यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Apr 24, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
महंगाई की मार : होटल-रेस्टोरेंट व्यवसाय में लागत बढ़ी, ग्राहक घटे
महंगाई ने ऐसा असर डाला है कि होटल-रेस्टोरेंट के व्यवसाय से लेकर आइसक्रीम बाजार तक सभी प्रभावित हैं।

जागरण संवाददाता, बहादुरगढ़ :
घर से काम पर और फिर काम से लौटकर घर। जिदगी की इस दौड़ धूप पर तो महंगाई का साया है ही, लेकिन इससे इतर परिवार संग कभी-कभी होटल-रेस्टोरेंट में जाकर खाना-पीना, किसी मौके पर पार्टी करना और नहीं तो बाजार में आइसक्रीम का ही आनंद लेना भी अब लोग भूलने पर मजबूर हो रहे हैं। महंगाई ने ऐसा असर डाला है कि होटल-रेस्टोरेंट के व्यवसाय से लेकर आइसक्रीम बाजार तक सभी प्रभावित हैं। पहले ही कोरोना के कारण यह व्यवसाय भी सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले व्यवसायों में से एक रहा है, लेकिन अब कुछ दिन शांत हुए तो महंगाई के कारण इस व्यवसाय में लागत और बढ़ गई और ग्राहक कम हो गए। ऐसे में नुकसान दोहरा हो रहा है। अब चौथी लहर की आहट भी चिता बढ़ा रही है। जाहिर है कि ऐसे में इस व्यवसाय की कमर टूट रही है। खाद्य पदार्थों की महंगाई से बढ़ी लागत :
दरअसल खाद्य पदार्थों की कीमतों में जो बढ़ोतरी हुई, उसका असर होटल-रेस्टोरेंट पर भी है। राशन, तेल, दूध, सब्जी, मसाले, गैस सभी कुछ महंगा है तो जाहिर है कि होटल-रेस्टोरेंट में तैयार होने वाला खाना भी पहले की लागत में तैयार नहीं हो पा रहा है। खाने की चीजों पर पांच प्रतिशत तो रूम पर 12 प्रतिशत जीएसटी है। खाना तैयार करने के लिए जितनी भी चीजें चाहिए, उन सभी पर टैक्स अलग-अलग है। खाद्य पदार्थाें की कीमतें बढ़ने से घर की रसोई का जब बजट बिगड़ा हुआ है तो जाहिर है कि होटल-रेस्टोरेंट को राहत कैसे मिले। लागत ज्यादा होने पर भी अधिकतर चीजों की कीमत स्थिर, फिर भी ग्राहक हो रहे कम :
दो साल से कोरोना की मार झेल रहे होटल-रेस्टोरेंट में अब लागत बढ़ गई है, इसके बावजूद वहां पर अधिकतर चीजों की कीमतों को किसी तरह स्थिर रखा हुआ है ताकि कम मुनाफे के साथ ही सही, लेकिन यह व्यवस्था चलता रहे। मगर जब आम आदमी की जेब घर में ही हल्की हो रही है तो होटल-रेस्टारेंट में जाने की किसे सूझे। इसी कारण ग्राहक कम हैं। होटल संचालक सतपाल के मुताबिक कुछ चीजों पर टैक्स कम हो तो बात बने। खाद्य पदार्थाें की कीमतों को भी नियंत्रित करने की आवश्यकता है। अन्य होटल संचालक राजेंद्र सिंह कहते हैं कि इस समय अगर होटल-रेस्टोरेंट में चुनिदा चीजों की कीमतें ही बढ़ाई गई हैं, फिर भी ग्राहक कम हैं। कोरोना के दो साल के अंदर तो इस व्यवसाय पर मार पड़ी ही थी। अब महंगाई से कामकाज चौपट हो रहा है। दूध की बढ़ी कीमतें आइसक्रीम बाजार को कर रही प्रभावित :
हाल ही में दूध की कीमतें बढ़ी हैं। इससे आइसक्रीम बाजार प्रभावित हुआ है। लागत तो बढ़ ही चुकी है, लेकिन अब रेट बढ़ाने के बजाय वेट घटाने में भी इस व्यवसाय को दिक्कत आ रही है। रेट बढ़ाएं तो अब जितनी बिक्री है वह और कम हो जाएगी। वेट घटाने के लिए आइसक्रीम फैक्ट्रियों में पूरे सांचे ही बदलने पड़ेंगे। फैक्ट्री मालिक रमन कुमार के अनुसार इस समय दोहरा नुकसान हो रहा है। लागत बढ़ गई और ग्राहक कम हो गए हैं, मगर करें तो क्या।
