सुरेश सैनी, अंबाला शहर

रोडवेज बसों में आरक्षित सीट लागू करके भूल गया। इसके पीछे दफ्तरों में बैठे बाबुओं की लापरवाही है। इन्होंने कभी दफ्तरों से बाहर निकलकर नहीं देखा। इसी लापरवाही का यात्रियों को खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। दरअसल, बसों में 15 आरक्षित महिला सीट हैं इनपर अधिकतर पुरुष यात्री बैठकर सफर करते हुए देखे जा सकते हैं। चूंकि अधिकतर महिला यात्रियों को अपनी आरक्षित सीट का पता नहीं होता, जिससे वह सीट से वंचित रह जाती है। दैनिक जागरण ने रोडवेज बसों में आरक्षित सीट की पड़ताल के लिए कई बसों को चेक किया तो इस दोरान कई बसों में महिलाओं की आरक्षित सीटों पर पुरुष यात्री बैठे मिले। यह नजारा एक दिन नहीं बल्कि रोजाना देखने को मिलेगा। । हालांकि विभागीय अधिकारी यात्रियों को पूरी सुविधा देने का दावा कर रहे, कितु हकीकत इनसे कहीं दूर है। बस में ये सीटें होती हैं आरक्षित

हरियाणा रोडवेज की बसों में सीट नंबर 7, 8, 9, 12, 13, 14, 15, 16, 17, 18, 19, 20, 21, 25 और 26 महिलाओं के लिए आरक्षित हैं। इन पर यदि कोई अन्य महिला नहीं बैठी है तो कोई भी महिला इन सीटों पर बैठे पुरुष यात्री से दूसरी सीट पर बैठने के लिए कह सकती है। इसके अलावा वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांगों, स्वतंत्रता सेनानी के लिए 4,5,6 नंबर सीट और 41 नंबर सीट कंडक्टर के लिए रोडवेज की बसों में आरक्षित की गई। पहले यह थी परिचालक के लिए सीट

रोडवेज बसों में पहले परिचालकों के लिए चालक के साथ वाली सीट रिजर्व थी। इसे स्टाफ सीट कहा जाता है और परिचालक इसी पर बैठते थे। कुछ समय पहले सीट नंबर 52 आरक्षित की थी। यह सिस्टम कुछ ही दिन चला। ऐसे में कंडक्टर फिर से ड्राइवर की बगल वाली सीट पर बैठना शुरू कर दिया। हालांकि चेकिग के दौरान एक हजार रुपये का जुर्माना रखा गया था। फिर भी कंडक्टर उसी सीट पर बैठकर यात्रा करते रहे। अब करीब दो माह पूर्व ही तबदीली करते हुए परिचालक की 41 नंबर सीट रिजर्व की गई। इस सीट पर कंडक्टर को टिकट काटने के बाद बैठना होता है। वर्जन

ऐसी बात नहीं है। निर्धारित सीटों पर ही महिलाओं को सीट दी जाती है तथा टिकट काटने के बाद परिचालक को निर्धारित सीट पर बैठने के आदेश हैं। इस संबंध में अभी तक कोई शिकायत नहीं आई है। अगर इस तरह की कोई शिकायत आती है तो कार्रवाई की जाएगी।

-संजय रावल, कार्यकारी ट्रैफिक मैनेजर।

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