दुकानदारों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। -सुशील कुमार, जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी, भिवानी।
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