जागरण संवाददाता, अंबाला शहर : छावनी के तोपखाना में एक प्लाट पर निर्माण कार्य को लेकर तोड़फोड़ करने पहुंची मशीनों के साथ तोड़ फोड़ करने के मामले में तीन आरोपित बरी हो गए। मामले में कैटोनमेंट बोर्ड यही साबित नहीं कर पाया कि यह उनकी जगह है। मामले में पुलिस ने सात गवाह जरूर बनाए लेकिन किसी स्थानीय लोग को गवाह नहीं बनाया और वहीं मामले में मशीन के चालकों तक ने हमला होने से साफ इंकार कर दिया।

बता दें कि तोपखाना में एक प्लाट पर निर्माण किया जा रहा था। जिस पर कैंटोनमेंट की टीम 5 अगस्त को निर्माणाधीन को तोड़ने पहुंच गई और तोड़ना शुरू कर दिया। ऐसे में काफी लोग एकत्रित हो गए। उन्होंने जेसीबी पर हमला करके तोड़फोड़ करनी शुरू कर दी। मामले में 6 अगस्त को सीईओ वरूण कालिया ने एसपी को पत्र लिख दिया था। मुकदमा दर्ज होने के बाद आरोपितों की जमानत हो गई थी। मामले में पुलिस ने 7 गवाह तैयार किये। लेकिन केस में यह तय नहीं हुआ कि जमीन कैंटोनमेंट बोर्ड की है। कैंटोनमेंट की ओर से जांच अधिकारी को जमीन के दस्तावेज तक नहीं दिये गए। जिससे साबित हो सके यह जमीन कैटोनमेंट बोर्ड की है। इस दौरान सीडी भी अप्रूव नहीं कर सके, क्योंकि इसे जांच के लिए लैब में नहीं भेजा गया और न ही उसे सील किया गया। इसके अलावा जेसीबी चालक रमेश कुमार और पंकज कुमार थे। जिन्होंने बयान दिए कि डेढ़ दो सौ लोग थे और उनमें से ना किसी ने पत्थर मारा। इतना ही नहीं कि उन्होंने कोई शिकायत भी नहीं दी। इसके अलावा पुलिस ने किसी लोकल आदमी से बयान भी नहीं करवाये।

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यह था मामला

मुख्य अधिशासी अधिकारी छावनी परिषद वरुण कालिया ने शिकायत दर्ज करवायी थी। जिसमें ईश्वर, जगदीश कुमार और नरेश को आरोपित बनाया गया था। शिकायत पर 9 अगस्त 2016 में मुकदमा दर्ज हो गया था। छावनी परिषद की ओर से 2 अगस्त तथा 3 अगस्त अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की गई। जिसमें आरएचए परेड छावनी में 3 अगस्त को अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई पूरी नहीं हुई। क्योंकि भेजी गई पुलिस फोर्स साइट पर एकत्रित भीड़ हो गई थी। 5 अगस्त को ईशवर एएसआई, बलराज सहित छावनी परिषद के कार्यालय पहुंचे। जहां पर लिखित में दिया कि वह अतिक्रमण को स्वेच्छा से हटा देंगे। उन्हें परिषद की सहायता की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि अतिक्रमण के हटने पर कोई आपत्ति नहीं है। छावनी परिषद कार्यालय के स्टाफ के साथ तोपखाना बाजार चौकी के पुलिस अधिकारी ढांचे को नष्ट करने के लिए साइट पर गए। जहां कुछ शरारती तत्वों (वीडियोग्राफी में चेहरा नहीं दिखा) ने पास के क्षेत्र के लोगों को भड़का दिया तथा कार्यालय स्टाफ सहित सरकारी अधिकारियों के वाहनों पर हमला करके नुकसान पहुंचाया और सरकारी कार्य में बाधा डाली। इसके बाद मुकदमा दर्ज कर लिया गया था।

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मामले में कैंटोनमेंट बोर्ड ने कोई दस्तावेज नहीं दिया। जिससे साबित हो सके जमीन कैंटोनमेंट बोर्ड की है। यदि उनकी जमीन ही नहीं तो वह कार्रवाई नहीं कर सकते। इसके चलते अदालत ने पुलिस की ओर से बनाए गए तीन लोगों को बरी कर दिया।

अनिल सहोत्रा, बचाव पक्ष के वकील

Edited By: Jagran