जागरण संवाददाता, बहादुरगढ़:

वर्ष 2018-19 में सफाई व्यवस्था पर पूरे 12 करोड़ खर्च करके भी म्हारा शहर स्वच्छता के मामले में पिछड़ गया। वर्ष 2018 में जहां बहादुरगढ़ का रैंक 209वां था तो वर्ष 2019 के सर्वे में शहर 19 रैंक पिछड़कर 228वीं रैंक पर जा पहुंचा। प्रदेश में बहादुरगढ़ का पिछले साल नौंवा रैंक था तो इस बार शहर फिसलकर 12वें पायदान पर जा पहुंचा। बहादुरगढ़ को जनवरी माह में हुए सर्वे में 5 हजार में से 2154.15 अंक ही मिले हैं। नाइट स्वीपिग, डोर टू डोर कूड़ा उठान व कूड़े का उचित प्रबंधन न होने की वजह से बहादुरगढ़ बुरी तरह पिछड़ गया। कूड़ा उठाने वाली गाड़ियों में जीपीएस सिस्टम न होने की वजह से शहर स्वच्छता के मामले में काफी पिछड़ गया। नगर परिषद की ओर से सफाई व्यवस्था पर भले ही 12 करोड़ खर्च किए गए लेकिन सर्विस लेवल के अंकों की बात करें तो हम इतनी राशि खर्च करने के बाद भी 1250 अंकों में से सिर्फ 125.35 अंक ही हासिल कर सके। कुछ ऐसी ही कहानी ओडीएफ यानी खुले में शौच की है। प्रशासन ने बहादुरगढ़ को भले ही खुले में शौच से मुक्त कर दिया हो लेकिन सर्वे ने इसकी पूरी पोल खोल कर रख दी है। ओडीएफ सर्टिफिकेशन के 1250 अंकों में से बहादुरगढ़ को मात्र 200 अंक ही मिले हैं। गौरतलब है कि 2018 में बहादुरगढ़ का रैंक 209वां था और 2017 में शहर का रैंक 353 था। लोगों की फीडबैक व डायरेक्ट आब्जर्वेशन की वजह से मिले अच्छे अंक:

बहादुरगढ़ शहर को अगर 228वां रैंक भी मिला है तो सिर्फ सिटीजन फीडबैक व डायरेक्ट आब्जर्वेशन में मिले अंकों के आधार पर मिला है। सर्विस लेवल व सर्टिफिकेशन के मामले में शहर बुरी तरह पिछड़ा हैं। मगर डायरेक्ट आब्जर्वेशन और सिटीजन फीडबैक में अच्छे नंबर मिले हैं। सर्वे टीम ने भले ही डायरेक्ट आब्जर्वेशन के दौरान फोटो अपलोड कर शहर की सफाई व्यवस्था का उल्लेख किया लेकिन इस दौरान कई स्थानों पर सफाई व्यवस्था होने और लोगों की ओर से सफाई को लेकर दिए गए अच्छे फीडबैक ने शहर की पूरी लाज रखी है। अगर इन दोनों बिदुओं पर भी हम पिछड़ जाते तो शहर का रैंक काफी पिछड़ जाता। ---सर्वे में थे ये चार बिदु, मिलने थे पांच हजार अंक, मगर मिले 2154.15 अंक वर्ष 2019 के इस स्वच्छता सर्वेक्षण में पांच हजार अंक निर्धारित किए गए थे। इन अंकों के आधार पर ही शहरों की रैंकिग तय हुई है। पांच हजार अंकों में से जिस शहर जितने अंक लिए हैं उसी आधार पर उसे रैंक दिया गया है। ये पांच हजार अंक चार बिदुओं पर आधारित थे। एक बिदु के 1250 अंक थे। इन पांच हजार अंकों में से बहादुरगढ़ शहर को 2154.15 अंक ही मिले। किस बिदु पर कितने अंक मिले:

बिदु अधिकतम अंक प्राप्तांक

डायरेक्ट आब्जर्वेशन 1250 920

सिटीजन फीडबैक 1250 908.81

सर्विस लेवल प्रोग्रेस 1250 125.35

सर्टिफिकेशन 1250 200 ---सर्वे टीम ने इन वीक प्वाइंटस के लिए थे फोटो, जिसकी वजह से पिछड़ा शहर - रोजाना सुबह-सवेरे जगह-जगह कचरे के ढेर नजर आना

- सड़कों के डिवाइडर के दोनों तरफ नियमित रूप से मिट्टी का उठान न होना

- शहर के बाजारों में सार्वजनिक शौचालयों का न होना

- शहर में हरियाली का अभाव

- शहर में डोर टू डोर कूड़े का उठान न होना

- शहर में नाइट स्वीपिग का न होना

- शहर के कई हिस्सों में हर रोज सफाई का न होना

- शहर में पर्याप्त संख्या में घरों में शौचालयों का न होना।

- शहर में सोलिड वेस्ट मैनेजमेंट का न होना

- कूड़े का वर्गीकरण न होना

- निर्माण सामग्री का खुले में पड़ा होना

- नालियों की निकासी व्यवस्था ठीक न होना अब स्थिति सुधारने के लिए होंगे 20 करोड़ खर्च, ये काम करेगी नगर परिषद स्वच्छता रैंकिग में पिछड़ने के बाद नगर परिषद की ओर से अब शहर की सफाई व्यवस्था पर पूरा ध्यान किया जाएगा। सोलिड वेस्ट मैनेजमेंट का टेंडर रोहतक में हो गया है। ऐसे में बहादुरगढ़ के सारे कूड़े का प्रबंधन रोहतक में होगा। यहां पड़े कूड़े रोहतक ले जाया जाएगा जहां पर खाद बनाई जाएगी। इसके अलावा करीब 20 करोड़ रुपये की राशि खर्च करके तीन टेंडर किए गए हैं। जिनमें नाइट स्वीपिग के अलावा घर-घर से कूड़ा उठाने और सेग्रीकेशन भी शामिल है। ---शहर में सफाई व्यवस्था पर पूरी तरह उनका फोकस है। पिछले साल 4 हजार के आसपास शहरों में सर्वे था तो इस बार शहरों की संख्या ज्यादा थी। हम नगर परिषदों के मामले में प्रदेश में अब भी दूसरे नंबर पर हैं। इसके अलावा कूड़े का उचित प्रबंधन बहादुरगढ़ ही नहीं किसी भी नगर परिषद में नहीं है। ऐसे में सबसे ज्यादा अंक इसी क्षेत्र में कटे हैं। इस साल सफाई व्यवस्था पर पूरा ध्यान दिया जाएगा।

----शीला राठी, चेयरपर्सन, नगर परिषद, बहादुरगढ़।

Posted By: Jagran

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