हरियाणा में डाक विभाग का अजब-गजब कारनामा, रद की गई परीक्षा का ही निकाल दिया रिजल्ट; 23 कर्मचारी किए बाहर
हरियाणा डाक विभाग में पदोन्नति परीक्षाओं को लेकर गहरा विवाद है, जहां पेपर लीक, रद हुई परीक्षाएं और परिणामों में देरी ने कर्मचारियों को परेशान कर रखा है।

तीन पदोन्नति परीक्षाएं, परिणाम पोस्टल बॉक्स में बंद।
HighLights
डाक विभाग में पदोन्नति परीक्षाओं में अनियमितताएं सामने आईं
पेपर लीक के कारण कई परीक्षाएं रद हुईं, परिणाम अटके
कर्मचारी बार-बार परीक्षा दे रहे, पर परिणाम नहीं मिल रहा
दीपक बहल, अंबाला। हरियाणा डाक विभाग में पदोन्नति पाने के लिए परीक्षा दी, लेकिन नतीजे ने कर्मचारियों को मंजिल के बजाय सवालों के बीच खड़ा कर दिया।
मल्टी टास्किंग स्टाफ (एमटीएस) एवं पोस्टमैन से पोस्टल असिस्टेंट पद पर पदोन्नति के लिए 17 अगस्त 2025 को परीक्षा हुई। परीक्षा के अगले दिन 18 अगस्त को उत्तर कुंजी जारी हुई और चार सितंबर को सूची भी जारी कर दी गई। 14 सितंबर को कर्मचारियों को अंबाला बुलाया गया, लेकिन टेस्ट होल्ड कर दिया गया।
बाद में पेपर लीक और अन्य कारणों का हवाला देते हुए परीक्षा रद कर दी गई। परीक्षा रद होने के बाद विभाग ने 11 जनवरी 2026 से नए सिरे से पदोन्नति परीक्षा की प्रक्रिया शुरू की। प्रदेशभर से कर्मचारी फिर परीक्षा देने अंबाला पहुंचे।
इसी बीच पुरानी परीक्षा का मामला फिर सामने आ गया। 16 जून 2026 को 17 अगस्त 2025 वाली परीक्षा का परिणाम जारी कर दिया गया। इसमें 23 ऐसे कर्मियों के नाम परिणाम से हटा दिए गए, जिनके बारे में विभागीय स्तर पर माना गया कि उन्हें पेपर लीक से लाभ मिल सकता था। जिनके बारे में विभागीय स्तर पर माना गया कि उन्हें पेपर लीक से लाभ मिल सकता था।
इससे विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। अब मामला दिल्ली मुख्यालय तक पहुंच चुका है लेकिन अफसरों की जिम्मेदारी तय करने से अफसर बच रहे हैं। प्रदेशभर से कर्मचारी अंबाला में परीक्षा देने पहुंचते हैं, लेकिन पदोन्नति के बजाय उन्हें बार-बार परीक्षा, रद होने और परिणाम के इंतजार की स्थिति से गुजरना पड़ रहा है। इस पूरी प्रक्रिया के बीच पुरानी परीक्षा का परिणाम जारी होने से मामला और उलझ गया जो अभी तक जारी नहीं किया गया।
जब पेपर लीक सहित अन्य कारणों से परीक्षा रद कर दी गई थी तो बाद में उसी परीक्षा का परिणाम जारी करने का आधार कोर्ट का फैसला माना गया। इन 23 कर्मियों को लेकर यह बात सामने आई कि उन्हें कथित पेपर लीक से लाभ मिलने की आशंका थी।
ऐसे में सवाल यह भी है कि क्या इनके संबंध में अलग से जांच या सत्यापन किया गया था? यदि किया गया तो उसका निष्कर्ष क्या रहा? और यदि पेपर लीक की वजह से केवल इन्हीं 23 को परिणाम से बाहर रखा गया तो फिर पूरी परीक्षा को रद करने की जरूरत क्यों पड़ी थी?
नई परीक्षा दी, उसका परिणाम फिर अटका
दो अगस्त 2026 को एमटीएस एवं पोस्टमैन से पोस्टर असिस्टेंट की परीक्षा फिर से कराई गई। इसमें भी प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से कर्मचारी शामिल हुए। लेकिन इसका परिणाम अभी तक जारी नहीं किया गया है।
अब कर्मचारी यही जानना चाहते हैं कि जिस परीक्षा को देकर वे पदोन्नति की उम्मीद लगाए बैठे हैं, उसका परिणाम कब आएगा? कहीं फिर से पेपर, परीक्षा और परिणाम को लेकर कोई नया विवाद तो नहीं खड़ा होगा।
31 अगस्त की जीडीएस परीक्षा भी इसी राह पर
पदोन्नति परीक्षाओं का यह सिलसिला केवल एमटीएस तक सीमित नहीं है। ग्रामीण डाक सेवकों (जीडीएस) को पोस्टमैन पद पर पदोन्नति देने के लिए 31 अगस्त 2025 को परीक्षा हुई थी। इसका परिणाम आने से पहले ही 27 फरवरी 2026 को परीक्षा रद कर दी गई। विभाग ने 26 अप्रैल 2026 को दोबारा परीक्षा कराई, लेकिन उसका परिणाम भी अब तक जारी नहीं किया गया है।
यानी एक तरफ एमटीएस की परीक्षा में पेपर लीक के बाद परीक्षा रद, फिर उसी परीक्षा का परिणाम जारी और 23 कर्मियों के नाम रोकने का मामला है। दूसरी तरफ जीडीएस की परीक्षा रद होने के बाद दोबारा परीक्षा कराए जाने के बावजूद परिणाम का इंतजार है।
