अंबाला [दीपक बहल]। रेल मंत्रालय की तबादला नीति को लागू करवाने में महाप्रबंधक नाकाम साबित हो रहे हैं। इसको लेकर रेल मंत्रालय अब सख्त हो गया है। मंत्रालय के अनुसार पदोन्नति होने के बाद रिलीव न होने वाले अधिकारी की पदोन्नति एक साल तक रोक दी जाएगी। इस संबंध में रेलवे बोर्ड के 29 अगस्त को जारी पत्र में सभी जोन के महाप्रबंधकों को आदेश जारी कर दिए हैं। इस पत्र की प्रतिलिपि दैनिक जागरण के पास है।

पत्र में कहा गया है कि बोर्ड के संज्ञान में आया है कि अधिकारी तबादला होने के बाद रिलीव नहीं होते। वे कुछ न कुछ बहाना बनाकर तबादला रुकवा लेते हैं। अब वे पदोन्नति होने के बाद दूसरे मंडल या जोन में नहीं गए तो उनकी पदोन्नति एक साल के लिए रोकी जा सकती है। इन आदेशों में 2015 तबादला नीति का भी जिक्र किया गया है।

वेतन बढ़ जाता है, इसलिए रुकवा लेते हैं तबादला

सूत्रों का कहना है कि प्रमोशन से पहले ही वेतन में बढ़ोतरी हो जाती है, लेकिन पदोन्नति का आदेश आने में समय लग जाता है। वेतन बढ़ने के कुछ समय बाद अधिकारी का तबादला होता है तो वे इसे जुगाड़ लगाकर रद करा लेते हैं।

चार साल में हो जाना चाहिए तबादला

बता दें कि केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) ने संवेदनशील पदों पर तैनात कर्मचारियोंं व अधिकारियों के तबादले की पॉलिसी बना रखी है। इसके मुताबिक, अधिकारी का चार साल में तबादला होना चाहिए। मगर ऐसा नहीं हो रहा। उत्तर रेलवे के मुख्य वाणिज्य प्रबंधक ने एसीएम रैंक के एक अधिकारी का दो बार तबादला भी हुआ, लेकिन वह रिलीव नहीं हुए। पिछले दिनों अंबाला आए रेलवे बोर्ड के चेयरमैन अश्विनी लोहानी और उत्तर रेलवे के महाप्रबंधक विश्वेस चौबे से तबादला नीति को लेकर पूछा भी गया था। इसके बावजूद किसी अधिकारी का तबादला नहीं हुआ।

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Posted By: Kamlesh Bhatt