मनमर्जी से आंखों की लेसिक सर्जरी कराई तो नहीं मिलेगी वैकल्पिक नौकरी, रेलवे ने बंद किया शॉर्टकट; नए नियम लागू
रेलवे बोर्ड ने कर्मचारियों द्वारा अपनी मर्जी से कराई जाने वाली लेसिक सर्जरी पर सख्त नियम लागू किए हैं।

आंखों की लेसिस सर्जरी मनमर्जी से नहीं करा सकेंगे (जागरण फोटो)
HighLights
स्वैच्छिक लेसिक सर्जरी पर अब नहीं मिलेंगे विशेष लाभ
मेडिकल अथॉरिटी की सलाह अनिवार्य, अन्यथा स्वैच्छिक स्थानांतरण
रेलवे परिचालन सुरक्षा और नियमों का सख्त अनुपालन सुनिश्चित
दीपक बहल, अंबाला। रेलवे में अपनी मेडिकल श्रेणी और सेवा से जुड़े विशेष लाभ हासिल करने के लिए अब कर्मचारी अपनी मर्जी से आंखों की लेसिक सर्जरी नहीं करवा सकेंगे।
रेलवे बोर्ड ने ऐसे कर्मचारियों के संबंध में सख्त फैसला लेते हुए स्पष्ट कर दिया है कि यदि कोई कर्मचारी रेलवे की मेडिकल अथारिटी की सलाह के बिना स्वेच्छा से लेसिक सर्जरी करवाता है और इसके बाद अपनी मौजूदा मेडिकल श्रेणी में अनफिट घोषित हो जाता है तो उसे चिकित्सकीय आधार पर अयोग्य होने के कारण मिलने वाले वैकल्पिक रोजगार के लाभ नहीं दिए जाएंगे।
ऐसे कर्मचारी को अपने अनुरोध पर स्थानांतरित कर्मचारी माना जाएगा और उसी के अनुरूप उसके मामले का निपटारा होगा। इसी को लेकर रेलवे बोर्ड ने पत्र जारी किया है।
आदेश का उद्देश्य स्वेच्छा से कराई गई सर्जरी के बाद मेडिकल श्रेणी में बदलाव का लाभ लेकर वैकल्पिक पद और अन्य सेवा सुविधाएं हासिल करने की प्रवृत्ति पर रोक लगाना है।
मेडिकल अथॉरिटी की सलाह के बिना सर्जरी पर आपत्ति
रेलवे बोर्ड के संज्ञान में ऐसे मामले आए थे, जिनमें कर्मचारी रेलवे की अधिकृत मेडिकल अथारिटी से परामर्श लिए बिना अपनी इच्छा से लेसिक सर्जरी करवा रहे थे।
इसके बाद यदि वे अपनी मौजूदा मेडिकल श्रेणी के लिए अनुपयुक्त पाए जाते हैं तो चिकित्सकीय रूप से अयोग्य कर्मचारियों को मिलने वाले वैकल्पिक रोजगार और अन्य सेवा लाभों की मांग करते हैं।
रेलवे बोर्ड ने इस स्थिति को गंभीरता से लेते हुए माना है कि ट्रेन संचालन से जुड़े पदों पर कर्मचारियों की आंखों की दृष्टि और निर्धारित मेडिकल मानकों का सीधा संबंध रेल परिचालन की सुरक्षा से है। ऐसे में व्यक्तिगत निर्णय के आधार पर कराई गई सर्जरी के बाद उत्पन्न स्थिति को सामान्य मेडिकल डिकैटेगराइजेशन के मामलों के समान नहीं माना जा सकता।
पैरा 1311(1) के तहत होगा मामलों का निपटारा
रेलवे बोर्ड के नए निर्देश के अनुसार, रेलवे मेडिकल अथॉरिटी की सलाह के बिना स्वेच्छा से लेसिक सर्जरी कराने वाले कर्मचारियों के मामलों का निपटारा भारतीय रेलवे स्थापना नियमावली के वॉल्यूम-1 के पैरा 1311(1) के तहत किया जाएगा। ऐसे कर्मचारियों को अपने अनुरोध पर स्थानांतरित हुआ कर्मचारी माना जाएगा।
इसका सीधा अर्थ यह है कि सर्जरी के बाद मौजूदा मेडिकल श्रेणी में अनफिट पाए जाने पर वे चिकित्सकीय रूप से अयोग्य घोषित किए गए कर्मचारियों को मिलने वाली विशेष सुविधाओं का दावा नहीं कर सकेंगे।
वैकल्पिक नौकरी और विशेष सेवा लाभों पर भी असर
इस फैसले का सबसे बड़ा असर उन कर्मचारियों पर पड़ेगा, जो मेडिकल श्रेणी से बाहर होने के बाद वैकल्पिक रोजगार की सुविधा और सेवा से जुड़े दूसरे लाभ हासिल करना चाहते हैं।
सामान्य परिस्थितियों में मेडिकल डिकैटेगराइजेशन के मामलों में आइआरईएम के पैरा 1301, 1307 और 1308 के तहत विशेष प्राविधान लागू होते हैं।
इनमें निर्धारित शर्तों के अनुसार वैकल्पिक रोजगार और अन्य सेवा संरक्षण से जुड़े लाभ शामिल हैं। लेकिन रेलवे बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि मेडिकल अथॉरिटी की सलाह के बिना स्वेच्छा से लेसिक सर्जरी कराने वाले कर्मचारियों को इन प्राविधानों का लाभ नहीं मिलेगा।
उनके मामलों में अपने अनुरोध पर स्थानांतरण के नियम लागू होंगे। यानी कर्मचारी केवल अपनी इच्छा से सर्जरी करवाकर बाद में मेडिकल श्रेणी से बाहर होने के आधार पर वैकल्पिक पद, समान वेतन अथवा रनिंग अलाउंस से जुड़े विशेष लाभों का दावा नहीं कर सकेंगे। हालांकि, वास्तविक लाभ और सेवा शर्तें संबंधित नियमों के अनुसार ही तय होंगी।
पहले निपटाए जा चुके मामलों पर नहीं पड़ेगा असर
रेलवे बोर्ड ने आदेश में पुराने मामलों को लेकर भी स्थिति स्पष्ट कर दी है। जिन मामलों का पहले ही निपटारा किया जा चुका है, उन्हें दोबारा खोलने की आवश्यकता नहीं होगी। यानी नए निर्देश के तहत पहले से तय मामलों की समीक्षा नहीं की जाएगी।
रेलवे बोर्ड के इस फैसले को ट्रेन संचालन की सुरक्षा और कर्मचारियों की मेडिकल फिटनेस से जुड़े नियमों के सख्त अनुपालन की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
इससे रेलवे कर्मचारियों के लिए यह स्पष्ट संदेश है कि मेडिकल श्रेणी से जुड़ी सर्जरी या उपचार का निर्णय लेने से पहले अधिकृत रेलवे मेडिकल अथॉरिटी की सलाह और निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना जरूरी है।
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