-विदेश की जेलों से लौटने के बाद युवकों ने एजेंटों के खिलाफ दर्ज करवाए मुकदमे

जागरण संवाददाता, अंबाला शहर : गैर कानूनी ढंग से अमेरिका पहुंचाने वाले एजेंटों पर अंबाला के थानों में केस दर्ज हुए हैं। एजेंटों ने युवकों ने 12 से 14 लाख रुपये तक लिये हैं। अमेरिका में रहने के सपने लेकर वापस जेलों से लौटे युवकों के परिजनों ने जगह-जगह से कर्ज लेकर एजेंटों को यह रकम दी है। लेकिन अमेरिका पहुंचने से पहले ही डोंकरों ने उन्हें पनामा के जंगल में लाकर छोड़ दिया, जहां उन्हें रातें काटनी पड़ी। अब वहां से किसी तरह से भारत लौटे युवकों ने संबंधित थाना में एजेंटों के खिलाफ केस दर्ज करवाने शुरू कर दिये हैं। पनामा के जंगलों में रहना पड़ा

जनसूई के पुष्पिद्र सिंह ने सिटी में हुडा ग्राउंड के पास दफ्तर चलाने वाले एजेंट सुरेंद्र छिदा पर केस दर्ज कराया है। पुष्पिद्र ने अपने हिस्से की जमीन व मकान बेचकर 14 लाख रुपये एजेंट को दिये थे। 29 अप्रैल 2019 को इथोपिया, ब्राजील व बेरू से होते हुए मैक्सिको पहुंचा। यहा पहुंचने के बाद एजेंट को परिवार वालों ने सारी पेमेंट दे दी थी। वहां डोंकर ने पनामा के टापू पर लाकर छोड़ दिया। पांच दिन पनामा के जंगलों में चला। पनामा के जंगल में बने कैंप में 35 दिन तक रहा। इसके बाद वह बस में बैठकर कोस्टरिका चला गया। वहां पहले से ही 18-17 इंडियन मौजूद थे। उसके बाद कोस्टरिका से नकारा गोवा पहुंचे। वहां से वह अमेरिका में घुसने की कोशिश कर रहे थे। तभी अमेरिका बॉर्डर पर पहाड़ों की चढ़ाई के दौरान पेट्रोलिग आर्मी ने उन्हें पकड़ लिया। जेल व कैंपों में रखने के बाद 18 मई को डिपोर्ट कर दिया गया।

न रुपये लौटाये और न ही विदेश पहुंचे

वहीं गांव खापपुरा निवासी जगजोत सिंह का कहना है वह 12वीं तक पढ़ा है। 17 अप्रैल 2019 को शहर के एजेंट कप्तान सिंह के माध्यम से दिल्ली से इक्काडोर देश गया था। रुपयों की डील चाचा के साथ हुई थी। इक्काडोर पहुंचने के बाद डोंकर मिला और वह उसे एक होटल में ले गया। वहां से कार में पनामा के जंगल में छोड़ दिया। यहां पनामा के जंगल में 25 दिन तक रहा। जब अमेरिका में दाखिल होने लगे तो पुलिस ने पकड़ लिया। कैलिफोर्निया आर्मी ने पकड़ जेल भेजा

वहीं गांव मलौर के नवजोत सिंह बताते हैं उसे एजेंट गांव बकनौर निवासी कप्तान सिंह ने उसे अमेरिका भेजा था। दिल्ली से इक्काडोर पहुंच। यहां डोंकर ने आकर उसे फोटो दिखाई और होटल में ले गया। वहां से शाम को तुलकान की टिकट कराई। इसके बाद वह कोलोंबिया बार्डर पर पहुंचा। यहां से डोंकर कोलोंबिया का बार्डर पहाड़ी के रास्ते से पार करवाया। इसके बाद एक कार मिली जिसमें दस लोग बैठे हुए थे। इस तरह वह कोलोंबिया पहुंच गये। इसके बाद डोंकर ने उसे कैपुरगाना के जंगल में लाकर छोड़ दिया। यहां वह पांच दिन तक रहा। इसके बाद वह चलते-चलते पनामा आर्मी कैंप तक पहुंचा। यहां कैंप में तीन दिन रहा। वहां से निकलने के बाद वह कोस्टरिका बार्डर पर छोड़ दिया गया। यहां से डोंकर ने मैक्सिको बार्डर पार करवाने के बाद केलिफोर्निया बॉर्डर की दीवार पार करवाई तो कुछ ही दूरी पर केलिफोर्निया आर्मी ने गिरफ्तार कर लिया गया।

Posted By: Jagran

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