जागरण संवाद केंद्र, अंबाला : राज्यपाल जगन्नाथ पहाडि़या ने कहा है कि तीर्थकरों और मुनियों द्वारा स्थापित मूल्यों व सिद्धांतों को अपनाकर ही मानव सभ्यता फलफूल रही है। इन्हीं मूल्यों को अपनाकर हम वर्तमान भौतिकवाद का सामना कर सकते है। जैन मुनि आज के भौतिकवादी वातावरण में त्याग की प्रतिमूर्ति के रूप में विद्यमान हैं। वह शुक्रवार को श्री दिगंबर जैन सभा द्वारा लॉर्ड महावीर पब्लिक स्कूल अंबाला छावनी में मुनि श्री 108 प्रमुख सागर जी महाराज के त्रिदिवसीय मर्यादा महोत्सव में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे। उन्होंने भगवान महावीर के चित्र के सम्मुख ज्योति प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।

उन्होंने कहा कि जैन मुनियों के त्याग, चर्या व आचरण का उदाहरण संसार में कहीं और देखने को नहीं मिलता जिन्होंने अपने वस्त्रों तक का त्याग कर दिया, दिन में एक बार आहार, घर परिवार का त्याग और संपूर्ण देश की अविराम पैदल यात्रा का धर्म की अलख व अहिसा की ज्योति जला दी। ऐसे मुनियों को उनका बार-बार वंदन। जैन धर्म अनुयायी कण-कण में विद्यमान ईश्वर की सत्ता को नमन करते हैं और सदभाव का संदेश देते है। आधुनिक युग में इसी प्रकार की दृष्टि हमें महात्मा गाधी के दर्शन में मिलती है। राज्यपाल ने कहा कि धर्म मानव को जोड़ता है, लेकिन वर्तमान युग में यही सबसे बड़ी चुनौती बन गई है। धर्म के नाम पर देश तक बंट गए हैं। भारत-पाकिस्तान का उदाहरण तो हमारे सामने है ही, सोवियत संघ भी इसी कारण टुकडे़-टुकड़े हो गया। उन्होंने कहा कि जैन धर्म में भी श्वेतांबर, दिगंबर व पितांबर बने हुए है। आजकल मेवाड़ में वीरवाल नाम से एक नया संप्रदाय बना है। उन्होंने स्वयं को गाधी जी का प्रशंसक बताते हुए कहा कि आज यदि गाधी जी होते तो उन्हे भी समय के अनुसार बदलाव करने पड़ते। उन्होंने कहा कि यह खुशी की बात है कि जैन मुनियों ने भी समय के साथ बदलाव किए हैं और राजस्थान में मरूधर केसरी ने नई दिशा दी है।

इस अवसर पर जैन मुनि प्रमुख सागर जी महाराज ने कहा कि जैन कुल में जन्म लेने से कोई जैन नहीं बन जाता। अच्छे आचरणों व भावनाओं से ही जैन धर्म अपनाया जा सकता है। इस अवसर पर मंडलायुक्त व डीसी समेत विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।

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