जागरण संवाददाता, अंबाला शहर

शहर में नियमों को ताक पर रख बिल्डिंग खड़ी की जा रही है। हुडा सेक्टर और हाउसिग बोर्ड में तीन मंजिला तक की अनुमति है, लेकिन यहां पर मनमर्जी से चार मंजिला तक इमारतें खड़ी की जा रही हैं। इसके अलावा घरों में पार्किंग का भी इंतजाम नहीं किया जा रहा है। मकान मालिक घरों के बाहर ही अपनी गाड़ियां खड़ी कर रहे हैं। हुडा अधिकारियों की सुस्ती की वजह से बिना अनुमति निर्माण को लगातार बढ़ावा मिल रहा है। ज्यादातर व्यावसायिक और आवासीय भवन ऐसे बन रहे हैं। इनके मकान मालिकों के पास किसी की अनुमति नहीं है। इसके बाद भी बेसमेंट से लेकर चार मंजिल तक निर्माण किया जा रहा है।

बता दें कि सेक्टर में नियमों के मुताबिक तीन मंजिल से अधिक ऊंचाई के भवन निर्माण की हुडा अनुमति नहीं देता, लेकिन शहर के सेक्टर में ऐसी कई बिल्डिंग हैं जो बिना अनुमति के चार मंजिला तक बनने का काम चल रह है। खास बात यह है कि शहर में ऐसा कहीं दूर नहीं, बल्कि हुडा विभाग के कार्यालय के कुछ कदमां दूरी पर है। उसके बावजूद अधिकारियों की नींद नहीं खुल रही। सुरक्षा के नहीं हैं उपाय

आग पर काबू पाने के लिए ऐसी सामग्री या तकनीक नहीं है। इससे समय आने पर चार या पांच मंजिल तक पहुंचकर आग या किसी अन्य घटना के दौरान इतनी ऊंचाई तक पहुंचा जा सके। शहर में आग की ऐसी घटनाएं हो चुकी हैं। इनमें आग पर काबू पाने के लिए फायर ब्रिगेड को दिक्कत झेलनी पड़ी है। तीन मंजिला से अधिक नहीं बना सकते इमारत

शहर में तीन मंजिला से अधिक ऊंची बिल्डिंग के निर्माण के लिए भवन मालिक को एनओसी और अनुमति लेना होती है। इससे कम ऊंचाई के भवन के लिए हुडा से अनुमति लेते नक्शा पास कराना होता है, लेकिन विभाग को सूचना तक नहीं दी जाती और चार मंजिला तक इमारत खड़ी कर दी जाती है। प्लॉट खाली छोड़ने के बजाय किये जा रहे हैं पूरे कवर

हुडा और हाउसिग बोर्ड में मकान के लिए जितना एरिया प्लाट का होता है। उसमें से कुछ एरिया खुला रखना होता है। मान लो डेढ सौ गज का प्लॉट है तो उसमें 66 प्रतिशत तक एरिया ही कवर करना पड़ता है। बाकी एरिया खाली छोड़ना पड़ता है। इतना ही नहीं खाली एरिया में हरियाली भी रखनी होती है। इसके अलावा अगर गाड़ी है तो उसके लिये पार्किंग का भी इंतजाम करना पड़ता है।

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