हरीश कोचर, अंबाला

छावनी के नागरिक अस्पताल में पिछले कुछ दिनों से मरीजों की ¨जदगी से खिलवाड़ किया जा रहा है। बिना नेफरोलाजिस्ट डॉक्टर के ही मरीजों का डायलिसिस किया जा रहा है। डायलिसिस ¨वग में कार्यरत एक डॉक्टर करीब तीन-चार महीने पहले अपनी नौकरी से रिजाइन करके चला गया। उसकी जगह दूसरा डॉक्टर बुलाया लेकिन करीब 15 दिनों से वह भी बिना कुछ बताए चला गया। ऐसे में अब कई दिनों से हृदय रोग ¨वग से एक डॉक्टर दिन में केवल पांच से दस मिनट के लिए ही डायलिसिस ¨वग में औपचारिक तौर पर ड्यूटी देने के लिए आता है। हालात यह है कि डॉक्टर की गैरमौजूदगी में यहां तकनीकी स्टाफ द्वारा मरीजों का डायलिसिस किया जा रहा है जबकि इस दौरान में डॉक्टर का होना काफी अधिक महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में अगर किसी मरीज के साथ कोई अनहोनी हो जाती है तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी, इसकी भी किसी को परवाह नहीं है।

------------------------

पीपीपी मोड़ पर चलाई जा रही ¨वग

दरअसल छावनी के नागरिक अस्पताल में बीती जुलाई को महज एक साल पहले ही डीसीडीसी किडनी केयर प्राइवेट लिमिटेड दिल्ली के सहयोग से पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मोड पर डायलिसिस सेंटर शुरू किया था। इसमें मरीजों को बहुत कम दामों पर डायलिसिस किया जाता है। लेकिन मरीजों की संख्या बढ़ने के साथ ही पहले चरण में यहां आठ मशीनों से शुरू किए गए सेंटर में अब एक समय में कुल 13 मरीजों का डायलिसिस किया जाता है।

----------------------

पहले भी हो चुकी मरीजों की मौत

सितंबर 2017 में भी डॉक्टर की लापरवाही के कारण यहां दो मरीजों की मौत हो गई थी। पहले मामले में हिमाचल के कांगड़ा जिला स्थित जय¨सहपुर निवासी गुरदेव(40) छावनी के गोल्डन पार्क महेशनगर में किराये पर रहते थे। उन्हें अस्पताल में लाया गया तो डॉक्टर ने गुरदेव की हालत गंभीर होने के बावजूद डायलिसिस शुरू कर दिया, जबकि उसका बीपी भी सामान्य नहीं था। इसी दौरान उसकी मौत हो गई थी। दूसरे मामले में डिफेंस इनक्लेव नजदीक आनंद नगर छावनी निवासी संजय कुमार(40) को परिजन अस्पताल में डायलिसिस करवाने के लिए पहुंचे। मरीज की हालत अधिक खराब होने के बावजूद डायलिसिस शुरू कर दिया। मरीज को सांस लेने में दिक्कत हुई और उसने दम तोड़ दिया था। दैनिक जागरण ने इस मामले को प्रमुखता से प्रकाशित किया था जिसके बाद संबंधित डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई भी की थी।

---------------------

अब सीधे मरीजों की ¨जदगी से खिलवाड़

सूत्रों के मुताबिक करीब 3-4 महीने पहले यहां कार्यरत नेफरोलाजिस्ट डॉक्टर ने कंपनी में अपना नौकरी से रिजाइन दे दिया। करीब एक महीने तक कंपनी ने उन्हें नोटिस पीरियड पर रखा और एक अन्य डॉक्टर आने पर पहले को नौकरी से रिलीव कर दिया। यहां आए नया डॉक्टर कुछ दिन पूर्व कहीं गायब है। वह लंबी छुट्टी पर चले गए हैं। ऐसे में अब बिना डॉक्टर के ही तकनीकी स्टाफ मरीजों की जान का रिस्क लेकर उनका डायलिसिस कर रहा है।

---------------------

10 मिनट के लिए औपचारिक ड्यूटी पर आता डॉक्टर

सेंटर में कोई डॉक्टर नहीं बारे संबंधित अधिकारियों को बता दिया गया है। फिलहाल अपना काम चलाने के लिए सेंटर में हृदय रोग सेंटर में कार्यरत एक डॉक्टर की ड्यूटी लगाई गई है। लेकिन वह डॉक्टर भी औपचारिक तौर पर दिन में महज 5 से 10 मिनट के लिए आता है और अपनी हाजिरी लगाकर चला जाता है। ऐसे में सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि किस तरह मरीजों की ¨जदगी से खिलवाड़ किया जा रहा है और यह लापरवाही कभी भी स्वास्थ्य विभाग पर भारी पड़ सकती है।

--------------------

मैनेजर ने नहीं की बात

इस बारे में डायलिसिस सेंटर की मैनेजर गायत्री से कई बार फोन कर संपर्क करने का प्रयास किया गया लेकिन उनसे इस मामले को लेकर बात नहीं हो पाई। वहीं स्वास्थ्य विभाग के एक बड़े अधिकारी ने भी मंत्री के डर से अपना नाम लिखने से इंकार कर दिया।

Posted By: Jagran