पवन पासी, अंबाला शहर

गांव हो या शहर मूलभूत जरूरतें हर जगह मुद्दा है। गली, नालियां, पेयजल, शिक्षा एवं चिकित्सा में सुधार सबकी जरूरत है। वहीं, इस मामले में गांव पंजोखरा साहिब की स्थिति हटकर नजर आ रही है। ताज्जुब यह है कि स्वास्थ्य मंत्री के गोद लिए करीब छह हजार आबादी वाले इस गांव में 7 श्मशान घाट हैं। लगभग हर समुदाय का अपना श्मशान घाट है। इसके बावजूद नए श्मशान घाट बनाने अथवा विस्तार के लिए झगड़े तकरार सामने आ रहे हैं। आलम यह है इसी माह गांव के तालाब पर कब्जा कर श्मशान भूमि का विस्तार किए जाने का एक मामला पंजोखरा थाना में भी पहुंच गया था। अभी भी यह मामला विचाराधीन है। देखा जाए तो गांव के विकास के लिए आई विकास राशि श्मशान घाटों पर खर्च हो रही है। हालांकि, ग्राम पंचायत खुद चाहती है कि यहां आबादी के हिसाब से महज दो ही श्मशान भूमि रहें लेकिन इस मुद्दे पर गांव में सहमति नहीं बन रही है।

हर गांव की तरह गांव पंजोखरा साहिब में भी विभिन्न धर्म एवं जातियों के लोग हैं। यह बात अलग है कि श्मशान भूमि उस लिहाज से कहीं ज्यादा हैं। जानकारी मुताबिक यहां एक सांझे श्मशान घाट सहित ब्राह्मण, हरिजन, रामदासिये, रविदासियों, जांगड़ा धीमान व मसंद पट्टी के लोगों का अलग अलग श्मशान घाट है। इसके अलावा एक जगीरदार बिरादरी का भी था। हालांकि, ग्राम पंचायत के प्रयासों से इस बिरादरी से जुड़े लोगों ने श्मशान की भूमि लाइब्रेरी को देने पर सहमति जता दी है। इस लाइब्रेरी के लिए स्वास्थ्य मंत्री ने 10 लाख का बजट भी मंजूर कर दिया है।

श्मशान भूमि पर लाखों रुपये की विकास राशि हो चुकी खर्च

गांव में करीब पौना एकड़ में जो सांझा श्मशान घाट है उस पर करीब आठ लाख रुपये खर्च किए जा चुके हैं। इसके अलावा मसंद पट्टी के श्मशान घाट पर करीब अढ़ाई लाख, रामदासिया पर 4 लाख, हरिजन बिरादरी के श्मशान घाट में पहले से बने शेड व एक लाख खर्च कर चुके हैं। हालांकि, अब हरिजन बिरादरी के श्मशान घाट के स्थान पर 20 लाख रुपये से आंबेडकर भवन बनाए जाने का प्रस्ताव ग्राम पंचायत दे चुकी है। इस पर प्रस्ताव पर सहमति नहीं बनी है।

लोग मरने मारने पर उतारू

गांव के सरपंच एवं अधिवक्ता अमरजीत ¨सह के मुताबिक वह चाहते हैं गांव में जाति विशेष के स्थान पर सिर्फ दो श्मशान भूमि रहें जो आबादी के हिसाब से सही भी है। इसके लिए उन्होंने अगस्त माह में गांव के लोगों की बैठक भी बुलाई थी। हालांकि, बैठक से पहले ही हर जाति ने अपनी अपनी बैठकें करना शुरू कर दिया। जिससे बात नहीं बन पाई। आलम यह है कि श्मशान भूमि के विस्तार को लेकर जोहड़ व पास की भूमि कब्जाने का एक मामला थाने में विचाराधीन है। इस मामले में उन्हें धमकियां मिल रही हैं और लोग मरने मारने पर उतारू हैं। बीडीपीओ ने खुद कार्रवाई को लेकर थाने में शिकायत दी हुई है।

Posted By: Jagran

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