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शहीद स्मारक के उद्घाटन के बाद भावुक हुए अनिल विज, माथे से मिट्टी लगाकर वीर बलिदानियों को किया नमन

Published: Thu, 05 Nov 2026 11:55 PM (IST)

परिवहन मंत्री अनिल विज ने अंबाला छावनी में 1857 क्रांति के शहीदों के लिए बने शहीद स्मारक का लोकार्पण किया। ...और पढ़ें

अमित शाह के साथ अनिल विज। फोटो जागरण

अमित शाह के साथ अनिल विज। फोटो जागरण

HighLights

  1. अनिल विज ने अंबाला शहीद स्मारक का लोकार्पण किया।

  2. 1857 क्रांति में अंबाला की भूमिका पर जोर दिया।

  3. स्मारक में 23 दीर्घाएं, आधुनिक तकनीक का उपयोग।

दीपक बहल, अंबाला। 1857 की क्रांति का पहला बिगुल मेरठ से नहीं, बल्कि उससे नौ घंटे पहले अंबाला छावनी की धरती पर बजा था। यह केवल इतिहास का एक प्रसंग नहीं, बल्कि उन वीर सैनिकों के साहस और बलिदान की गाथा है, जिन्हें इतिहास के पन्नों में वह स्थान नहीं मिल पाया, जिसके वे हकदार थे। यह बात परिवहन मंत्री अनिल विज ने वीरवार को अंबाला छावनी में 1857 की क्रांति के शहीदों की स्मृति में बनाए गए शहीद स्मारक के लोकार्पण समारोह में कही।

अमित शाह की मौजूदगी में विज ने ऐतिहासिक दस्तावेजों और शोध का हवाला देते हुए अंबाला की भूमिका को विस्तार से सामने रखा। इस दौरान भावुक क्षण भी देखने को मिला, जब विज ने क्रांति की प्रथम धरा की मिट्टी को माथे से लगाकर वीर शहीदों को नमन किया। विज ने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग के पूर्व अध्यक्ष केसी यादव की पुस्तक के साथ 1823-24 और 1857 के ब्रिटिश गजेटियर तथा नेशनल आर्काइव्स के दस्तावेजों का उल्लेख किया।

23 दीर्घाओं में छह घंटे में देख सकेंगे आजादी की पूरी गाथा

विज ने बताया कि परिसर में कुल 23 दीर्घाएं बनाई गई हैं, जिनमें आधुनिक तकनीक के माध्यम से अंबाला, मेरठ, रानी लक्ष्मीबाई और राव तुलाराम सहित देश के विभिन्न हिस्सों के वीरों के संघर्ष और बलिदान को प्रदर्शित किया गया है। इन दीर्घाओं को पूरी तरह देखने के लिए आगंतुकों को करीब छह घंटे का समय निकालकर आना होगा।

स्मारक परिसर में 63 मीटर ऊंचा कमल के आकार का आकर्षक ढांचा भी बनाया गया है। इसके भीतर दो लिफ्ट और फूड कोर्ट की सुविधा है। 300 सीटों वाला आडिटोरियम भी तैयार किया गया है।

स्मारक में ऐसी विशेष दीर्घा बनाई गई है, जहां देश के उन गुमनाम नायकों को श्रद्धांजलि दी जा सकेगी, जिनके नाम इतिहास में दर्ज नहीं हो पाए। यहां आगंतुक अपने हस्ताक्षर कर उनके प्रति कृतज्ञता भी व्यक्त कर सकेंगे। श्रद्धांजलि के साथ विशेष ज्वाला का प्रज्वलित होना वीर बलिदानियों के प्रति सम्मान का प्रतीक होगा।

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