जागरण संवाददाता, हिसार:

जिले में आगामी दस जून से सातवीं आर्थिक गणना शुरू हो रही है जिसे लेकर सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। पहली बार आर्थिक गणना को डिजिटल ऑनलाइन मोबाइल एप से किया जा रहा है। गणना के इस कार्य को गांवों में बने कॉमन सर्विस सेंटरों के सुपरवाइजरों के माध्यम से पूरा किया जाएगा। एक सुपरवाइजर के नीचे गांव के 10 ऑपरेटर कार्य करेंगे। जिले में 444 कॉमन सर्विस सेंटर के सुपरवाइजर को यह जिम्मा सौंपा गया है। आर्थिक गणना का कार्य जिला उपायुक्त अशोक मीणा, डीआईओ एमपी कुलश्रेष्ठ, एडीआईओ अखिलेश, डीएसओ अमीता चौधरी व एमओएसपीआइ से रामबिलास, सीएसईएसपीवी आशीष शर्मा, एसपीएम. प्रभजोत सिंह, ईडीएम राकेश नेहरा व डीएम संदीप सिवाच के निर्देशन में होगा। आगामी तीन माह में गणना का कार्य पूरा किया जाएगा जबकि प्रदेश में 15 हजार ऑपरेटर इस कार्य को पूरा करेंगे। सभ ऑपरेटर डोर-टू-डोर जाकर सर्वे के कार्य को करेंगे। घर-घर जाने पर ही ऑनलाइन लोकेशन आपलोड होगी। सुपरवाइजरों के साथ ऑपरेटरों को उनके कार्य के लिए उचित राशि दी जाएगी। गणना का कार्य पूरी तरह से नि:शुल्क किया जाएगा।

पहली बार डिजिटल तरीके से होगा आर्थिक एवं सांख्यिकी विशलेषण

ज्ञात रहे कि भारत सरकार के सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय की ओर से प्रदेश के साथ-साथ हिसार जिले में 10 जून से 7वीं आर्थिक गणना कार्य शुरू किया जा रहा है। हरियाणा में इस कार्य का जिम्मा आर्थिक एवं सांख्यिकी विश्लेषण विभाग को दिया गया है। खास बात यह है कि इस बार की गणना मेन्युअल ना करके डिजिटल तरीके से की जाएगी। आर्थिक गणना को लेकर गत 27 मई को राज्य स्तरीय प्रशिक्षण कार्यशाला करनाल शहर के पंचायत भवन में आयोजित की गई थी जिसमें सांख्यिकी योजना विभाग के साथ-साथ कॉमन सर्विस सेंटरों के जिला प्रबंधक व जिला समन्वयक ने भाग लिया था। डिजिटल तरीके से की जा रही आर्थिक गणना में गांव के बेरोजगार युवाओं को शामिल किया गया है जो कि घर-घर जाकर परिवारों का आर्थिक सर्वे करेंगे। सर्वे में मुख्य रूप से परिवार के मुखिया का नाम, कुल सदस्य, व्यवसाय तथा सभी स्त्रोतों से प्राप्त अनुमानित परिवारिक आमदनी का बयौरा लिया जाएगा। कॉमन सर्विस सेंटर सुपरवाइजर सांख्यिकी एवं योजना अधिकारी इसमें सहयोग करेंगे। सर्वे टीम दिनभर परिवारों के पास जाकर आर्थिक गणना का डाटा एकत्र कर सायं को सीएससी के सुपरवाइजर को सौपेंगे। सुपरवाइजर एकत्र किए गए डाटा को अपनी देखरेख में तैयार कर जिला स्तर पर सांख्यिकी या प्लानिग अधिकारी के कार्यालय में भेजेंगे। जहां से डाटा प्रदेश व भारत सरकार को जाएगा।

Posted By: Jagran

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